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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > विष्णु भजन > मैं नित भगतन हाथ बिकाऊँ
भजनविष्णु भजन

मैं नित भगतन हाथ बिकाऊँ

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 2:23 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
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मैं नित भगतन हाथ बिकाऊँ – Main Nit Bhagatan Haath Bikaoon

मैं नित भगतन हाथ बिकाऊँ ।

आठौं जाम हृदयमें राखूँ, पलक नहीं बिसराऊँ ।॥

कल न परत बैकुंठ बसत मोहि, जोगिन मन न समाऊँ।

जहें मम भगत प्रेमजुत गावहिं, तहाँ बसत सुख पाऊँ ।।

भगतनकी जैसी रुचि देखूँ, तैसो बेष बनाऊँ ।

टारूँ अपने बचन भगत लगि, तिनके बचन निभाऊँ ।।

ऊँच-नीच सब काज भगतके, निज कर सकल बनाऊँ।

पग धोऊँ, रथ हाँकूँ, माँजू बासन, छानि छवाऊँ ॥

माँगू नाहिं दाम कछु तिनतें, नहिं कछु तिनहिं सताऊँ ।

प्रेमसहित जल, पत्र, पुष्प, फल, जो देवै सो खाऊँ ।।

निज-सरबस भगतनको सौंपूँ, अपनो स्वत्व भुलाऊँ ।

भगत कहें सोइ करूँ, निरंतर, बेचें तो बिक जाऊँ ।।

स्याम मोरे ढिगतें कबहुँ न जावै – Syam More Dhigaten Kabahun Na Javai
हरि को हरि जन अतिहि पियारे
स्यामने मुरली मधुर बजाई | Syam ne Murali Madhur Bajae
अब मत तरसाओजो मनमोहन नंदलाल – Ab Mat Tarasaojo Manamohan Nandalaal 
जय जगदीश हरे प्रभु जय जगदीश हरे
TAGGED:राग पूर्वी ( Raag Purvi )श्री विष्णु चरण वन्दन ( Shree Vishnu Charan Vandan )श्री विष्णु भजन ( Shree Vishnu Bhajan )
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