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Reading: पद्मपुराण (Padma Purana)
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पुराणधार्मिक पुस्तकेपद्मपुराण

पद्मपुराण (Padma Purana)

Sanatani
Last updated: फ़रवरी 17, 2026 6:06 अपराह्न
Sanatani
Published: फ़रवरी 17, 2026
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पद्मपुराण: वैष्णव परंपरा का दिव्य ग्रंथ और धर्म का मार्गदर्शक (Padma Purana)

पद्मपुराण(Padma Purana) हिंदू धर्म के प्रमुख पुराणों में से एक है, जिसे अत्यंत पवित्र और महिमामय माना गया है। शास्त्रों में इसे भगवान श्रीहरि का ही स्वरूप बताया गया है। जिस प्रकार सूर्य बाहरी अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार यह पुराण मनुष्य के हृदय के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने का कार्य करता है।

Contents
  • पद्मपुराण: वैष्णव परंपरा का दिव्य ग्रंथ और धर्म का मार्गदर्शक (Padma Purana)
  • चार पुरुषार्थों का सुंदर समन्वय
  • भगवान विष्णु की सर्वोच्चता और त्रिमूर्ति की एकता
  • अवतारों और तीर्थों का विस्तृत वर्णन
  • धर्म, आचार और जीवन-मूल्यों का संपूर्ण मार्गदर्शन
  • पद्मपुराण की संरचना
  • प्रमुख कथाएँ और उनकी शिक्षाएँ
    • 1. हिरण्याक्ष और वराह अवतार
    • 2. दक्ष यज्ञ और सती
    • 3. रामकथा
  • उपासना विधियाँ और भक्ति का मार्ग
  • पद्मपुराण हिंदी में
  • પદ્મપુરાણ ગુજરાતી (Padma Puran In Gujarati)
  • पद्मपुराण पर आधारित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर: Padma Purana FAQs
    • Q1: पद्मपुराण किसने रचा था?
    • Q2: पद्मपुराण में कितने खंड हैं?
    • Q3: पद्मपुराण का मुख्य विषय क्या है?
    • Q4: पद्मपुराण में विष्णु की किस अवतार की कथा विशेष रूप से वर्णित है?
    • Q5: पद्मपुराण का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
    • Q6: पद्मपुराण का सबसे बड़ा खंड कौन सा है?
    • Q7: पद्मपुराण में किस देवी की महिमा का वर्णन है?
    • Q8: पद्मपुराण का नाम ‘पद्मपुराण’ क्यों पड़ा?

धर्मग्रंथों में कहा गया है कि जैसे वेदों का नित्य स्वाध्याय आवश्यक है, वैसे ही पुराणों का श्रवण भी अत्यंत कल्याणकारी है — “पुराणं शृणुयान्नित्यम्”।

श्रीमद्भागवतमें लिखा है-

Image Source Copilot Designer

धर्मस्य ह्यापवर्ग्यस्य नार्थोऽर्थायोपकल्पते ।
नार्थस्य धर्मैकान्तस्य कामो लाभाय हि स्मृतः ।।
कामस्य नेन्द्रियप्रीतिर्लाभो जीवेत यावता ।
जीवस्य तत्त्वजिज्ञासा नार्थो यश्चेह कर्मभिः ॥ (१।२।९-१०)

‘धर्मका फल है- संसारके बन्धनोंसे मुक्ति, भगवान्‌की प्राप्ति। उससे यदि कुछ सांसारिक सम्पत्ति उपार्जन कर ली तो यह उसकी कोई सफलता नहीं है। इसी प्रकार धनका फल है

पद्मपुराणमें ही लिखा है

यो विद्याच्चतुरो वेदान् साङ्गोपनिषदो द्विजः ।
पुराणं च विजानाति यः स तस्माद्विचक्षणः ॥
(सृष्टि० २।५०-५१)

चार पुरुषार्थों का सुंदर समन्वय

पद्मपुराण में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — इन चारों पुरुषार्थों का संतुलित और गहन वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ स्पष्ट करता है कि धर्म का अंतिम उद्देश्य केवल सांसारिक सफलता नहीं, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति है।

श्रीमद्भागवत में भी उल्लेख है कि धर्म का फल भगवान की प्राप्ति है, न कि केवल भौतिक लाभ। इसी प्रकार अर्थ और काम भी धर्म के अधीन होने चाहिए।

भगवान विष्णु की सर्वोच्चता और त्रिमूर्ति की एकता

पद्मपुराण में भगवान विष्णु को सर्वोच्च देवता के रूप में स्वीकार किया गया है। फिर भी इसमें ब्रह्मा, विष्णु और शिव की एकता का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है।

ग्रंथ के अनुसार सृष्टि, पालन और संहार — ये तीनों कार्य एक ही परमात्मा के विभिन्न रूप हैं। वही भगवान विष्णु सृष्टि के समय ब्रह्मा के रूप में प्रकट होते हैं, पालन के लिए विष्णु रूप धारण करते हैं और संहार के समय रुद्र रूप में प्रकट होते हैं।

श्रीकृष्ण के वचनों के अनुसार सूर्य, शिव, गणेश, विष्णु और शक्ति — किसी भी रूप की उपासना अंततः उसी परम तत्व तक पहुँचाती है, जैसे वर्षा का जल अंत में समुद्र में ही समाहित हो जाता है।

अवतारों और तीर्थों का विस्तृत वर्णन

पद्मपुराण में भगवान विष्णु के साथ-साथ उनके अवतारों का भी विस्तृत वर्णन मिलता है। विशेष रूप से श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरित्रों का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया गया है।

पातालखंड में श्रीराम के अश्वमेध यज्ञ, अयोध्या और वृंदावन के माहात्म्य, राधा-कृष्ण की लीलाओं तथा वैष्णव आचार-विचार का विस्तार से वर्णन है।

इस ग्रंथ में तिलक की विधि, पंच प्रकार की पूजा, शालग्राम की महिमा, तुलसी पूजन, एकादशी व्रत, जन्माष्टमी, गोपीचंदन तिलक, गंगा की महिमा तथा विभिन्न महीनों में विशेष पूजा-विधानों का उल्लेख मिलता है।

धर्म, आचार और जीवन-मूल्यों का संपूर्ण मार्गदर्शन

पद्मपुराण केवल देवकथाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक पक्ष का मार्गदर्शन करता है। इसमें आश्रम-धर्म, दान, व्रत, श्राद्ध, तीर्थयात्रा, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ धर्म, वानप्रस्थ और संन्यास के नियमों का विस्तृत वर्णन है।

गंगा की महिमा, रुद्राक्ष का महत्व, गायत्री मंत्र की शक्ति, गौदान का फल और सत्संग की आवश्यकता जैसे विषयों को भी इसमें विशेष स्थान दिया गया है।

यह ग्रंथ मानव जीवन के दुख-सुख, जन्म-मरण, पाप-पुण्य, स्वर्ग-नरक और मोक्ष के सिद्धांतों को सरल और प्रभावी ढंग से समझाता है।

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पद्मपुराण की संरचना

पद्मपुराण लगभग 55,000 से अधिक श्लोकों वाला विस्तृत ग्रंथ है। इसे मुख्यतः छह खंडों में विभाजित किया गया है:

  1. सृष्टि खंड – सृष्टि की उत्पत्ति और ब्रह्मांड की रचना
  2. भूमि खंड – पृथ्वी, भूगोल और तीर्थों का वर्णन
  3. स्वर्ग खंड – देवताओं और स्वर्गलोक का विवरण
  4. पाताल खंड – पाताल लोक और असुरों की कथाएँ
  5. उत्तर खंड – धर्म, व्रत और उपासना विधियाँ
  6. काल खंड – समय और उसकी गणना का महत्व

प्रमुख कथाएँ और उनकी शिक्षाएँ

1. हिरण्याक्ष और वराह अवतार

इस कथा में असुर हिरण्याक्ष द्वारा पृथ्वी को पाताल में ले जाने पर भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण कर उसका उद्धार किया। यह कथा धर्म की विजय और अधर्म के अंत का संदेश देती है।

2. दक्ष यज्ञ और सती

राजा दक्ष के यज्ञ और सती के आत्मदाह की कथा अहंकार के दुष्परिणाम को दर्शाती है। यह प्रसंग पारिवारिक सम्मान और श्रद्धा का महत्व सिखाता है।

3. रामकथा

पद्मपुराण में रामायण की कथा का भी विस्तार से वर्णन है, जिसमें वनवास, रावण वध और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन का चित्रण मिलता है।

उपासना विधियाँ और भक्ति का मार्ग

पद्मपुराण में भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की उपासना विधियों का वर्णन है।

  • शिव उपासना में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र और बिल्वपत्र अर्पण का महत्व बताया गया है।
  • विष्णु भक्ति में विष्णु सहस्रनाम का पाठ, तुलसी दल अर्पण और एकादशी व्रत का विशेष महत्व है।

यह ग्रंथ भक्ति को मोक्ष का सर्वोत्तम साधन मानता है और हरिभजन की आवश्यकता पर बल देता है।

पद्मपुराण हिंदी में

Padma Puran

પદ્મપુરાણ ગુજરાતી (Padma Puran In Gujarati)

પદ્મપુરાણ Padma Puran In Gujarati

पद्मपुराण पर आधारित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर: Padma Purana FAQs

Q1: पद्मपुराण किसने रचा था?

A1: पद्मपुराण की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी।

Q2: पद्मपुराण में कितने खंड हैं?

A2: पद्मपुराण में कुल 5 खंड हैं: सृष्टिखंड, भूखण्ड, स्वर्गखंड, पातालखंड, और उत्तरखंड।

Q3: पद्मपुराण का मुख्य विषय क्या है?

A3: पद्मपुराण का मुख्य विषय सृष्टि की उत्पत्ति, देवी-देवताओं की कथाएं, और धर्म, नीति तथा भक्ति का महत्त्व है।

Q4: पद्मपुराण में विष्णु की किस अवतार की कथा विशेष रूप से वर्णित है?

A4: पद्मपुराण में भगवान विष्णु के राम अवतार की कथा विशेष रूप से वर्णित है।

Q5: पद्मपुराण का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

A5: पद्मपुराण का पाठ करने से धार्मिक ज्ञान की प्राप्ति, पुण्य का अर्जन, और आध्यात्मिक शांति मिलती है।

Q6: पद्मपुराण का सबसे बड़ा खंड कौन सा है?

A6: पद्मपुराण का सबसे बड़ा खंड ‘उत्तरखंड’ है।

Q7: पद्मपुराण में किस देवी की महिमा का वर्णन है?

A7: पद्मपुराण में देवी लक्ष्मी की महिमा का विस्तृत वर्णन है।

Q8: पद्मपुराण का नाम ‘पद्मपुराण’ क्यों पड़ा?

A8: पद्मपुराण का नाम ‘पद्मपुराण’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें कमल (पद्म) से उत्पन्न होने वाले भगवान विष्णु और उनके विभिन्न रूपों का वर्णन किया गया है।

प्रश्नोपनिषद
नारद पुराण (Narada Puran)
कूर्म पुराण
मत्स्य पुराण
गरुड़ पुराण
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