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राम स्तोत्रस्तोत्र

हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 27, 2026 5:02 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 27, 2026
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हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम्

हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम्(Hanumanta Krit Sitaram Stotram) भगवान हनुमान द्वारा रचित एक प्रसिद्ध स्तुति है, जिसमें प्रभु श्रीराम और माता सीता की स्तुति की गई है। यह स्तोत्र भगवान राम और माता सीता के प्रति श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा को प्रकट करता है। इसे पढ़ने से भक्तों को भगवान राम और सीता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से जीवन में शांति, सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। हनुमान जी ने अपनी महान भक्ति और समर्पण से इस स्तोत्र की रचना की थी।

Contents
  • हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम्
  • हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम् की विशेषताएँ
  • हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करें?
  • हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम्
  • हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम् का महत्व

हनुमान जी को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है। रामायण के विभिन्न प्रसंगों में हनुमान जी का प्रभु राम के प्रति अत्यंत समर्पण और सेवा भाव प्रकट होता है। हनुमान जी का यह स्तोत्र उनके उसी भाव को दर्शाता है, जहाँ वे भगवान राम और माता सीता की महिमा का गान करते हैं।

हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम् की विशेषताएँ

  1. भक्ति की अभिव्यक्ति: हनुमान जी द्वारा रचित इस स्तोत्र में प्रभु श्रीराम और माता सीता की महिमा का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र श्रीराम की स्तुति और सीता जी की करुणा और वात्सल्य का गुणगान करता है।
  2. शक्ति और समर्पण: यह स्तोत्र भक्तों को समर्पण, भक्ति और शक्ति प्रदान करता है। श्रीराम और सीता की कृपा से जीवन के कठिन संघर्षों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
  3. कल्याणकारी प्रभाव: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस स्तोत्र के नियमित पाठ से मनुष्य के सभी संकट दूर होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र मानसिक शांति, भौतिक सुख और आध्यात्मिक समृद्धि प्रदान करने वाला है।
  4. संरक्षण और आशीर्वाद: श्रीराम और सीता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है। विशेष रूप से संकट के समय, यह स्तोत्र भगवान राम और माता सीता के संरक्षण और मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है।

हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करें?

हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम् का पाठ विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को करना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये दिन भगवान हनुमान के प्रिय होते हैं। पाठ करने के समय पवित्र मन और शुद्ध वातावरण बनाए रखना चाहिए। निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं:

  1. सुबह-सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।
  2. श्रीराम और माता सीता की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
  3. भगवान हनुमान का ध्यान करते हुए स्तोत्र का पाठ करें।
  4. अंत में भगवान राम और हनुमान जी से आशीर्वाद प्राप्त करें।

हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम्

अयोध्यापुरनेतारं मिथिलापुरनायिकाम् ।
राघवाणामलंकारं वैदेहानामलंक्रियाम् ॥१॥

रघूणां कुलदीपं च निमीनां कुलदीपिकाम् ।
सूर्यवंशसमुद्भूतं सोमवंशसमुद्भवाम् ॥२॥

पुत्रं दशरथस्याद्यं पुत्रीं जनकभूपतेः ।
वशिष्ठानुमताचारं शतानन्दमतानुगाम् ॥३॥

कौसल्यागर्भसंभूतं वेदिगर्भोदितां स्वयम् ।
पुण्डरीकविशालाक्षं स्फुरदिन्दीवरेक्षणाम् ॥४॥

चन्द्रकान्ताननांभोजं चन्द्रबिंबोपमाननाम् ।
मत्तमातङ्गगमनम् मत्तहंसवधूगताम् ॥५॥

चन्दनार्द्रभुजामध्यं कुंकुमार्द्रकुचस्थलीम् ।
चापालंकृतहस्ताब्जं पद्मालंकृतपाणिकाम् ॥६॥

शरणागतगोप्तारं प्रणिपादप्रसादिकाम् ।
कालमेघनिभं रामं कार्तस्वरसमप्रभाम् ॥७॥

दिव्यसिंहासनासीनं दिव्यस्रग्वस्त्रभूषणाम् ।
अनुक्षणं कटाक्षाभ्यां अन्योन्येक्षणकांक्षिणौ ॥८॥

अन्योन्यसदृशाकारौ त्रैलोक्यगृहदंपती।
इमौ युवां प्रणम्याहं भजाम्यद्य कृतार्थताम् ॥९॥

अनेन स्तौति यः स्तुत्यं रामं सीतां च भक्तितः ।
तस्य तौ तनुतां पुण्यास्संपदः सकलार्थदाः ॥१०॥

एवं श्रीराचन्द्रस्य जानक्याश्च विशेषतः ।
कृतं हनूमता पुण्यं स्तोत्रं सद्यो विमुक्तिदम् ।
यः पठेत्प्रातरुत्थाय सर्वान् कामानवाप्नुयात् ॥११॥

॥ इति हनूमत्कृतसीताराम स्तोत्रं संपूर्णम॥

हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम् का महत्व

  • धार्मिक और आध्यात्मिक: हनुमन्तकृत सीताराम स्तोत्रम् धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यह भक्तों को उनके मन की शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।
  • संकटों से मुक्ति: इस स्तोत्र का पाठ करने से मनुष्य के सभी प्रकार के संकट, चाहे वे मानसिक हों, शारीरिक हों या सामाजिक, दूर हो जाते हैं। भगवान राम और माता सीता की कृपा से जीवन में समृद्धि आती है।
  • हनुमान जी की भक्ति का प्रतीक: हनुमान जी का यह स्तोत्र उनकी परम भक्ति और श्रीराम के प्रति असीम निष्ठा का प्रतीक है। इसे पढ़कर भक्त अपने भीतर भी वही भक्ति और समर्पण जागृत कर सकते हैं।
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