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लक्ष्मी स्तोत्रस्तोत्र

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र

Sanatani
Last updated: जनवरी 28, 2026 7:17 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 28, 2026
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अष्टलक्ष्मी स्तोत्र

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र देवी लक्ष्मी के आठ रूपों की स्तुति में लिखा गया एक पवित्र ग्रंथ है। इसे वैदिक संस्कृति और हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। देवी लक्ष्मी को धन, समृद्धि, ऐश्वर्य, ज्ञान, शक्ति और शांति की देवी माना जाता है। अष्टलक्ष्मी के माध्यम से जीवन के हर पहलू में समृद्धि और संतोष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

Contents
  • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र
  • अष्टलक्ष्मी के आठ रूप
  • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने का तरीका
  • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने का समय
  • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र
  • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का महत्व
  • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र के लाभ
  • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उत्तर
    • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र क्या है?
    • अष्टलक्ष्मी के कौन-कौन से रूप होते हैं?
    • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
    • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का क्या लाभ है?
    • अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ कैसे करना चाहिए?

अष्टलक्ष्मी के आठ रूप

अष्टलक्ष्मी का अर्थ है “लक्ष्मी के आठ स्वरूप।” ये आठ स्वरूप भौतिक, मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने वाली शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  1. आदि लक्ष्मी: ये भगवान विष्णु की शाश्वत संगिनी हैं। आदि लक्ष्मी को शांति, अनंत शक्ति और समृद्धि का स्रोत माना जाता है।
  2. धन लक्ष्मी: ये धन, ऐश्वर्य और संपत्ति की देवी हैं। इनकी कृपा से भौतिक समृद्धि प्राप्त होती है।
  3. धान्य लक्ष्मी: ये अन्न, भोजन और समृद्धि प्रदान करती हैं। इनकी पूजा करने से परिवार में भोजन और पोषण की कमी नहीं होती।
  4. गजा लक्ष्मी: ये शक्ति, सामर्थ्य और शौर्य का प्रतीक हैं। इनकी कृपा से विजय और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
  5. संतान लक्ष्मी: ये संतान सुख और संतानों के जीवन में शुभता का आशीर्वाद देती हैं।
  6. विद्या लक्ष्मी: ये ज्ञान, विद्या और समझ की देवी हैं। इनकी पूजा से ज्ञान और विवेक का विकास होता है।
  7. वीर लक्ष्मी: ये साहस, शक्ति और पराक्रम प्रदान करती हैं। ये जीवन में साहसी और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती हैं।
  8. विजय लक्ष्मी: ये जीत, उन्नति और सफलता की देवी हैं। इनके आशीर्वाद से हर कार्य में सफलता मिलती है।

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने का तरीका

  1. स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  2. लक्ष्मी माता की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक और धूप जलाएं।
  3. शांत मन और श्रद्धा से स्तोत्र का पाठ करें।
  4. पाठ के बाद देवी लक्ष्मी को प्रसाद अर्पित करें।
  5. नियमित रूप से शुक्रवार के दिन इसका पाठ करना विशेष लाभकारी माना जाता है।

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने का समय

  • यह स्तोत्र सूर्योदय के समय पढ़ा जाता है।
  • धन और समृद्धि प्राप्त करने के लिए इसे शुक्रवार को पढ़ना शुभ होता है।
  • दीपावली, अक्षय तृतीया और पूर्णिमा जैसे शुभ दिनों पर इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र

सुमनसवन्दितसुन्दरि माधवि चन्द्रसहोदरि हेममये
मुनिगणमण्डितमोक्षप्रदायिनि मञ्जुलभाषिणि वेदनुते।
पङ्कजवासिनि देवसुपूजितसद्गुणवर्षिणि शान्तियुते
जयजय हे मधुसूदनकामिनि आदिलक्ष्मि सदा पालय माम्।
अयि कलिकल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमये
क्षीरसमुद्भवमङ्गलरूपिणि मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि देवगणाश्रितपादयुते
जयजय हे मधुसूदनकामिनि धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम्।
जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये
सुरगणपूजितशीघ्रफल- प्रदज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते।
भवभयहारिणि पापविमोचनि साधुजनाश्रितपादयुते
जयजय हे मधुसूदनकामिनि धैर्यलक्ष्मि सदा पालय माम्।
जयजय दुर्गतिनाशिनि कामिनि सर्वफलप्रदशास्त्रमये
रथगजतुरगपदातिसमावृत- परिजनमण्डितलोकनुते।
हरिहरब्रह्मसुपूजित- सेविततापनिवारिणि पादयुते
जयजय हे मधुसूदनकामिनि गजलक्ष्मिरूपेण पालय माम्।
अहिखगवाहिनि मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि ज्ञानमये
गुणगणवारिधिलोकहितैषिणि स्वरसप्तभूषितगाननुते।
सकलसुरासुरदेव- मुनीश्वरमानववन्दितपादयुते
जयजय हे मधुसूदनकामिनि सन्तानलक्ष्मि त्वं पालय माम्।
जय कमलासनि सद्गतिदायिनि ज्ञानविकासिनि गानमये
अनुदिनमर्चितकुङ्कुमधूसर- भूषितवासितवाद्यनुते।
कनकधरास्तुतिवैभव- वन्दितशङ्करदेशिकमान्यपदे
जयजय हे मधुसूदनकामिनि विजयलक्ष्मि सदा पालय माम्।
प्रणतसुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये
मणिमयभूषितकर्णविभूषण- शान्तिसमावृतहास्यमुखे।
नवनिधिदायिनि कलिमलहारिणि कामितफलप्रदहस्तयुते
जयजय हे मधुसूदनकामिनि विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम्।
धिमिधिमिधिन्धिमिधिन्धिमि- धिन्धिमिदुन्दुभिनादसुपूर्णमये
घुमघुमघुङ्घुमघुङ्घुमघुङ्घुम- शङ्खनिनादसुवाद्यनुते।
वेदपुराणेतिहाससुपूजित- वैदिकमार्गप्रदर्शयुते
जयजय हे मधुसूदनकामिनि धनलक्ष्मिरूपेण पालय माम्।

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का महत्व

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का नियमित पाठ जीवन में समृद्धि, सफलता और शांति लाने में सहायक होता है। इसे ध्यानपूर्वक और श्रद्धा के साथ पढ़ने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। यह स्तोत्र न केवल भौतिक समृद्धि बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास में भी मदद करता है।

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र के लाभ

  1. धन और समृद्धि: स्तोत्र के पाठ से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और धन के स्रोत खुलते हैं।
  2. सुख और शांति: परिवार में सुख, शांति और संतुलन स्थापित होता है।
  3. संतान प्राप्ति: जो दंपति संतान सुख की कामना करते हैं, उन्हें इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
  4. आध्यात्मिक उन्नति: यह स्तोत्र मन को शुद्ध करता है और ध्यान में सहायता करता है।
  5. संकटों का निवारण: जीवन के हर क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उत्तर

  1. अष्टलक्ष्मी स्तोत्र क्या है?

    अष्टलक्ष्मी स्तोत्र एक पवित्र प्रार्थना है, जिसमें धन, समृद्धि, ज्ञान, साहस, और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी के आठ रूपों की स्तुति की जाती है।

  2. अष्टलक्ष्मी के कौन-कौन से रूप होते हैं?

    अष्टलक्ष्मी के आठ रूप हैं: आधि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी और धैर्य लक्ष्मी।

  3. अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

    अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ शुक्रवार को या धन और समृद्धि की प्राप्ति हेतु किसी शुभ मुहूर्त में करना सबसे उपयुक्त होता है।

  4. अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का क्या लाभ है?

    अष्टलक्ष्मी स्तोत्र के पाठ से धन, समृद्धि, सुख, शांति, और ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लाता है।

  5. अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ कैसे करना चाहिए?

    अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ स्वच्छ स्थान पर, शुद्ध मन और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। दीपक जलाकर देवी लक्ष्मी का ध्यान करें और मंत्रों का उच्चारण स्पष्ट रूप से करें।

ललिता त्रिशती – லலிதா திரிசதி
श्यामला दंडकम् – ஷ்யாமளா தண்டகம்
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नटराज स्तोत्रम्
नवनीता प्रिया कृष्ण अष्टकम
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