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खड़ा अपराधी प्रभुके द्वार (Khada Aparaadhee Prabhuke Dvaar)

Sanatani
Last updated: मार्च 18, 2026 6:38 अपराह्न
Sanatani
Published: मार्च 18, 2026
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खड़ा अपराधी प्रभुके द्वार (Khada Aparaadhee Prabhuke Dvaar)

खड़ा अपराधी प्रभुके द्वार !

न्याय चाहता, क्षमा नहीं, दो दण्ड दोष अनुसार ॥१॥

अर्थ-दण्ड देना चाहो तो करो स्वार्थ सब छार ।

रहने मत दो कुछ भी इसके ‘अपना’ ‘मेरा’ कार ॥२॥

क़ैद अगर करना चाहो तो प्रेम-बेड़ियाँ डार ।

रक्खो बाँध इसे नित निज चरणोंके कारागार ||३||

निर्वासित करना चाहो तो लूटो घर-संसार ।

पहुँचा दो सत्वर दोषीको भव-समुद्रके पार ||४||

कभी न आने दो फिर वापस, मरने दो बेकार ।

बह जाने दो इसे वहाँ सच्चिदानंदकी धार ॥५॥

राम भजो राम भजो माई – Ram Bhajo Ram Bhajo Mai
देव दूसरो कौन दोनको दयालु ( Dev Doosaro Kaun Donako Dayaalu )
दुर्जन संग कबहुँ नहिं कीजै
अब हरि एक भरोसो तेरो
एक लालसा मनमहँ धारौं
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