26.7 C
Gujarat
शनिवार, फ़रवरी 7, 2026

ज्यों ज्यों मैं पीछे हटता हूँ त्यों त्यों तुम आगे आते

Post Date:

Jyon Jyon Main Peche Hatata Hoon Tyon Tyon Tum Aage Aate

ज्यों ज्यों मैं पीछे हटता हूँ त्यों त्यों तुम आगे आते ।

छिपे हुए परदोंमें अपना मोहन मुखड़ा दिखलाते ।।

पर मैं अंधा ! नहीं देखता परदोंके अंदरकी चीज़ ।

मोह-मुग्ध मैं देखा करता परदे बहुरंगे नाचीज़ ॥ १ ॥

परदोंके अंदरसे तुम हँसते प्यारी मधुरी हाँसी ।

चित्त खींचनेको तुम तुरत बजा देते मीठी बाँसी ॥

सुनता हूँ, मोहित होता, दर्शनकी भी इच्छा करता ।

पाता नहीं देख, पर, जडमति ! इधर-उधर मारा फिरता ।। २ ।।

तरह तरहसे ध्यान खींचते करते विविध भाँति संकेत ।

चौकन्ना-सा रह जाता हूँ, नहीं समझता मूर्ख अचेत ॥

तो भी नहीं ऊबते हो तुम, परदा जरा उठाते हो।

धीरेसे संबोधन करके अपने निकट बुलाते हो ॥ ३ ॥

इतने पर भी नहीं देखता, सिंह गर्जना तब करते ।

तन-मन-प्राण काँप उठते हैं, नहीं धीर कोई घरते ।।

डरता, भाग छूटता, तब आश्वासन देकर समझाते ।

ज्यों ज्यों मैं पीछे हटता हूँ त्यों त्यों तुम आगे आते || ४ ||

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!