16.5 C
Gujarat
गुरूवार, जनवरी 22, 2026

ज्यों ज्यों मैं पीछे हटता हूँ त्यों त्यों तुम आगे आते

Post Date:

Jyon Jyon Main Peche Hatata Hoon Tyon Tyon Tum Aage Aate

ज्यों ज्यों मैं पीछे हटता हूँ त्यों त्यों तुम आगे आते ।

छिपे हुए परदोंमें अपना मोहन मुखड़ा दिखलाते ।।

पर मैं अंधा ! नहीं देखता परदोंके अंदरकी चीज़ ।

मोह-मुग्ध मैं देखा करता परदे बहुरंगे नाचीज़ ॥ १ ॥

परदोंके अंदरसे तुम हँसते प्यारी मधुरी हाँसी ।

चित्त खींचनेको तुम तुरत बजा देते मीठी बाँसी ॥

सुनता हूँ, मोहित होता, दर्शनकी भी इच्छा करता ।

पाता नहीं देख, पर, जडमति ! इधर-उधर मारा फिरता ।। २ ।।

तरह तरहसे ध्यान खींचते करते विविध भाँति संकेत ।

चौकन्ना-सा रह जाता हूँ, नहीं समझता मूर्ख अचेत ॥

तो भी नहीं ऊबते हो तुम, परदा जरा उठाते हो।

धीरेसे संबोधन करके अपने निकट बुलाते हो ॥ ३ ॥

इतने पर भी नहीं देखता, सिंह गर्जना तब करते ।

तन-मन-प्राण काँप उठते हैं, नहीं धीर कोई घरते ।।

डरता, भाग छूटता, तब आश्वासन देकर समझाते ।

ज्यों ज्यों मैं पीछे हटता हूँ त्यों त्यों तुम आगे आते || ४ ||

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...

विष्णु पादादि केशांत वर्णन स्तोत्रं

विष्णु पादादि केशांत वर्णन स्तोत्रंलक्ष्मीभर्तुर्भुजाग्रे कृतवसति सितं यस्य रूपं...
error: Content is protected !!