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Reading: नरसिंह शतकम्
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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > शतकम् > नरसिंह शतकम्
शतकम्

नरसिंह शतकम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 5:01 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
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नरसिंह शतकम्

नरसिंह शतकम्(Narasimha Satakam), भर्तृहरि द्वारा रचित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध काव्य रचना है। यह ग्रंथ न केवल सृजनात्मक साहित्य का एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है, बल्कि इसमें जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं का भी समावेश है। नरसिंह शतकम् विशेषकर भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की महिमा को समर्पित है, जिसमें उनके द्वारा दुष्टों का नाश करने की कथा और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का वर्णन किया गया है।

Contents
  • नरसिंह शतकम्
  • नरसिंह शतकम् का मुख्य उद्देश्य 
  • नरसिंह शतकम्
  • नरसिंह शतकम् से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
    • नरसिंह शतकम् किस देवता की स्तुति में रचा गया है?
    • नरसिंह शतकम् का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    • नरसिंह शतकम् का पाठ किस समय करना अधिक शुभ माना जाता है?
    • नरसिंह शतकम् में कितनी श्लोक या पद्य हैं?
    • नरसिंह शतकम् का पाठ करने से भक्तों को क्या लाभ होता है?

भर्तृहरि ने इस शतक में कुल एक सौ श्लोक रचें हैं, जिनमें भक्तिभाव, नैतिकता और आध्यात्मिकता का समुचित समन्वय देखने को मिलता है। प्रत्येक श्लोक में गहन अनुभव और मानवता को उजागर करने का प्रयास किया गया है। यह ग्रंथ भक्ति के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत का कार्य करता है।

नरसिंह शतकम् का मुख्य उद्देश्य 

नरसिंह शतकम् का मुख्य उद्देश्य भक्तों को भगवान नृसिंह की स्तुति के माध्यम से भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। इसमें भक्तों को यह सिखाया गया है कि कैसे वे भगवान की आराधना करें और अपने जीवन में भक्ति को स्थान दें। भर्तृहरि के श्लोकों में न केवल भगवान की महानता का गुणगान किया गया है, बल्कि मानवीय संघर्षों, दुखों और नैतिक बोध की भी चर्चा की गई है।

इस शतकम् का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भक्तों को निरंतर साधना और विश्वास की प्रेरणा देता है। जब भक्त सच्चे मन से नृसिंह का ध्यान करते हैं, तब उन्हें अद्भुत अनुभूतियाँ होती हैं। भगवान नृसिंह, जो आधे मानव और आधे सिंह के रूप में अवतरित हुए थे, ने भक्तों को यह सिखाया कि दुष्टों का नाश कर सत्य और धर्म की स्थापना करना ही सच्ची भक्ति है।

नरसिंह शतकम्

१
सी. श्रीमनोहर । सुरा – र्चित सिंधुगंभीर ।
भक्तवत्सल । कोटि – भानुतेज ।
कंजनेत्र । हिरण्य – कश्यपांतक । शूर ।
साधुरक्षण । शंख – चक्रहस्त ।
प्रह्लाद वरद । पा – पध्वंस । सर्वेश ।
क्षीरसागरशायि । – कृष्णवर्ण ।
पक्षिवाहन । नील – भ्रमरकुंतलजाल ।
पल्लवारुणपाद – पद्मयुगल ।

ते. चारुश्रीचंदनागरु – चर्चितांग ।
कुंदकुट्मलदंत । वै – कुंठधाम ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

२
सी. पद्मलोचन । सीस – पद्यमुल् नी मीद
जॆप्पबूनितिनय्य । – चित्तगिंपु
गण यति प्रास ल – क्षणमु जूडगलेदु
पंचकाव्य श्लोक – पठन लेदु
अमरकांडत्रयं – बरसि चूडगलेदु
शास्त्रीय ग्रंधमुल् – चदुवलेदु
नी कटाक्षंबुन – ने रचिंचॆद गानि
प्रज्ञ नायदि गादु – प्रस्तुतिंप

ते. दप्पुगलिगिन सद्भक्ति – तक्कुवौनॆ
चॆऱकुनकु वंकपोयिन – चॆडुनॆ तीपु?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

३
सी. नरसिंह । नी दिव्य – नाममंत्रमुचेत
दुरितजालमु लन्नि – दोलवच्चु
नरसिंह । नी दिव्य – नाममंत्रमुचेत
बलुवैन रोगमुल् – पापवच्चु
नरसिंह । नी दिव्य – नाममंत्रमुचेत
रिपुसंघमुल संह – रिंपवच्चु
नरसिंह । नी दिव्य – नाममंत्रमुचेत
दंडहस्तुनि बंट्ल – दरमवच्चु

ते. भलिर । ने नी महामंत्र – बलमुचेत
दिव्य वैकुंठ पदवि सा – धिंपवच्चु
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

४
सी. आदिनारायणा । – यनुचु नालुकतोड
बलुक नेर्चिनवारि – पादमुलकु
साष्टांगमुग नम – स्कार मर्पण जेसि
प्रस्तुतिंचॆदनय्य – बहुविधमुल
धरणिलो नरुलॆंत – दंडिवारैननु
निन्नु गाननिवारि – ने स्मरिंप
मेमु श्रेष्ठुल मंचु – मिदुकुचुंचॆडिवारि
चॆंत जेरगनोनु – शेषशयन

ते. परम सात्विकुलैन नी – भक्तवरुल
दासुलकु दासुडनु जुमी – धात्रिलोन
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

५
सी. ऐश्वर्यमुलकु नि – न्ननुसरिंपगलेदु
द्रव्य मिम्मनि वॆंट – दगुललेदु
कनक मिम्मनि चाल – गष्टपॆट्टगलेदु
पल्ल किम्मनि नोट – बलकलेदु
सॊम्मु लिम्मनि निन्नु – नम्मि कॊल्वगलेदु
भूमु लिम्मनि पेरु – पॊगडलेदु
बलमु लिम्मनि निन्नु – ब्रतिमालगालेदु
पसुल निम्मनि पट्टु – पट्टलेदु

ते. नेनु गोरिन दॊक्कटे – नीलवर्ण
चय्यननु मोक्षमिच्चिन – जालु नाकु
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

६
सी. मंदुंडननि नन्नु – निंद चेसिननेमि?
ना दीनतनु जूचि – नव्व नेमि?
दूरभावमुलेक – तूलनाडिन नेमि?
प्रीतिसेयक वंक – बॆट्ट नेमि?
कक्कसंबुलु पल्कि – वॆक्किरिंचिन नेमि?
तीव्रकोपमुचेत – दिट्ट नेमि?
हॆच्चुमाटलचेत – नॆम्मॆ लाडिन नेमि?
चेरि दापट गेलि – चेयनेमि?

ते. कल्पवृक्षंबुवलॆ नीवु – गल्ग निंक
ब्रजल लक्ष्यंबु नाकेल? – पद्मनाभ ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

७
सी. चित्तशुद्धिग नीकु – सेवजेसॆदगानि
पुडमिलो जनुल मॆ – प्पुलकु गादु
जन्मपावनतकै – स्मरणजेसॆद गानि
सरिवारिलो ब्रति – ष्थलकु गादु
मुक्तिकोसमु नेनु – म्रॊक्कि वेडॆदगानि
दंडिभाग्यमु निमि – त्तंबु गादु
निन्नु बॊगडग विद्य – नेर्चितिनेकानि
कुक्षिनिंडॆडु कूटि – कॊऱकु गादु

ते. पारमार्थिकमुनकु ने बाटुपडिति
गीर्तिकि नपेक्षपडलेदु – कृष्णवर्ण ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

८
सी. श्रवण रंध्रमुल नी – सत्कथल् पॊगडंग
लेश मानंदंबु – लेनिवाडु
पुण्यवंतुलु निन्नु – बूजसेयग जूचि
भावमंदुत्साह – पडनिवाडु
भक्तवर्युलु नी प्र – भावमुल् पॊगडंग
दत्परत्वमुलेक – तलगुवाडु
तनचित्तमंदु नी – ध्यान मॆन्नडु लेक
कालमंतयु वृधा – गडपुवाडु

ते. वसुधलोनॆल्ल व्यर्धुंडु – वाडॆ यगुनु
मऱियु जॆडुगाक यॆप्पुडु – ममतनॊंदि.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

९
सी. गौतमीस्नानान – गडतेऱुद मटन्न
मॊनसि चन्नील्ललो – मुनुगलेनु
तीर्थयात्रलचे गृ – तार्थु डौदमटन्न
बडलि नेमंबु ले – नडपलेनु
दानधर्ममुल स – द्गतिनि जॆंदुदमन्न
घनमुगा नायॊद्द – धनमुलेदु
तपमाचरिंचि सा – र्धकमु नॊंदुदमन्न
निमिषमैन मनस्सु – निलुपलेनु

ते. कष्टमुलकोर्व नाचेत – गादु निन्नु
स्मरणचेसॆद ना यधा – शक्ति कॊलदि.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

१०
सी. अर्थिवांड्रकु नीक – हानि जेयुट कंटॆ
दॆंपुतो वसनाभि – दिनुट मेलु
आडुबिड्डलसॊम्मु – लपहरिंचुट कंटॆ
बंड गट्टुक नूत – बडुट मेलु
परुलकांतल बट्टि – बल्मि गूडुट कंटॆ
बडबाग्नि कीलल – बडुट मेलु
ब्रतुकजालक दॊंग – पनुलु चेयुट कंटॆ
गॊंगुतो मुष्टॆत्तु – कॊनुट मेलु

ते. जलजदलनेत्र नी भक्त – जनुलतोडि
जगडमाडॆडु पनिकंटॆ – जावु मेलु
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0११
सी. गार्दभंबुन केल – कस्तूरि तिलकंबु?
मर्कटंबुन केल – मलयजंबु?
शार्धूलमुनक केल – शर्करापूपंबु?
सूकरंबुन केल – चूतफलमु?
मार्जालमुन केल – मल्लॆपुव्वुलबंति?
गुड्लगूबल केल – कुंडलमुलु?
महिषानि केल नि – र्मलमैन वस्त्रमुल्?
बकसंततिकि नेल – पंजरंबु?

ते. द्रोहचिंतन जेसॆडि – दुर्जनुलकु
मधुरमैनट्टि नीनाम – मंत्रमेल?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0१२
सी. पसरंबु वंजैन – बसुलकापरि तप्पु
प्रजलु दुर्जनुलैन – प्रभुनि तप्पु
भार्य गय्यालैन – ब्राणनाधुनि तप्पु
तनयुडु दुष्टयिन – तंड्रि तप्पु
सैन्यंबु चॆदिरिन – सैन्यनाधुनि तप्पु
कूतुरु चॆडुगैन – मात तप्पु
अश्वंबु चॆडुगैन – नारोहकुनि तप्पु
दंति दुष्टयिन मा – वंतु तप्पु

ते. इट्टि तप्पुलॆऱुंगक – यिच्चवच्चि
नटुल मॆलगुदु रिप्पु डी – यवनि जनुलु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0१३
सी. कोतिकि जलतारु – कुल्लायि येटिकि?
विरजाजि पूदंड – विधव केल?
मुक्किडितॊत्तुकु – मुत्तॆंपु नत्तेल?
नद्द मेमिटिकि जा – त्यंधुनकुनु?
माचकम्मकु नेल – मौक्तिकहारमुल्?
क्रूरचित्तुनकु स – द्गोष्ठु लेल?
ऱंकुबोतुकु नेल – बिंकंपु निष्ठलु?
वावि येटिकि दुष्ट – वर्तनुनकु?

ते. माट निलुकड कुंकरि – मोटु केल?
चॆविटिवानिकि सत्कथ – श्रवण मेल?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0१४
सी. मान्यंबुलीय स – मर्धुडॊक्कडु लेडु
मान्यमुल् चॆऱुप स – मर्धु लंत
यॆंडिन यूल्लगो – डॆऱिगिंप डॆव्वडु
बंडिन यूल्लमु – ब्रभुवु लंत
यितडु पेद यटंचु – नॆऱिगिंप डॆव्वंडु
कलवारि सिरु लॆन्न – गलरु चाल
दनयालि चेष्टल – तप्पॆन्न डॆव्वडु
बॆऱकांत ऱंकॆन्न – बॆद्द लंत

ते. यिट्टि दुष्टुल कधिकार – मिच्चिनट्टि
प्रभुवु तप्पु लटंचुनु – बलुकवलॆनु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0१५
सी. तल्लिगर्भमुनुंडि – धनमु ते डॆव्वडु
वॆल्लिपोयॆडिनाडु – वॆंटरादु
लक्षाधिकारैन – लवण मन्नमॆ कानि
मॆऱुगु बंगारंबु – म्रिंगबोडु
वित्त मार्जनजेसि – विर्रवीगुटॆ कानि
कूडबॆट्टिन सॊम्मु – तोडरादु
पॊंदुगा मऱुगैन – भूमिलोपल बॆट्टि
दानधर्ममु लेक – दाचि दाचि

ते. तुदकु दॊंगल कित्तुरो – दॊरल कवुनॊ
तेनॆ जुंटीग लिय्यवा – तॆरुवरुलकु?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0१६
सी. लोकमं दॆवडैन – लोभिमानवु डुन्न
भिक्ष मर्थिमि जेत – बॆट्टलेडु
तानु बॆट्टकयुन्न – तगवु पुट्टदुगानि
यॊरुलु पॆट्टग जूचि – योर्वलेडु
दातदग्गऱ जेरि – तन मुल्लॆ चॆडिनट्लु
जिह्वतो जाडीलु – चॆप्पुचुंडु
फलमु विघ्नंबैन – बलु संतसमुनंदु
मेलु कल्गिन जाल – मिणुकुचुंडु

ते. श्रीरमानाथ । यिटुवंटि – क्रूरुनकुनु
भिक्षुकुल शत्रुवनि – पेरु पॆट्टवच्चु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0१७
सी. तनुवुलो ब्राणमुल् = तरलिपॊय्यॆडिवेल
नी स्वरूपमुनु ध्या – निंचुनतडु
निमिषमात्रमुलोन – निन्नु जेरुनु गानि
यमुनि चेतिकि जिक्कि – श्रमलबडडु
परमसंतोषान – भजन जेसॆडिवारि
पुण्य मेमनवच्चु – भोगिशयन
मोक्षमु नी दास – मुख्युल कगु गानि
नरक मॆक्कडिदय्य – नलिननेत्र

ते. कमलनाभ नी महिमलु – गानलेनि
तुच्छुलकु मुक्तिदॊरकुट – दुर्लभंबु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0१८
सी. नीलमेघश्याम । – नीवॆ तंड्रिवि माकु
कमलवासिनि मम्मु – गन्नतल्लि
नी भक्तवरुलंत – निजमैन बांधवुल्
नी कटाक्षमु मा क – नेकधनमु
नी कीर्तनलु माकु – लोक प्रपंचंबु
नी सहायमु माकु – नित्यसुखमु
नी मंत्रमे माकु – निष्कलंकपु विद्य
नी पद ध्यानंबु – नित्यजपमु

ते. तोयजाताक्ष नी पाद – तुलसिदलमु
रोगमुल कौषधमु ब्रह्म – रुद्रविनुत.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0१९
सी. ब्रतिकिनन्नाल्लु नी – भजन तप्पनु गानि
मरणकालमुनंदु – मऱतुनेमॊ
यावेल यमदूत – लाग्रहंबुन वच्चि
प्राणमुल् पॆकलिंचि – पट्टुनपुडु
कफ वात पैत्यमुल् – गप्पगा भ्रमचेत
गंप मुद्भवमंदि – कष्टपडुचु
ना जिह्वतो निन्नु – नारायणा यंचु
बिलुतुनो श्रमचेत – बिलुवनॊ

ते. नाटि किप्पुडॆ चेतु नी – नामभजन
तलचॆदनु, जॆवि निडवय्य । – धैर्यमुगनु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२0
सी. पांचभौतिकमु दु – र्बलमैन कायं बि
दॆप्पुडो विडुचुट – यॆऱुकलेदु
शतवर्षमुलदाक – मितमु जॆप्पिरि गानि
नम्मरा दामाट – नॆम्मनमुन
बाल्यमंदो मंचि – प्रायमंदो लेक
मुदिमियंदो लेक – मुसलियंदॊ
यूरनो यडविनो – युदकमध्यमुननो
यॆप्पुडो विडुचुट – येक्षणंबॊ

ते. मरणमे निश्चयमु बुद्धि – मंतुडैन
देहमुन्नंतलो मिम्मु – दॆलियवलयु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२१
सी. तल्लिदंड्रुलु भार्य – तनयु लाप्तुलु बाव
मऱदु लन्नलु मेन – मामगारु
घनमुगा बंधुवुल् – गल्गिनप्पटिकैन
दानु दर्लग वॆंट – दगिलि रारु
यमुनि दूतलु प्राण – मपगरिंचुक पोग
ममततो बोराडि – मान्पलेरु
बलग मंदऱु दुःख – पडुट मात्रमॆ कानि
यिंचुक यायुष्य – मिय्यलेरु

ते. चुट्टमुलमीदि भ्रमदीसि – चूर जॆक्कि
संततमु मिम्मु नम्मुट – सार्थकंबु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२२
सी. इभराजवरद । नि – न्नॆंत बिल्चिनगानि
माऱु पल्क वदेमि – मौनितनमॊ?
मुनिजनार्चित । निन्नु – म्रॊक्कि वेडिनगानि
कनुल जूड वदेमि – गडुसुदनमॊ?
चाल दैन्यमुनॊंदि – चाटु चॊच्चिनगानि
भाग्य मिय्य वदेमि – प्रौढतनमॊ?
स्थिरमुगा नीपाद – सेव जेसॆद नन्न
दॊरकजाल वदेमि – धूर्ततनमॊ?

ते. मोक्षदायक । यिटुवंटि – मूर्खजनुनि
कष्टपॆट्टिन नीकेमि – कडुपुनिंडु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२३
सी. नीमीद कीर्तनल् – नित्यगानमु जेसि
रम्यमॊंदिंप ना – रदुडगानु
सावधानमुग नी – चरण पंकज सेव
सलिपि मॆप्पंपंग – शबरिगानु
बाल्यमप्पटिनुंडि – भक्ति नीयंदुन
गलुगनु ब्रह्लाद – घनुडगानु
घनमुगा नीमीदि – ग्रंथमुल् गल्पिंचि
विनुतिसेयनु व्यास – मुनिनिगानु

ते. साधुडनु मूर्खमति मनु – ष्याधमुडनु
हीनुडनु जुम्मि नीवु – न न्नेलुकॊनुमु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२४
सी. अतिशयंबुग गल्ल – लाडनेर्चितिगानि
पाटिगा सत्यमुल् – पलुकनेर
सत्कार्य विघ्नमुल् – सलुप नेर्चितिगानि
यिष्ट मॊंदग निर्व – हिंपनेर
नॊकरि सॊम्मुकु दोसि – लॊग्ग नेर्चितिगानि
चॆलुवुगा धर्मंबु – सेयनेर
धनमु लिय्यंग व – द्दनग नेर्चितिगानि
शीघ्र मिच्चॆडुनट्लु – चॆप्पनेर

ते. बंकजाताक्ष । ने नति – पातकुडनु
दप्पुलन्नियु क्षमियिंप – दंड्रि वीवॆ ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२५
सी. उर्विलो नायुष्य – मुन्न पर्यंतंबु
माय संसारंबु – मरगि नरुडु
सकल पापमुलैन – संग्रहिंचुनु गानि
निन्नु जेरॆडि युक्ति – नेर्वलेडु
तुदकु गालुनियॊद्दि – दूत लिद्दऱु वच्चि
गुंजुक चनि वारु – ग्रुद्दुचुंड
हिंस कोर्वग लेक – येड्चि गंतुलुवेसि
दिक्कु लेदनि नाल्गु – दिशलु चूड

ते. दन्नु विडिपिंप वच्चॆडि – धन्यु डेडि
मुंदु नीदासुडै युन्न – मुक्ति गलुगु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२६
सी. अधिक विद्यावंतु – लप्रयोजकुलैरि
पूर्णशुंठलु सभा – पूज्युलैरि
सत्यवंतुलमाट – जन विरोधंबायॆ
वदरुबोतुलमाट – वासिकॆक्कॆ
धर्मवादनपरुल् – दारिद्र्यमॊंदिरि
परमलोभुलु धन – प्राप्तुलैरि
पुण्यवंतुलु रोग – भूत पीडितुलैरि
दुष्टमानवुलु व – र्धिष्णुलैरि

ते. पक्षिवाहन । मावंटि – भिक्षुकुलकु
शक्तिलेदायॆ निक नीवॆ – चाटु माकु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२७
सी. भुजबलंबुन बॆद्द – पुलुल जंपगवच्चु
पामुकंठमु जेत – बट्टवच्चु
ब्रह्म राक्षसकोट्ल – बाऱद्रोलगवच्चु
मनुजुल रोगमुल् – मान्पवच्चु
जिह्व किष्टमुगानि – चेदु म्रिंगगवच्चु
बदनु खड्गमु चेत – नदमवच्चु
गष्टमॊंदुचु मुंड्ल – कंपलो जॊरवच्चु
दिट्टुबोतुल नोल्लु – कट्टवच्चु

ते. बुडमिलो दुष्टुलकु ज्ञान – बोध तॆलिपि
सज्जनुल जेयले डॆंत – चतुरुदैन.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२८
सी. अवनिलोगल यात्र – लन्नि चेयगवच्चु
मुख्युडै नदुलंदु – मुनुगवच्चु
मुक्कुपट्टुक संध्य – मॊनसि वार्वगवच्चु
दिन्नगा जपमाल – द्रिप्पवच्चु
वेदाल कर्थंबु – विऱिचि चॆप्पगवच्चु
श्रेष्ठ् क्रतुवु लॆल्ल – जेयवच्चु
धनमु लक्षलु कोट्लु – दानमिय्यगवच्चु
नैष्ठिकाचारमुल् – नडुपवच्चु

ते. जित्त मन्यस्थलंबुन – जेरकुंड
नी पदांभोजमुलयंदु – निलपरादु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0२९
सी. कर्णयुग्ममुन नी – कथलु सोकिनजालु
पॆद्द पोगुल जोल्लु – पॆट्टिनट्लु
चेतु लॆत्तुचु बूज – सेयगल्गिनजालु
तोरंपु कडियालु – दॊडिगिनट्लु
मॊनसि मस्तकमुतो – म्रॊक्क गल्गिनजालु
चॆलुवमैन तुरायि – चॆक्किनट्लु
गलमु नॊव्वग निन्नु – बलुक गल्गिनजालु
विंतगा गंठीलु – वेसिनट्लु

ते. पूनि निनु गॊल्चुटे सर्व – भूषणंबु
लितर भूषणमुल निच्च – गिंपनेल.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३0
सी. भुवनरक्षक । निन्नु – बॊगडनेरनि नोरु
व्रज कगोचरमैन – पाडुबॊंद
सुरवरार्चित । निन्नु – जूडगोरनि कनुल्
जलमुलोपल नॆल्लि – सरपुगुंड्लु
श्रीरमाधिम । नीकु – सेवजेयनि मेनु
कूलि कम्मुडुवोनि – कॊलिमितित्ति
वेड्कतो नीकथल् – विननि कर्णमुलैन
गठिनशिलादुल – गलुगु तॊललु

ते. पद्मलोचन नीमीद – भक्तिलेनि
मानवुडु रॆंडुपादाल – महिषमय्य.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३१
सी. अतिविद्यनेर्चुट – अन्नवस्त्रमुलके
पसुल नार्जिंचुट – पालकॊऱकॆ
सतिनि बॆंड्लाडुट – संसार सुखमुके
सुतुल बोषिंचुट – गतुलकॊऱकॆ
सैन्यमुल् गूर्चुट – शत्रुजयमुनके
सामु नेर्चुटलॆल्ल – चावुकॊऱकॆ
दानमिच्चुटयु मुं – दटि संचितमुनके
घनमुगा जदुवुट – कडुपु कॊऱकॆ

ते. यितर कामंबु गोरक – सततमुगनु
भक्ति नीयंदु निलुपुट – मुक्ति कॊऱकॆ
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३२
सी. धरणिलो वेयेंड्लु – तनुवु निल्वगबोदु
धन मॆप्पटिकि शाश्व – तंबु गादु
दारसुतादुलु – तनवॆंट रालेरु
भ्रुत्युलु मृतिनि द – प्पिंपलेरु
बंधुजालमु तन्नु – ब्रतिकिंचुकोलेरु
बलपराक्रम मेमि – पनिकि रादु
घनमैन सकल भा – ग्यं बॆंत गल्गिन
गोचिमात्रंबैन – गॊनुचुबोडु

ते. वॆर्रि कुक्कल भ्रमलन्नि – विडिचि निन्नु
भजन जेसॆडिवारिकि – बरमसुखमु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३३
सी. नरसिंह । नाकु दु – र्णयमुले मॆंडायॆ
सुगुण मॊक्कटिलेदु – चूड जनिन
नन्यकांतल मीद – नाश मानगलेनु
नॊरुल क्षेममु चूचि – योर्वलेनु
इटुवंटि दुर्बुद्धु – लिन्नि ना कुन्नवि
नेनु जेसॆडिवन्नि – नीचकृतुलु
नावंटि पापिष्ठि – नरुनि भूलोकान
बुट्टजेसिति वेल – भोगिशयन ।

ते. अब्जदलनेत्र । नातंड्रि – वैन फलमु
नेरमुलु गाचि रक्षिंपु – नीवॆ दिक्कु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३४
सी. धीरत बरुल निं – दिंप नेर्चिति गानि
तिन्नगा निनु ब्रस्तु – तिंपनैति
बॊरुगु कामिनुलंदु – बुद्धि निल्पिति गानि
निन्नु संततमु ध्या – निंपनैति
बॆरिकिमुच्चट लैन – मुरिसि विंटिनिगानि
यॆंचि नीकथ लाल – किंचनैति
गौतुकंबुन बात – कमु गडिंचितिगानि
हॆच्चु पुण्यमु संग्र – हिंपनैति

ते. नवनिलो नेनु जन्मिंचि – नंदु केमि
सार्थकमु गानरादायॆ – स्वल्पमैन.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३५
सी. अंत्यकालमुनंदु – नायासमुन निन्नु
दलतुनो तलपनो – तलतु निपुडॆ
नरसिंह । नरसिंह । – नरसिंह । लक्ष्मीश ।
दानवांतक । कोटि – भानुतेज ।
गोविंद । गोविंद । – गोविंद । सर्वेश ।
पन्नगाधिपशायि । – पद्मनाभ ।
मधुवैरि । मधुवैरि । – मधुवैरि । लोकेश ।
नीलमेघशरीर । निगमविनुत ।

ते. ई विधंबुन नीनाम – मिष्टमुगनु
भजनसेयुचु नुंदु ना – भावमंदु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३६
सी. आयुरारोग्य पु – त्रार्थ संपदलन्नि
कलुगजेसॆडि भार – कर्त वीवॆ
चदुवु लॆस्सग नेर्पि – सभलो गरिष्ठाधि
कार मॊंदिंचॆडि – घनुड वीवॆ
नडक मंचिदि पॆट्टि – नरुलु मॆच्चेडुनट्टि
पेरु रप्पिंचॆडि – पॆद्द वीवॆ
बलुवैन वैराग्य – भक्तिज्ञानमुलिच्चि
मुक्ति बॊंदिंचॆडु – मूर्ति वीवॆ

ते. अवनिलो मानवुल कन्नि – यासलिच्चि
व्यर्थुलनु जेसि तॆलिपॆडि – वाड वीवॆ.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३७
सी. काय मॆंत भयान – गापाडिननुगानि
धात्रिलो नदि चूड – दक्क बोदु
एवेल नेरोग – मेमरिंचुनॊ? सत्त्व
मॊंदंग जेयु ने – चंदमुननु
औषधंबुलु मंचि – वनुभविंचिन गानि
कर्म क्षीणंबैन गानि – विडदु;
कोटिवैद्युलु गुंपु – गूडिवच्चिन गानि
मरण मय्यॆडु व्याधि – मान्पलेरु

ते. जीवुनि प्रयाणकालंबु – सिद्धमैन
निलुचुना देह मिंदॊक्क – निमिषमैन?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३८
सी. जंदॆ मिंपुग वेसि – संध्य वार्चिन नेमि
ब्रह्म मंदक काडु – ब्राह्मणुंडु
तिरुमणि श्रीचूर्ण – गुरुरेख लिडिननु
विष्णु नॊंदक काडु – वैष्णवुंडु
बूदिनि नुदुटनु – बूसिकॊनिन नेमि
शंभु नॊंदक काडु – शैवजनुडु
काषाय वस्त्रालु – गट्टि कप्पिन नेमि
याश पोवक काडु – यतिवरुंडु

ते. ऎन्नि लौकिकवेषालु – गट्टुकॊनिन
गुरुनि जॆंदक सन्मुक्ति – दॊरकबोदु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0३९
सी. नरसिंह । ने निन्नु – नम्मिनंदुकु जाल
नॆनरु नायंदुंचु – नॆम्मनमुन
नन्नि वस्तुवुलु नि – न्नडिगि वेसटपुट्टॆ
निंकनैन गटाक्ष – मिय्यवय्य
संतसंबुन नन्नु – स्वर्गमंदे युंचु
भूमियंदे युंचु – भोगशयन ।
नयमुगा वैकुंठ – नगरमंदे युंचु
नरकमंदे युंचु – नलिननाभ ।

ते. ऎचट नन्नुंचिननुगानि – यॆपुडु निन्नु
मऱचि पोकुंड नीनाम – स्मरणनॊसगु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४0
सी. देह मुन्नवऱकु – मोहसागरमंदु
मुनुगुचुंदुरु शुद्ध – मूढजनुलु
सललितैश्वर्यमुल् – शाश्वतं बनुकॊनि
षड्भ्रमलनु मान – जाल रॆवरु
सर्वकालमु माय – संसार बद्धुलै
गुरुनि कारुण्यंबु गोरुकॊनरु
ज्ञान भक्ति विरक्तु – लैन पॆद्दल जूचि
निंद जेयक – तामु निलुवलेरु

ते. मत्तुलैनट्टि दुर्जाति – मनुजुलॆल्ल
निन्नु गनलेरु मॊदटिके – नीरजाक्ष.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४१
सी. इललोन ने जन्म – मॆत्तिनप्पटिनुंडि
बहु गडिंचितिनय्य – पातकमुलु
तॆलिसि चेसिति गॊन्नि – तॆलियजालक चेसि
बाध नॊंदिति नय्य – पद्मनाभ
अनुभविंचॆडु नप्पु – दति प्रयासंबंचु
ब्रजलु चॆप्पग जाल – भयमु गलिगॆ
नॆगिरि पोवुटकुनै – ये युपायंबैन
जेसि चूतमटन्न – जेतगादु

ते. सूर्यशशिनेत्र । नीचाटु – जॊच्चि नानु
कलुषमुलु द्रुंचि नन्नेलु – कष्टमनक.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४२
सी. तापसार्चित । नेनु – पापकर्मुडनंचु
नाकु वंकलबॆट्ट – बोकुचुम्मि
नाटिकि शिक्षलु – नन्नु चेयुटकंटॆ
नेडु सेयुमु नीवु – नेस्तमनक
अतिभयंकरुलैन – यमदूतलकु नन्नु
नॊप्पगिंपकु मय्य – युरगशयन ।
नी दासुलनु बट्टि – नीवु दंडिंपंग
वद्दु वद्दन रॆंत – पॆद्दलैन

ते. दंड्रिवै नीवु परपीड – दगुलजेय
वासिगल पेरु कपकीर्ति – वच्चुनय्य.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४३
सी. धरणिलोपल नेनु – तल्लिगर्भमुनंदु
बुट्टिनप्पटिनुंडि – पुण्यमॆऱुग
नेकादशीव्रतं – बॆन्न डुंडुग लेदु
तीर्थयात्रलकैन – दिरुगलेदु
पारमार्थिकमैन – पनुलु चेयगलेदु
भिक्ष मॊक्कनिकैन – बॆट्टलेदु
ज्ञानवंतुलकैन – बूनि म्रॊक्कगलेदु
इतर दानमुलैन – निय्यलेदु

ते. नलिनदलनेत्र । निन्नु ने – नम्मिनानु
जेरि रक्षिंपवे नन्नु – शीघ्रमुगनु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४४
सी. अडविपक्षुल कॆव्व – डाहार मिच्चॆनु
मृगजाति कॆव्वडु – मेतबॆट्टॆ
वनचरादुलकु भो – जन मॆव्व डिप्पिंचॆ
जॆट्ल कॆव्वडु नील्लु – चेदिपोसॆ
स्त्रीलगर्भंबुन – शिशुवु नॆव्वडु पॆंचॆ
फणुल कॆव्वडु पोसॆ – बरग बालु
मधुपालि कॆव्वडु – मकरंद मॊनरिंचॆ
बसुल मॆव्व डॊसंगॆ – बच्चिपूरि

ते. जीवकोट्लनु बोषिंप – नीवॆकानि
वेऱॆ यॊक दात लेडय्य – वॆदकिचूड.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४५
सी. दनुजारि । नावंटि – दासजालमु नीकु
कोटि संख्य गलारु – कॊदुव लेदु
बंट्लसंदडिवल्ल – बहुपराकै नन्नु
मऱचि पोकुमु भाग्य – महिमचेत
दंडिगा भ्रुत्युलु – दगिलि नीकुंडंग
बक्कबं टेपाटि – पनिकि नगुनु?
नीवु मॆच्चॆडि पनुल् – नेनु जेयगलेक
यिंत वृथाजन्म – मॆत्तिनानु

ते. भूजनुललोन ने नप्र – योजकुडनु
गनुक नी सत्कटाक्षंबु – गलुगजेयु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४६
सी. कमललोचन । नन्नु – गन्नतंड्रिविगान
निन्नु नेमऱकुंटि – नेनु विडक
युदरपोषणकुनै – यॊकरि ने नाशिंप
नेर ना कन्नंबु – नीवु नडपु
पॆट्टले नंटिवा – पिन्न पॆद्दललोन
दगवु किप्पुडु दीय – दलचिनानु
धनमु भारंबैन – दलकिरीटमु नम्मु
कुंडलंबुलु पैडि – गॊलुसु लम्मु

ते. कॊसकु नी शंख चक्रमुल् – कुदुवबॆट्टि
ग्रासमु नॊसंगि पोषिंचु – कपटमुडिगि.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४७
सी. कुवलयश्याम । नी – कॊलुवु चेसिन नाकु
जीत मॆंदुकु मुट्ट – जॆप्पवैति
मंचिमाटलचेत – गॊंचॆमिय्यगलेवु
कलहमौ निक जुम्मि – खंडितमुग
नीवु साधुवु गान – निंत पर्यंतंबु
चनवुचे निन्नाल्लु – जरुपवलसॆ
निक ने सहिंप नी – विपुडु नन्नेमैन
शिक्ष चेसिन जेयु – सिद्धमयिति

ते. नेडु करुणिंपकुंटिवा – निश्चयमुग
दॆगबडिति चूडु नीतोड – जगडमुनकु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४८
सी. हरि । नीकु बर्यंक – मैन शेषुडु चाल
बवनमु भक्षिंचि – ब्रतुकुचुंडु
ननुवुगा नीकु वा – हनमैन खगराजु
गॊप्पपामुनु नोट – गॊऱुकुचुंडु
अदिगाक नी भार्य – यैन लक्ष्मीदेवि
दिनमु पेरंटंबु – दिरुगुचुंडु
निन्नु भक्तुलु पिल्चि – नित्यपूजलु चेसि
प्रेम बक्वान्नमुल् – पॆट्टुचुंड्रु

ते. स्वस्थमुग नीकु ग्रासमु – जरुगुचुंडु
गासु नी चेति दॊकटैन – गादु व्ययमु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0४९
सी. पुंडरीकाक्ष । ना – रॆंडु कन्नुल निंड
निन्नु जूचॆडि भाग्य – मॆन्नडय्य
वासिगा ना मनो – वांछ दीरॆडुनट्लु
सॊगसुगा नीरूपु – चूपवय्य
पापकर्मुनि कंट – बडकपोवुदमंचु
बरुषमैन प्रतिज्ञ – बट्टिनावॆ?
वसुधलो बतित पा – वनुड वी वंचु ने
बुण्यवंतुलनोट – बॊगड विंटि

ते. नेमिटिकि विस्तरिंचॆ नी – किंत कीर्ति
द्रोहिनैननु ना कीवु – दॊरकरादॆ?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५0
सी. पच्चि चर्मपु दित्ति – पसलेदु देहंबु
लोपल नंतट – रोय रोत
नरमुलु शल्यमुल् – नवरंध्रमुलु रक्त
मांसंबु कंडलु – मैल तित्ति
बलुवैन यॆंड वा – नल कोर्व दिंतैन
दालले दाकलि – दाहमुलकु
सकल रोगमुलकु – संस्थानमॆ युंडु
निलुव दस्थिरमैन – नीटिबुग्ग

ते. बॊंदिलो नुंडु प्राणमुल् – पोयिनंत
गाटिके गानि कॊऱगादु – गव्वकैन.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५१
सी. पलुरोगमुलकु नी – पादतीरमॆ कानि
वलपु मंदुलु नाकु – वलदु वलदु
चॆलिमि सेयुचु नीकु – सेव जेसॆद गान
नी दासकोटिलो – निलुपवय्य
ग्रहभयंबुनकु ज – क्रमु दलचॆदगानि
घोररक्षलु गट्ट – गोरनय्य
पामुकाटुकु निन्नु – भजन जेसॆदगानि
दानि मंत्रमु नेनु – तलपनय्य

ते. दॊरिकितिवि नाकु दंडि वै – द्युडवु नीवु
वेयिकष्टालु वच्चिनन् – वॆऱवनय्य.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५२
सी. कूटिकोसरमु ने – गॊऱगानि जनुलचे
बलुगद्दरिंपुलु – पडगवलसॆ?
दार सुत भ्रम – दगिलियुंडगगदा
देशदेशमुलॆल्ल – दिरुगवलसॆ?
बॆनु दरिद्रत पैनि – बॆनगियुंडगगदा
चेरि नीचुलसेव – चेयवलसॆ?
नभिमानमुलु मदि – नंटियुंडगगदा
परुल जूचिन भीति – पडगवलसॆ?

ते. निटुल संसारवारिधि – नीदलेक
वेयिविधमुल निन्नु ने – वेडुकॊंटि.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५३
सी. साधु सज्जनुलतो – जगडमाडिन गीडु
कवुलतो वैरंबु – गांच गीडु
परम दीनुल जिक्क – बट्टि कॊट्टिन गीडु
भिक्षगांड्रनु दुःख – पॆट्ट गीडु
निरुपेदलनु जूचि – निंदजेसिन गीडु
पुण्यवंतुल दिट्ट – बॊसगु गीडु
सद्भक्तुलनु दिर – स्कारमाडिन गीडु
गुरुनि द्रव्यमु दोचु – कॊनिन गीडु

ते. दुष्टकार्यमु लॊनरिंचु – दुर्जनुलकु
घनतरंबैन नरकंबु – गट्टिमुल्लॆ.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५४
सी. परुलद्रव्यमुमीद – भ्रांति नॊंदिनवाडु
परकांतल नपेक्ष – पडॆडुवाडु
अर्थुल वित्तंबु – लपहरिंचॆडुवाडु
दानमिय्यंग व – द्दनॆडिवाडु
सभललोपल निल्चि – चाडिचॆप्पॆडिवाडु
पक्षपु साक्ष्यंबु – पलुकुवाडु
विष्णुदासुल जूचि – वॆक्किरिंचॆडिवाडु
धर्मसाधुल दिट्ट – दलचुवाडु

ते. प्रजल जंतुल हिंसिंचु – पातकुंडु
कालकिंकर गदलचे – गष्टमॊंदु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५५
सी. नरसिंह । ना तंड्रि – नन्नेलु नन्नेलु
कामितार्थमु लिच्चि – कावु कावु
दैत्यसंहार । चाल – दययुंचु दययुंचु
दीनपोषक । नीवॆ – दिक्कु दिक्कु
रत्नभूषितवक्ष । – रक्षिंचु रक्षिंचु
भुवनरक्षक । नन्नु – ब्रोवु ब्रोवु
मारकोटिसुरूप । – मन्निंचु मन्निंचु
पद्मलोचन । चेयि – पट्टु पट्टु

ते. सुरविनुत । नेनु नीचाटु – जॊच्चिनानु
ना मॊऱालिंचि कडतेर्चु – नागशयन ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५६
सी. नी भक्तुलनु गनुल् – निंड जूचियु रॆंडु
चेतुल जोहारु – सेयुवाडु
नेर्पुतो नॆवरैन – नी कथल् चॆप्पंग
विनयमंदुचु जाल – विनॆडुवाडु
तन गृहंबुनकु नी – दासुलु रा जूचि
पीटपै गूर्चुंड – बॆट्टुवाडु
नीसेवकुल जाति – नीतु लॆन्नक चाल
दासोह मनि चेर – दलचुवाडु

ते. परमभक्तुंडु धन्युंडु – भानुतेज ।
वानि गनुगॊन्न बुण्यंबु – वसुधलोन.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५७
सी. पक्षिवाहन । नेनु – ब्रतिकिनन्निदिनालु
कॊंडॆगांड्रनु गूडि – कुमतिनैति
नन्नवस्त्रमु लिच्चि – यादरिंपुमु नन्नु
गन्नतंड्रिवि नीवॆ – कमलनाभ ।
मरण मय्यॆडिनाडु – ममततो नीयॊद्दि
बंट्ल दोलुमु मुंदु – ब्रह्मजनक ।
इनजभटावलि – यीडिचिकॊनिपोक
करुणतो नायॊद्द – गाव लुंचु

ते. कॊसकु नी सन्निधिकि बिल्चु – कॊनियु नीकु
सेवकुनि जेसिकॊनवय्य – शेषशयन ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५८
सी. निगमादिशास्त्रमुल् – नेर्चिन द्विजुडैन
यज्ञकर्तगु सोम – याजियैन
धरणिलोपल ब्रभा – त स्नानपरुडैन
नित्यसत्कर्मादि – निरतुडैन
नुपवास नियमंबु – लॊंदु सज्जनुडैन
गाविवस्त्रमुगट्टु – घनुडुनैन
दंडिषोडशमहा – दानपरुंडैन
सकल यात्रलु सल्पु – सरसुडैन

ते. गर्वमुन गष्टपडि निन्नु – गानकुन्न
मोक्षसाम्राज्य मॊंदडु – मोहनांग ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0५९
सी. पंजरंबुन गाकि – बट्टि युंचिन लॆस्स
पलुकुने विंतैन – चिलुकवलॆनु?
गार्दभंबुनु दॆच्चि – कल्लॆमिंपुगवेय
दिरुगुने गुर्रंबु – तीरुगानु?
ऎनुपपोतुनु माव – टी डु शिक्षिंचिन
नडचुने मदवार – णंबुवलॆनु?
पॆद्दपिट्टनु मेत – बॆट्टि पॆंचिन ग्रॊव्वि
सागुने वेटाडु – डेगवलॆनु?

ते. कुजनुलनु दॆच्चि नी सेव – कॊऱकु बॆट्ट
वांछतो जेतुरे भक्त – वरुलवलॆनु?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६0
सी. नीकु दासुड नंटि – निन्नु नम्मुकयुंटि
गान नापै नेडु – करुणजूडु
दोसिलॊग्गिति नीकु – द्रोह मॆन्नगबोकु
पद्मलोचन । नेनु – परुडगानु
भक्ति नीपै नुंचि – भजन जेसॆद गानि
परुल वेडनु जुम्मि – वरमु लिम्मु
दंडिदातवु नीवु – तडवुसेयक कावु
घोरपातकराशि – गॊट्टिवैचि

ते. शीघ्रमुग गोर्कु लीडेर्चु – चिंत दीर्चु
निरतमुग नन्नु बोषिंचु – नॆनरु नुंचु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६१
सी. विद्य नेर्चिति नंचु – विर्रवीगगलेदु
भाग्यवंतुड नंचु – बलुकलेदु
द्रव्यवंतुड नंचु – दऱचु निक्कगलेदु
निरतदानमुलैन – नॆऱपलेदु
पुत्रवंतुड नंचु – बॊगडुचुंडगलेदु
भ्रुत्यवंतुड नंचु – बॊगडलेदु
शौर्यवंतुड नंचु – संतसिंपगलेदु
कार्यवंतुड नंचु – गडपलेदु

ते. नलुगुरिकि मॆप्पुगानैन – नडुवलेदु
नलिनदलनेत्र । निन्नु ने – नम्मिनानु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६२
सी. अतिलोभुलनु भिक्ष – मडुगबोवुट रोत
तनद्रव्य मॊकरिंट – दाच रोत
गुणहीनु डगुवानि – कॊलुवु गॊल्चुट रोत
यॊरुल पंचलक्रिंद – नुंड रोत
भाग्यवंतुनितोड – बंतमाडुट रोत
गुऱिलेनि बंधुल – गूड रोत
आदायमुलु लेक – यप्पुदीयुट रोत
जार चोरुल गूडि – चनुट रोत

ते. यादिलक्ष्मीश । नीबंट – नैतिनय्य ।
यिंक नॆडबासि जन्मंबु – लॆत्त रोत.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६३
सी. वॆर्रिवानिकि नेल – वेदाक्षरंबुलु?
मोटुवानिकि मंचि – पाट लेल?
पसुलकापरि केल – परतत्त्वबोधलु?
विटकानि केटिको – विष्णुकथलु?
वदरु शुंठल केल – व्रात पुस्तकमुलु?
तिरुगु द्रिम्मरि केल – देवपूज?
द्रव्यलोभिकि नेल – धातृत्व गुणमुलु?
दॊंगबंटुकु मंचि – संग तेल?

ते. क्रूरजनुलकु नीमीद – गोरि केल?
द्रोहि पापात्मुनकु दया – दुःख मेल?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६४
सी. ना तंड्रि नादात – नायिष्टदैवमा
नन्नु मन्ननसेयु – नारसिंह ।
दययुंचु नामीद – दप्पुलन्नि क्षमिंचु
निगमगोचर । नाकु – नीवॆ दिक्कु
ने दुरात्मुड नंचु – नीमनंबुन गोप
गिंपबोकुमु स्वामि । – केवलमुग
मुक्तिदायक नीकु – म्रॊक्किनंदुकु नन्नु
गरुणिंचि रक्षिंचु – कमलनाभ ।

ते. दंडिदॊर वंचु नीवॆंट – दगिलिनानु
नेडु प्रत्यक्षमै नन्नु – निर्वहिंपु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६५
सी. वेमाऱु नीकथल् – विनुचु नुंडॆडिवाडु
परुल मुच्चटमीद – भ्रांति पडडु
अगणितंबुग निन्नु – बॊगड नेर्चिनवाडु
चॆड्डमाटलु नोट – जॆप्पबोडु
आसक्तिचेत नि – न्ननुसरिंचॆडिवाडु
धनमदांधुलवॆंट – दगुल बोडु
संतसंबुन निन्नु – स्मरणजेसॆडिवाडु
चॆलगि नीचुलपेरु – दलपबोडु

ते. निन्नु नम्मिन भक्तुंडु – निश्चयमुग
गोरि चिल्लर वेल्पुल – गॊल्वबोडु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६६
सी. ने नॆंत वेडिन – नी केल दयरादु?
पलुमाऱु पिलिचिन – बलुक वेमि?
पलिकिन नी कुन्न – पद वेमिबोवु? नी
मोमैन बॊडचूप – वेमि नाकु?
शरणु जॊच्चिनवानि – सवरिंपवलॆ गाक
परिहरिंचुट नीकु – बिरुदु गादु
नीदासुलनु नीवु – निर्वहिंपक युन्न
बरु लॆव्व रगुदुरु – पंकजाक्ष ।

ते. दात दैवंबु तल्लियु – दंड्रि वीवॆ
नम्मियुन्नानु नीपाद – नलिनमुलनु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६७
सी. वेदमुल् चदिवॆडु – विप्रवर्युंडैन
रणमु साधिंचॆडु – राजॆयैन
वर्तककृषिकुडौ – वैश्यमुख्युंडैन
बरिचगिंचॆडु शूद्र – वर्युडयिन
मॆच्चुखड्गमु बट्टि – मॆऱयु म्लेच्छुंडैन
ब्रजल कक्कऱपडु – रजकुडैन
चर्म मम्मॆडि हीन – चंडालनरुडैन
नी महीतलमंदु – नॆव्वडैन

ते. निन्नु गॊनियाडुचुंडॆना – निश्चयमुग
वाडु मोक्षाधिकारि यी – वसुधलोन.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६८
सी. सकलविद्यलु नेर्चि – सभ जयिंपगवच्चु
शूरुडै रणमंदु – बोरवच्चु
राजराजै पुट्टि – राज्य मेलगवच्चु
हेम गोदानंबु – लिय्यवच्चु
गगनमं दुन्न चु – क्कल नॆंचगावच्चु
जीवरासुल पेल्लु – चॆप्पवच्चु
नष्टांगयोगमु – लभ्यसिंपगवच्चु
मेक रीतिग नाकु – मॆसववच्चु

ते. तामरसगर्भ हर पुरं – दरुलकैन
निन्नु वर्णिंप दरमौनॆ – नीरजाक्ष ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0६९
सी. नरसिंह । नीवंटि – दॊरनु संपादिंचि
कुमति मानवुल ने – गॊल्वजाल
नॆक्कु वैश्वर्यंबु – लिय्यलेकुन्ननु
बॊट्टकुमात्रमु – पोयरादॆ?
घनमुगा दिदि नीकु – करवुन बोषिंप
गष्ट मॆंतटि स्वल्प – कार्यमय्य?
पॆट्टजालक येल – भिक्षमॆत्तिंचॆदु
नन्नु बीदनु जेसि – ना वदेमि?

ते. अमल । कमलाक्ष । ने निट्लु – श्रमपडंग
गन्नुलकु बंडुवै नीकु – गानबडुनॆ?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७0
सी. वनरुहनाभ । नी – वंक जेरिति नेनु
गट्टिगा ननु गावु – कावु मनुचु
वच्चिनंदुकु वेग – वरमु लिय्यककानि
लेवबोयिन निन्नु – लेवनिय्य
गूर्चुंडबॆट्टि नी – कॊंगु गट्टिग बट्टि
पुच्चुकॊंदुनु जूडु – भोगिशयन ।
यीवेल नी कड्ड – मॆवरु वच्चिनगानि
वारिकैननु लॊंगि – वडकबोनु

ते. गोपगाडनु नीवु ना – गुणमु तॆलिसि
यिप्पुडे नन्नु रक्षिंचि – येलुकॊम्मु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७१
सी. प्रह्लादु डेपाटि – पैडि कानुक लिच्चॆ?
मदगजं बॆन्निच्चॆ – मौक्तिकमुलु?
नारदुं डॆन्निच्चॆ – नगलु रत्नंबु? ल
हल्य नी के यग्र – हार मिच्चॆ?
उडुत नी केपाटि – यूडिगंबुलु चेसॆ?
घनविभीषणु डेमि – कट्न मिच्चॆ?
पंचपांडवु लेमि – लंच मिच्चिरि नीकु?
द्रौपदि नी कॆंत – द्रव्य मिच्चॆ?

ते. नीकु वीरंद ऱयिनट्लु – नेनु गान?
यॆंदु कनि नन्नु रक्षिंप – विंदुवदन ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७२
सी. वांछतो बलिचक्र – वर्तिदग्गर जेरि
भिक्षमॆत्तिति वेल – बिडियपडक?
यडविलो शबरि दि – य्यनि फला लंदिय्य
जेतुलॊग्गिति वेल – सिग्गुपडक?
वेड्कतो वेवेग – विदुरुनिंटिकि नेगि
विंदुगॊंटि वदेमि – वॆलितिपडक?
अडुकु लल्पमु कुचे – लुडु गडिंचुक तेर
बॊक्कसागिति वेल – लॆक्कगॊनक?

ते. भक्तुलकु नीवु पॆट्टुट – भाग्यमौनु
वारि काशिंचितिवि तिंडि – वाड वगुचु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७३
सी. स्तंभमं दुदयिंचि – दानवेंद्रुनि द्रुंचि
करुणतो ब्रह्लादु – गाचिनावु
मकरिचे जिक्कि सा – मजमु दुःखिंचंग
गृपयुंचि वेग र – क्षिंचिनावु
शरणंचु ना विभी – षणुडु नी चाटुन
वच्चिनप्पुडॆ लंक – निच्चिनावु
आ कुचेलुडु चेरॆ – डटुकु लर्पिंचिन
बहुसंपदल निच्चि – पंपिनावु

ते. वारिवलॆ नन्नु बोषिंप – वशमुगादॆ?
यंत वलपक्ष मेल श्री – कांत । नीकु?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७४
सी. व्यासु डे कुलमंदु – वासिगा जन्मिंचॆ?
विदुरु डे कुलमंदु – वृद्धि बॊंदॆ?
गर्णु डेकुलमंदु – घनमुगा वर्धिल्लॆ?
ना वसिष्ठुं डॆंदु – नवतरिंचॆ?
निंपुगा वाल्मीकि – ये कुलंबुन बुट्टॆ?
गुहु डनु पुण्यु डे – कुलमुवाडु?
श्रीशुकु डॆक्कट – जॆलगि जन्मिंचॆनु?
शबरि येकुलमंदु – जन्ममॊंदॆ?

ते. ने कुलंबुन वी रिंद – ऱॆच्चिनारु?
नीकृपापात्रुलकु जाति – नीतु लेल?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७५
सी. वसुधास्थलंबुन – वर्णहीनुडु गानि
बहुल दुराचार – परुडु गानि
तडसि कासिय्यनि – धर्मशून्युडु गानि
चदुवनेरनि मूढ – जनुडु गानि
सकलमानवुलु मॆ – च्चनि कृतघ्नुडु गानि
चूड सॊंपुनु लेनि – शुंठ गानि
अप्रतिष्ठलकु लो – नैन दीनुडु गानि
मॊदटि के मॆऱुगनि – मोटु गानि

ते. प्रतिदिनमु नीदु भजनचे – बरगुनट्टि
वानि के वंक लेदय्य – वच्चु मुक्ति.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७६
सी. इभकुंभमुलमीदि – कॆगिरॆडि सिंगंबु
मुट्टुने कुऱुचैन – मूषकमुनु?
नवचूतपत्रमुल् – नमलुचुन्न पिकंबु
गॊऱुकुने जिल्लेडु – कॊनलु नोट?
अरविंदमकरंद – मनुभविंचॆडि तेटि
पोवुने पल्लेरु – पूलकडकु?
ललित मैन रसाल – फलमु गोरॆडि चिल्क
मॆसवुने भमत नु – म्मॆत्तकाय?

ते. निलनु नीकीर्तनलु पाड – नेर्चिनतडु
परुलकीर्तन बाडुने – यरसि चूड?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७७
सी. सर्वेश । नीपाद – सरसिजद्वयमंदु
जित्त मुंपगलेनु – जॆदरकुंड
नीवैन दययुंचि – निलिचि युंडॆडुनट्लु
चेरि नन्निपु डेलु – सेवकुडनु
वनजलोचन । नेनु – वट्टि मूर्खुड जुम्मि
नीस्वरूपमु जूड – नेर्पु वेग
तन कुमारुन कुग्गु – तल्लि वोसिनयट्लु
भक्तिमार्गं बनु – पालु पोसि

ते. प्रेमतो नन्नु बोषिंचि – पॆंचुकॊनुमु
घनत कॆक्किंचु नीदास – गणमुलोन.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७८
सी. जीमूतवर्ण । नी – मोमुतो सरिराक
कमलारि यतिकलं – कमुनु बडसॆ
सॊगसैन नी नेत्र – युगमुतो सरिराक
नलिनबृंदमु नील्ल – नडुम जेरॆ
गरिराजवरद । नी – गलमुतो सरिराक
पॆद्दशंखमु बॊब्ब – पॆट्ट बॊडगॆ
श्रीपति । नीदिव्य – रूपुतो सरि राक
पुष्पबाणुडु नीकु – बुत्रु डय्यॆ

ते. निंदिरादेवि निन्नु मो – हिंचि विडक
नीकु बट्टमहिषि यय्यॆ – निश्चयमुग.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0७९
सी. हरिदासुलनु निंद – लाडकुंडिन जालु
सकल ग्रंथम्मुलु – चदिविनट्लु
भिक्ष मिय्यंग द – प्पिंपकुंडिन जालु
जेमुट्टि दानंबु – चेसिनट्लु
मिंचि सज्जनुल वं – चिंचकुंडिन जालु
निंपुगा बहुमान – मिच्चिनट्लु
देवाग्रहारमुल् – दीयकुंडिन जालु
गनककंबपु गुल्लु – गट्टिनट्लु

ते. ऒकरि वर्शाशनमु मुंच – कुन्न जालु
बेरुकीर्तिग सत्रमुल् – पॆट्टिनट्लु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८0
सी. इहलोकसौख्यमु – लिच्चगिंचॆद मन्न
देह मॆप्पटिकि दा – स्थिरत नॊंद
दायुष्य मुन्न प – र्यंतंबु पटुतयु
नॊक्कतीरुन नुंड – दुर्विलोन
बाल्ययुवत्वदु – र्बलवार्धकमु लनु
मूटिलो मुनिगॆडि – मुऱिकिकॊंप
भ्रांतितो दीनि गा – पाडुद मनुमॊन्न
गालमृत्युवुचेत – गोलुपोवु

ते. नम्मरा दय्य । यिदि माय – नाटकंबु
जन्म मिक नॊल्ल न न्नेलु – जलजनाभ ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८१
सी. वदनंबु नीनाम – भजन गोरुचुनुंडु
जिह्व नीकीर्तनल् – सेय गोरु
हस्तयुग्मंबु नि – न्नर्चिंप गोरुनु
गर्णमुल् नी मीदि – कथलु गोरु
तनुवु नीसेवये – घनमुगा गोरुनु
नयनमुल् नीदर्श – नंबु गोरु
मूर्धम्मु नीपद – म्मुल म्रॊक्कगा गोरु
नात्म नीदै युंडु – नरसि चूड

ते. स्वप्नमुन नैन नेवेल – संततमुनु
बुद्धि नी पादमुलयंदु – बूनियुंडु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८२
सी. पद्माक्ष । ममतचे – बरमु नंदॆद मंचु
विर्रवीगुदुमय्य – वॆर्रिपट्टि
मास्वतंत्रंबैन – मदमु गंड्लकु गप्पि
मॊगमु पट्टदु काम – मोहमुननु
ब्रह्मदेवुंडैन – बैडिदेहमु गल्ग
जेसिवेयक मम्मु – जॆऱिचॆ नतडु
तुच्छमैनटुवंटि – तो लॆम्मुकलतोडि
मुऱिकि चॆत्तलु चेर्चि – मूट कट्टॆ

ते. नी शरीरालु पडिपोवु – टॆऱुग केमु
कामुकुल मैति मिक मिम्मु – गानलेमु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८३
सी. गरुडवाहन । दिव्य – कौस्तुभालंकार ।
रविकोटितेज । सा – रंगवदन ।
मणिगणान्वित । हेम – मकुटाभरण । चारु
मकरकुंडल । लस – न्मंदहास ।
कांचनांबर । रत्न – कांचिविभूषित ।
सुरवरार्चित । चंद्र – सूर्यनयन ।
कमलनाभ । मुकुंद । – गंगाधरस्तुत ।
राक्षसांतक । नाग – राजशयन ।

ते. पतितपावन । लक्षीश । – ब्रह्मजनक ।
भक्तवत्सल । सर्वेश । – परमपुरुष ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८४
सी. पलुमाऱु दशरूप – मुलु दरिंचिति वेल?
येकरूपमु बॊंद – वेल नीवु?
नयमुन क्षीराब्धि – नडुम जेरिति वेल?
रत्नकांचन मंदि – रमुलु लेवॆ?
पन्नगेंद्रुनिमीद – बव्वलिंचिति वेल?
जलतारुपट्टॆमं – चमुलु लेवॆ?
ऱॆक्कलु गलपक्षि – नॆक्कसागिति वेल?
गजतुरंगांदोलि – कमुलु लेवॆ?

ते. वनजलोचन । यिटुवंटि – वैभवमुलु
सॊगसुगा नीकु दोचॆनो – सुंदरांग?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८५
सी. तिरुपति स्थलमंदु – दिन्नगा ने नुन्न
वेंकटेशुडु मेत – वेयलेडॊ?
पुरुषोत्तममुन के – बोयनजालु ज
गन्नाथु डन्नंबु – गडपलेडॊ?
श्रीरंगमुनकु ने – जेर बोयिन जालु
स्वामि ग्रासमु बॆट्टि – साकलेडॊ?
कांचीपुरमुलोन – गदिसि ने गॊलुवुन्न
गरिवरदुडु पॊट्ट – गडपलेडॊ?

ते. यॆंदु बोवक नेनु नी – मंदिरमुन
निलिचितिनि नीकु नामीद – नॆनरु लेदु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८६
सी. तार्क्ष्यवाहन । नीवु – दंडिदात वटंचु
गोरि वेडुक निन्नु – गॊल्ववच्चि
यर्थिमार्गमुनु ने – ननुसरिंचितिनय्य
लावैन बदुनाल्गु – लक्ष लैन
वेषमुल् वेसि ना – विद्याप्रगल्भत
जूपसागिति नीकु – सुंदरांग ।
यानंद मैन ने – नडुग वच्चिन दिच्चि
वांछ दीर्पुमु – नीलवर्ण । वेग

ते. नीकु नाविद्य हर्षंबु – गाक युन्न
तेपतेपकु वेषमुल् – देनु सुम्मि.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८७
सी. अमरेंद्रविनुत । ने – नतिदुरात्मुड नंचु
गललोन नैननु – गनुल बडवु
नीवु प्रत्यक्षमै – नुलुवकुंडिन मानॆ
दॊड्डगा नॊक युक्ति – दॊरकॆनय्य ।
गट्टिकॊय्यनु दॆच्चि – घनमुगा खंडिंचि
नीस्वरूपमु चेसि – निलुपुकॊंचु
धूप दीपमु लिच्चि – तुलसितो बूजिंचि
नित्यनैवेद्यमुल् – नेममुगनु

ते. नडुपुचुनु निन्नु गॊलिचॆद – नम्मि बुद्धि
नी प्रपंचंबु गलुगु ना – किंतॆ चालु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८८
सी. भुवनेश । गोविंद । – रविकोटिसंकाश ।
पक्षिवाहन । भक्त – पारिजात ।
यंभोजभव रुद्र – जंभारिसन्नुत ।
सामगानविलोल । – सारसाक्ष ।
वनधिगंभीर । श्री – वत्सकौस्तुभवक्ष ।
शंखचक्रगदासि – शार्ज्ञहस्त ।
दीनरक्षक । वासु – देव । दैत्यविनाश ।
नारदार्चित । दिव्य – नागशयन ।

ते. चारु नवरत्नकुंडल – श्रवणयुगल ।
विबुधवंदित पादब्ज । – विश्वरूप ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0८९
सी. नागेंद्रशयन । नी – नाममाधुर्यंबु
मूडुकन्नुल सांब – मूर्ति कॆऱुक
पंकजाताक्ष । नी – बलपराक्रम मॆल्ल
भारतीपति यैन – ब्रह्म कॆऱुक
मधुकैटभारि । नी – मायासमर्थत
वसुधलो बलिचक्र – वर्ति कॆऱुक
परमात्म । नी दगु – पक्षपातित्वंबु
दशशताक्षुल पुरं – दरुनि कॆऱुक

ते. वीरि कॆऱुकगु नीकथल् – विंत लॆल्ल
नरुल कॆऱु कन्न नॆवरैन – नव्विपोरॆ?
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९0
सी. अर्थु लेमैन नि – न्नडुगवच्चॆद रंचु
क्षीरसागरमंदु – जेरिनावु
नीचुट्टु सेवकुल् – निलुवकुंडुटकुनै
भयदसर्पमुमीद – बंडिनावु
भक्तबृंदमु वॆंट – बडि चरिंचॆद रंचु
नॆगसि पोयॆडिपक्षि – नॆक्किनावु
दासुलु नीद्वार – मासिंपकुंटकु
मंचि योधुल काव – लुंचिनावु

ते. लावु गलवाड वैति वे – लागु नेनु
निन्नु जूतुनु नातंड्रि । – नीरजाक्ष ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९१
सी. नीकथल् चॆवुललो – सोकुट मॊदलुगा
बुलकांकुरमु मॆन – बुट्टुवाडु
नयमैन नी दिव्य – नामकीर्तनलोन
मग्नुडै देहंबु – मऱचुवाडु
फालंबुतो नीदु – पादयुग्ममुनकु
ब्रेमतो दंड म – र्पिंचुवाडु
हा पुंडरीकाक्ष । – हा राम । हरि । यंचु
वेड्कतो गेकलु – वेयुवाडु

ते. चित्तकमलंबुननु निन्नु – जेर्चुवाडु
नीदुलोकंबुनं दुंडु – नीरजाक्ष ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९२
सी. निगमगोचर । नेनु – नीकु मॆप्पगुनट्लु
लॆस्सगा बूजिंप – लेनु सुम्मि
नाकु दोचिन भूष – णमुलु पॆट्टॆद नन्न
गौस्तुभमणि नीकु – गलदु मुंदॆ
भक्ष्यभोज्यमुल न – र्पणमु जेसॆद नन्न
नीवु पॆट्टिति सुध – निर्जरुलकु
गलिमिकॊद्दिग गानु – कल नॊसंगॆद नन्न
भार्गवीदेवि नी – भार्य यय्यॆ

ते. नन्नि गलवाड वखिल लो – काधिपतिवि ।
नीकु सॊम्मुलु पॆट्ट ने – नॆंतवाड ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९३
सी. नवसरोजदलाक्ष । – नन्नु बोषिंचॆडु
दातवु नी वंचु – धैर्यपडिति
ना मनंबुन निन्नु – नम्मिनंदुकु दंड्रि ।
मेलु ना कॊनरिंपु – नीलदेह ।
भलिभली । नी यंत – प्रभुवु नॆक्कड जूड
बुडमिलो नी पेरु – पॊगडवच्चु
मुंदु जेसिन पाप – मुनु नशिंपग जेसि
निर्वहिंपुमु नन्नु – नेर्पुतोड

ते. बरमसंतोष मायॆ ना – प्राणमुलकु
नी​ऋणमु दीर्चुकॊन नेर – नीरजाक्ष ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९४
सी. फणुलपुट्टलमीद – बव्वलिंचिनयट्लु
पुलुल गुंपुन जेर – बोयिनट्लु
मकरिवर्गं बुन्न – मडुगु जॊच्चिनयट्लु
गंगदापुन निंड्लु – गट्टिनट्लु
चॆदलभूमिनि जाप – चेर बऱचिनयट्लु
ओटिबिंदॆल बाल – नुनिचिनट्लु
वॆर्रिवानिकि बहु – वित्त मिच्चिनयट्लु
कम्मगुडिसॆ मंदु – गाल्चिनट्लु

ते. स्वामि नी भक्तवरुलु दु – र्जनुलतोड
जॆलिमि जेसिनय ट्लैन – जेटु वच्चु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९५
सी. दनुजसंहार । चक्र – धर । नीकु दंडंबु
लिंदिराधिप । नीकु – वंदनंबु
पतितपावन । नीकु – बहुनमस्कारमुल्
नीरजातदलाक्ष । – नीकु शरणु
वासवार्चित । मेघ – वर्ण । नीकु शुभंबु
मंदरधर । नीकु – मंगलंबु
कंबुकंधर । शार्ज्ग – कर । नीकु भद्रंबु
दीनरक्षक । नीकु – दिग्विजयमु

ते. सकलवैभवमुलु नीकु – सार्वभौम ।
नित्यकल्याणमुलु नगु – नीकु नॆपुडु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९६
सी. मत्स्यावतार मै – मडुगुलोपल जॊच्चि
सोमकासुरु द्रुंचि – चोद्यमुगनु
दॆच्चि वेदमु लॆल्ल – मॆच्च देवतलॆल्ल
ब्रह्म किच्चिति वीवु – भलि । यनंग
ना वेदमुल निय्य – नाचारनिष्ठल
ननुभविंचुचु नुंदु – रवनिसुरुलु
सकलपापंबुलु – समसिपोवु नटंचु
मनुजु लंदऱु नीदु – महिम दॆलिसि

ते. युंदु ररविंदनयन । नी – युनिकि दॆलियु
वारलकु वेग मोक्षंबु – वच्चु ननघ ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९७
सी. कूर्मावतारमै – कुधरंबुक्रिंदनु
गोर्कितो नुंडवा – कॊमरु मिगुल?
वरहावतारमै – वनभूमुलनु जॊच्चि
शिक्षिंपवा हिर – ण्याक्षु नपुडु?
नरसिंहमूर्तिवै – नरभोजनु हिरण्य
कशिपुनि द्रुंपवा – कांति मीऱ?
वामनरूपमै – वसुधलो बलिचक्र
वर्ति नऱंपवा – वैर मुडिगि?

ते. यिट्टि पनु लॆल्ल जेयगा – नॆवरिकेनि
तगुनॆ नरसिंह । नीकिदि – दगुनु गाक ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९८
सी. लक्ष्मीश । नीदिव्य – लक्षणगुणमुल
विनजाल कॆप्पुडु – वॆर्रिनैति
ना वॆर्रिगुणमुलु – नयमुगा खंडिंचि
नन्नु रक्षिंपु मो – नलिननेत्र ।
निन्नु ने नम्मिति – नितरदैवमुल ने
नम्मले दॆप्पुडु – नागशयन ।
कापाडिननु नीवॆ – कष्टपॆट्टिन नीवॆ
नीपादकमलमुल् – निरत मेनु

ते. नम्मियुन्नानु नीपाद – नलिनभक्ति
वेग दयचेसि रक्षिंपु – वेदविद्य ।
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

0९९
सी. अमरेंद्रविनुत । नि – न्ननुसरिंचिनवारु
मुक्ति बॊंदिरि वेग – मुदमुतोनु
नीपादपद्ममुल् – नॆऱ नम्मियुन्नानु
नाकु मोक्षं बिम्मु – नलिननेत्र ।
काचि रक्षिंचु नन् – गडतेर्चु वेगमे
नी सेवकुनि जेयु – निश्चलमुग
गापाडिननु नीकु – गैंकर्यपरुड नै
चॆलगि नीपनुलनु – जेयुवाड

ते. ननुचु बलुमाऱु वेडॆद – नब्जनाभ ।
नाकु ब्रत्यक्ष मगुमु निन् – नम्मिनानु.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

१00
सी. शेषप्प यनु कवि – चॆप्पिन पद्यमुल्
चॆवुल कानंदमै – चॆलगुचुंडु
ने मनुजुंडैन – नॆलमि नी शतकंबु
भक्तितो विन्न स – त्फलमु गलुगु
जॆलगि यी पद्यमुल् – चेर्चि व्रासिनवारु
कमलाक्षुकरुणनु – गांतु रॆपुडु
निंपुगा बुस्तकं – बॆपुडु बूजिंचिन
दुरितजालंबुलु – दॊलगिपोवु

ते. निद्दि पुण्याकरं बनि – यॆपुडु जनुलु
गषट मॆन्नक पठियिंप – गलुगु मुक्ति.
भूषणविकास । श्रीधर्म – पुरनिवास ।
दुष्टसंहार । नरसिंह – दुरितदूर ।

नरसिंह शतकम् से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. नरसिंह शतकम् किस देवता की स्तुति में रचा गया है?

    नरसिंह शतकम् भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की स्तुति में रचा गया है।

  2. नरसिंह शतकम् का मुख्य उद्देश्य क्या है?

    नरसिंह शतकम् का उद्देश्य भगवान नरसिंह की कृपा से भक्तों को भय, पाप और संकटों से मुक्ति दिलाना है।

  3. नरसिंह शतकम् का पाठ किस समय करना अधिक शुभ माना जाता है?

    नरसिंह शतकम् का पाठ प्रातःकाल या संध्याकाल में, शुद्ध मन और पवित्र स्थान पर करना अधिक शुभ माना जाता है।

  4. नरसिंह शतकम् में कितनी श्लोक या पद्य हैं?

    नरसिंह शतकम् में 100 श्लोक (पद्य) हैं।

  5. नरसिंह शतकम् का पाठ करने से भक्तों को क्या लाभ होता है?

    नरसिंह शतकम् का पाठ करने से भय से मुक्ति, आध्यात्मिक शांति और भगवान नरसिंह की कृपा प्राप्त होती है।

सुमती शतकम्
वेमन शतकम् ( వేమన శతకం )
मेधा सूक्तम्
दाशरथी शतकम् ( దాశరథీ శతకం )
श्री काल हस्तीश्वर शतकम् – శ్రీ కాళ హస్తీశ్వర శతకం
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