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नदी स्तोत्रस्तोत्र

त्रिवेणी स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 26, 2026 6:24 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 26, 2026
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त्रिवेणी स्तोत्रम्

त्रिवेणी स्तोत्रम्(Triveni Stotram) एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है, जो तीन प्रमुख नदीयों गंगा, यमुना और सरस्वती की महिमा का गुणगान करता है। यह स्तोत्र इन तीनों नदियों को दिव्य माता के रूप में पूजता है और उनकी कृपा से पापों का नाश, आत्मशुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

Contents
  • त्रिवेणी स्तोत्रम्
  • त्रिवेणी स्तोत्रम् का पाठ करने के लाभ
  • पाठ करने का सही समय और विधि
  • त्रिवेणी स्तोत्रम्

त्रिवेणी संगम का हिंदू धर्म में अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व है। यह वह पवित्र स्थल है जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी का मिलन होता है। प्रयागराज (इलाहाबाद) स्थित इस संगम को पवित्रतम तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस संगम में स्नान करने और त्रिवेणी स्तोत्रम् का पाठ करने से सभी पापों का नाश होता है और मुक्ति प्राप्त होती है।

त्रिवेणी स्तोत्रम् का पाठ करने के लाभ

  1. पापों का नाश और आत्मशुद्धि – इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से पिछले जन्मों और इस जन्म के पापों का नाश होता है।
  2. मोक्ष की प्राप्ति – त्रिवेणी संगम पर स्नान करते हुए इस स्तोत्र का जाप करने से मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग खुलता है।
  3. ज्ञान, भक्ति और शुद्ध प्रेम – यह स्तोत्र विद्या, आध्यात्मिकता और प्रेम को बढ़ाने में सहायक होता है।
  4. मानसिक शांति और समृद्धि – इस स्तोत्र का पाठ करने से मन की शांति प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
  5. शुभता और देवी कृपा – माँ गंगा, यमुना और सरस्वती की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति होती है।

पाठ करने का सही समय और विधि

  • प्रातःकाल या संध्याकाल में शुद्ध मन से इस स्तोत्र का पाठ करना उत्तम होता है।
  • संगम तट पर या किसी नदी के किनारे पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
  • इस स्तोत्र को गंगा दशहरा, मकर संक्रांति, कार्तिक पूर्णिमा और अन्य पवित्र अवसरों पर पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • गंगा, यमुना और सरस्वती का ध्यान करते हुए जल का आचमन करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

त्रिवेणी स्तोत्रम्

मुक्तामयालङ्कृतमुद्रवेणी भक्ताभयत्राणसुबद्धवेणी।
मत्तालिगुञ्जन्मकरन्दवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

लोकत्रयैश्वर्यनिदानवेणी तापत्रयोच्चाटनबद्धवेणी।
धर्माऽर्थकामाकलनैकवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

मुक्ताङ्गनामोहन-सिद्धवेणी भक्तान्तरानन्द-सुबोधवेणी।
वृत्त्यन्तरोद्वेगविवेकवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

दुग्धोदधिस्फूर्जसुभद्रवेणी नीलाभ्रशोभाललिता च वेणी।
स्वर्णप्रभाभासुरमध्यवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

विश्वेश्वरोत्तुङ्गकपर्दिवेणी विरिञ्चिविष्णुप्रणतैकवेणी।
त्रयीपुराणा सुरसार्धवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

माङ्गल्यसम्पत्तिसमृद्धवेणी मात्रान्तरन्यस्तनिदानवेणी।
परम्परापातकहारिवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

निमज्जदुन्मज्जमनुष्यवेणी त्रयोदयोभाग्यविवेकवेणी।
विमुक्तजन्माविभवैकवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

सौन्दर्यवेणी सुरसार्धवेणी माधुर्यवेणी महनीयवेणी।
रत्नैकवेणी रमणीयवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

सारस्वताकारविघातवेणी कालिन्दकन्यामयलक्ष्यवेणी।
भागीरथीरूपमहेशवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

श्रीमद्भवानीभवनैकवेणी लक्ष्मीसरस्वत्यभिमानवेणी।
माता त्रिवेणी त्रयीरत्नवेणी श्रीमत्प्रयागे जयति त्रिवेणी।

त्रिवेणीदशकं स्तोत्रं प्रातर्नित्यं पठेन्नरः।
तस्य वेणी प्रसन्ना स्याद् विष्णुलोकं स गच्छति।

सूर्य कवच
महागणपति सहस्रनाम
नरसिंह स्तोत्र
गौरिकृतं हेरम्ब स्तोत्रम्
श्री रामभद्र स्तोत्रम्
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