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SanatanWeb.com > Blog > आरोग्य > आयुर्वेद > आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वन्तरि
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आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वन्तरि

Sanatani
Last updated: फ़रवरी 22, 2026 5:17 अपराह्न
Sanatani
Published: फ़रवरी 22, 2026
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भगवान धन्वन्तरि आयुर्वेद के देवता और चिकित्सा शास्त्र के महान प्रवर्तक माने जाते हैं। हिन्दू धर्म में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, और उन्हें चिकित्सा एवं औषधियों का जनक कहा जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, धन्वन्तरि का अवतार समुद्र मंथन के समय हुआ था। जब देवताओं और असुरों द्वारा अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया गया, तब भगवान धन्वन्तरि अपने हाथों में अमृत कलश लिए प्रकट हुए। वे न केवल अमृत के वाहक थे, बल्कि अपने साथ चिकित्सा और औषधियों का ज्ञान भी लेकर आए, जो मानव जीवन की रक्षा और स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।

Contents
  • धन्वन्तरि आयुर्वेद के पिता – God Of Ayurveda Dhanvantari
  • आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति
  • धन्वंतरी के वंशज की जानकारी
  • धन्वंतरी मंत्र Dhanvantari Mantra
  • धन्वंतरी स्तोत्रम् Dhanvantari Stotram
  • धन्वंतरी आरती Dhanvantari Aarti
    • Q1: भगवान धन्वन्तरि कौन थे?
    • Q2: धन्वन्तरि का आयुर्वेद में क्या महत्व है?
    • Q3: धन्वन्तरि की पूजा कब की जाती है?
    • Q4: आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    • Q5: धन्वन्तरि का चित्रण किस रूप में किया जाता है?

धन्वन्तरि आयुर्वेद के पिता – God Of Ayurveda Dhanvantari

धन्वन्तरि को आयुर्वेद का पिता माना जाता है, और उनकी कृपा से ही चिकित्सा विज्ञान ने प्रारम्भिक रूप से आकार लिया। वे चिकित्सा के ज्ञाता और सभी रोगों का निवारण करने वाले देवता माने जाते हैं। उनकी पूजा विशेष रूप से दीपावली के एक दिन पूर्व, धनतेरस के दिन की जाती है। इस दिन लोग स्वास्थ्य, समृद्धि, और लंबी आयु की कामना करते हुए भगवान धन्वन्तरि की पूजा करते हैं, और यह दिन आयुर्वेद तथा चिकित्सा के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के रूप में मनाया जाता है।

धन्वन्तरि का वर्णन कई पुराणों और शास्त्रों में मिलता है। विष्णु पुराण में बताया गया है कि वे विष्णु के अवतार हैं और मानवता के लिए चिकित्सा विज्ञान का उपहार लेकर आए। महाभारत में भी धन्वन्तरि का उल्लेख मिलता है, जहां उन्हें औषधि विज्ञान और सर्जरी के महान ज्ञाता के रूप में वर्णित किया गया है। उनकी शिक्षा और सिद्धांतों ने आयुर्वेद को एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिया और इसे चिकित्सा के एक सटीक और व्यवस्थित विज्ञान के रूप में प्रतिष्ठित किया।

आयुर्वेद, जिसका अर्थ है ‘जीवन का विज्ञान,’ भगवान धन्वन्तरि की देन है। आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य और संतुलित जीवन को बनाए रखना है। इसमें आहार, जीवनशैली, और प्राकृतिक औषधियों के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। भगवान धन्वन्तरि ने मानव जाति को बताया कि रोगों से मुक्ति पाने के लिए हमें प्रकृति के करीब रहना चाहिए और उसकी शक्ति का सम्मान करना चाहिए।

भगवान धन्वन्तरि का चित्रण अक्सर चार हाथों वाले देवता के रूप में किया जाता है। उनके एक हाथ में अमृत का कलश, दूसरे हाथ में औषधि, तीसरे हाथ में शंख, और चौथे हाथ में चक्र होता है। यह चित्रण उनके विभिन्न गुणों और क्षमताओं का प्रतीक है। अमृत का कलश उनकी दीर्घायु और अमरता की शक्ति का प्रतीक है, जबकि औषधि उनके आयुर्वेदिक ज्ञान और चिकित्सा के प्रति उनकी महारत को दर्शाती है। शंख और चक्र उनके विष्णु रूप का प्रतीक हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वे सृष्टि के पालनकर्ता और संरक्षक भी हैं।

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति

धन्वन्तरि के आयुर्वेदिक सिद्धांतों के आधार पर कई चिकित्सा पद्धतियाँ विकसित हुई हैं, जिनमें पंचकर्म, रसशास्त्र, और हर्बल चिकित्सा शामिल हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा का मूल आधार यह है कि मानव शरीर में तीन दोष होते हैं – वात, पित्त, और कफ। जब ये तीनों दोष संतुलित रहते हैं, तब व्यक्ति स्वस्थ रहता है, लेकिन जब इनका असंतुलन हो जाता है, तो रोग उत्पन्न होते हैं। भगवान धन्वन्तरि ने यह सिद्धांत दिया कि जीवनशैली, आहार, और चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से इन दोषों को संतुलित किया जा सकता है और व्यक्ति को स्वास्थ्य प्रदान किया जा सकता है।

भगवान धन्वन्तरि का योगदान केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है। उन्होंने मानव जाति को सिखाया कि जीवन के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सिखाया कि एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ मन और आत्मा का वास होता है, और इसके लिए हमें अपने दैनिक जीवन में आयुर्वेदिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।

धन्वंतरी के वंशज की जानकारी

धन्वंतरी के वंशजों की बात करें तो पौराणिक कथाओं में धन्वंतरी को सीधे वंशजों से जोड़ने वाली कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि, कुछ परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार, उनके शिष्य या अनुयायी आयुर्वेद के प्रचारक बने और उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाया। आयुर्वेद के विकास में विभिन्न ऋषियों और चिकित्सकों का योगदान रहा है, जिन्होंने धन्वंतरी से प्रेरणा प्राप्त की और आयुर्वेद की शिक्षा को आगे बढ़ाया।

धन्वंतरी की शिक्षा और उनकी चिकित्सा पद्धतियों को उनके शिष्यों द्वारा आगे बढ़ाया गया, और धीरे-धीरे यह ज्ञान भारतीय समाज में गहराई से स्थापित हो गया। धन्वंतरी के नाम पर धन्वंतरि जयंती का उत्सव मनाया जाता है, जो दिवाली के पहले दिन मनाया जाता है।

उनकी पूजा और सम्मान आज भी वैद्य, चिकित्सक और आयुर्वेद के अनुयायियों द्वारा की जाती है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों के लिए धन्वन्तरि केवल एक देवता नहीं हैं, बल्कि एक आदर्श और प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी शिक्षाओं और सिद्धांतों का पालन करके ही आज भी आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली लाखों लोगों को लाभ पहुंचा रही है।

धन्वन्तरि की महानता को समझने के लिए हमें केवल उनकी औषधीय और चिकित्सा की देन को ही नहीं, बल्कि उनके द्वारा प्रतिपादित जीवनशैली और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को भी समझना होगा। वे हमें सिखाते हैं कि जीवन एक उपहार है, और इसे स्वस्थ, संतुलित, और सामंजस्यपूर्ण ढंग से जीना चाहिए। आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि एक जीवन जीने की कला है, और धन्वन्तरि इसके महान गुरु हैं।

धन्वंतरी मंत्र Dhanvantari Mantra

ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धनवंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणाय।
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धन्वंतरि स्वरूप श्री श्री श्री अष्टचक्र नारायणाय नमः॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्त्रये अमृतकलश हस्ताय सर्वामय विनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे नमः ||

धन्वंतरी स्तोत्रम् Dhanvantari Stotram

ओम शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः।
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम॥
कालाम्भोदोज्ज्वलांगं कटितटविलसच्चारूपीतांबराढ्यम।
वन्दे धन्वंतरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम॥

धन्वंतरी आरती Dhanvantari Aarti

ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा ॥ १ ॥

पूरी आरती के लिइ इस लिंक पर जाए

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Q1: भगवान धन्वन्तरि कौन थे?

A1: भगवान धन्वन्तरि आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं और चिकित्सा शास्त्र के महान प्रवर्तक हैं। वे समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।

Q2: धन्वन्तरि का आयुर्वेद में क्या महत्व है?

A2: भगवान धन्वन्तरि को आयुर्वेद का पिता माना जाता है। उन्होंने चिकित्सा और औषधियों का ज्ञान दिया, जो मानव जीवन की रक्षा और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

Q3: धन्वन्तरि की पूजा कब की जाती है?

A3: धन्वन्तरि की पूजा विशेष रूप से धनतेरस के दिन, दीपावली के एक दिन पूर्व, की जाती है। इस दिन स्वास्थ्य, समृद्धि, और लंबी आयु की कामना की जाती है।

Q4: आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A4: आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य और संतुलित जीवन को बनाए रखना है। इसमें आहार, जीवनशैली, और औषधियों पर ध्यान दिया जाता है।

Q5: धन्वन्तरि का चित्रण किस रूप में किया जाता है?

A5: भगवान धन्वन्तरि को चार हाथों वाले देवता के रूप में दिखाया जाता है, जिनमें एक हाथ में अमृत कलश, दूसरे में औषधि, तीसरे में शंख और चौथे में चक्र होता है, जो उनके विभिन्न गुणों का प्रतीक है।

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