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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > विष्णु भजन > सौंप दिये मन प्राण उसी को मुखसे गाते उसका नाम
भजनविष्णु भजन

सौंप दिये मन प्राण उसी को मुखसे गाते उसका नाम

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 4:46 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
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सौंप दिये मन प्राण उसी को मुखसे गाते उसका नाम

 

सौंप दिये मन-प्राण उसीको, मुखसे गाते उसका नाम ।

कर्माकर्म चुकाकर सारे चलते हैं अब उसके धाम ॥

इंद्रियग्राम लेकर विषयोंको मरा करें इच्छा अनुसार ।

हम तो हैं अनुगत उसके ही, वही हमारा प्राणाधार ।।

प्रेम उसीके से प्रेमिक बन, गाते सब उसका गुण-गान ।

उसकी नासा पुष्प उसीके-से लेती नित उसकी घाण ॥

उसके प्राणोंकी व्याकुलता सत्र प्राणोंमें जाग रही ।

इसी हेतु बैठे योगासन वृत्ति उसीमें लाग रही ।।

उसके ही रससे रसिका बन रसना हो गइ दीवानी ।

विषयोंके रस बिरस हुए सब, नहीं कर सकै मनमानी ॥

आँख उसीकी, देख रहीं नित उसका रूप परम सुंदर ।

कान उसीके सुनते उसका सदा सुरीला कंठस्वर ।।

देह उसीकी करती नित आवेग-भरा परसन उससे ।

मन-प्राण भर उठे, दीखता सारा जगत भरा उससे ॥

सभी भुलाकर सोच रहा वह कहाँ ? कौन ? मेरा मनचोर ।

हृदय-सलिलके अगाध तलमें खोजूँगा, यदि पाऊँ छोर ।।

जब वह अपने प्राणोंको मेरे प्राणोंमें दिखलाता ।

दोनों कूल डूब जाते हैं, कुछ भी नजर नहीं आता ।।

माता-पिता बही इम सबका, भाई-बंधु, पुत्र-दारा ।

है सर्वस्व वही सबका बस, उससे मरा विश्व सारा ।।

है वह जीवनसखा हमारा, है वह परम हमारा धन ।

अन्तस्तलमें बैठे हैं टुक करनेको उसके दर्शन ॥

जब वह दोनों भुजा उठाकर, अपनी ओर बुलाता है।

सब सुख तजकर मन उसके ही पीछे दौड़ा जाता है ॥

सब कुछ भूल नाच उठते हैं, हँसना औ रोना तजकर ।

चरण-कूलकी तरफ दौड़ते, भन्न जीर्ण नौका लेकर ।।

आशा सकल चहाकर उस प्यारेके अरुण चरणतलमें।

कूद पड़ेंगे, डूबे चाहे तर निकलें चाहे कूलस्य लमें ||

इस जबके जो कुछ भी सुख हैं, सो सब रहें उसीके पास ।

अरुण चरण के स्पर्शमात्रसे, मिटी हमारी सारी आस ।॥

किसी वस्तुकी चाइ नहीं है, मिटा चाइना, पाना, सब ।

बैठे हैं भव-तीर, भरोसा किये युगल-चरणोंका अब ॥

अब तो बंध-मोक्षको इच्छा व्याकुल कभी न करती है।

मुखड़ा ही नित-नव बंधन है, मुक्ति चरणसे झरती है ।।

चाहे अपने पास बिठा ले, चाहे दूर फेंक देवें ।

दूर रहें या पास रहें, हम संतत चरणमूल सेर्वे ॥

कर प्रणाम तेरे चरणोंमें लगता हूँ अब जगके काज
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो भजन लिरिक्स
श्री गिरिराज वास मैं पाऊं ब्रज तज बैकुंठ ना जाऊं
दीनबन्धो कृपासिन्धो कृपाबिन्दू दो प्रभो
हुआ अत्र मैं कृतार्थ महाराज
TAGGED:लावनी ( Laavanee )श्री विष्णु चरण वन्दन ( Shree Vishnu Charan Vandan )श्री विष्णु भजन ( Shree Vishnu Bhajan )
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