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नवग्रह स्तोत्रस्तोत्र

नवग्रह स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 26, 2026 6:33 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 26, 2026
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नवग्रह स्तोत्रम्

नवग्रह स्तोत्रम् (Navagraha Stotram) हिंदू धर्म में नवग्रहों की उपासना और उनके शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। नवग्रह का अर्थ है नौ ग्रह, जो हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करते हैं। ये नौ ग्रह सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु हैं। नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ इन ग्रहों की शांति और उनके सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

Contents
  • नवग्रह स्तोत्रम्
  • नवग्रहों का महत्व
  • नवग्रह स्तोत्रम् का रचयिता
  • नवग्रह स्तोत्रम् के श्लोक Sloka of Navagraha Stotram
  • नवग्रह स्तोत्रम् का लाभ
  • नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने की विधि
  • विशेष तिथि और दिन
  • नवग्रह स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न
    • नवग्रह स्तोत्रम् क्या है?
    • नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?
    • नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने के लाभ क्या हैं?
    • क्या नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ किसी विशेष विधि से करना चाहिए?
    • नवग्रह स्तोत्रम् कहां से प्राप्त कर सकते हैं?

नवग्रहों का महत्व

नवग्रहों को ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व दिया गया है। माना जाता है कि ये ग्रह हमारे कर्म, भाग्य और जीवन के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करते हैं। जब किसी ग्रह की स्थिति कमजोर होती है या वह अशुभ फल देने वाला होता है, तो जीवन में कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं। इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए नवग्रहों की पूजा और स्तोत्र पाठ को प्रभावी माना गया है।

नवग्रह स्तोत्रम् का रचयिता

नवग्रह स्तोत्रम् आदिशंकराचार्य द्वारा रचित है। इसमें प्रत्येक ग्रह के लिए एक-एक श्लोक है, जो उनके गुण, शक्ति और विशेषताओं का वर्णन करता है।

नवग्रह स्तोत्रम् के श्लोक Sloka of Navagraha Stotram

जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम् ।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम् ।।
दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम् ।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम् ।।

धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् ।
कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ।।
प्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम् ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ।।

देवानाञ्च ऋषीणाञ्च गुरुं काञ्चनसन्निभम् ।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् ।।
हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् ।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् ।।

नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् ।
छायामार्ताण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ।।
अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम् ।
सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ।।

पलाशपुष्पसङ्काशं तारकाग्रहमस्तकम् ।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् ।।
इति व्यासमुखोद्गीतं यः पठेत् सुसमाहितः ।
दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्नशान्तिर्भविष्यति ।।
नरनारीनृपाणां च भवेद् दुःस्वप्ननाशनम् ।
ऐश्वर्यमतुलं तेषामारोग्यं पुष्टिवर्धनम् ।।
ग्रहनक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्निसमुद्भवाः ।
ताः सर्वाः प्रशमं यान्ति व्यासो ब्रूते न संशयः ।।

नवग्रह स्तोत्रम् का लाभ

  1. ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करता है।
  2. जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाता है।
  3. मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
  4. स्वास्थ्य, धन और कार्यक्षेत्र में उन्नति प्रदान करता है।
  5. ग्रह शांति के लिए इसे ज्योतिषी की सलाह पर भी पढ़ा जाता है।

नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने की विधि

  1. नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ प्रातःकाल या संध्या के समय किया जाता है।
  2. पाठ से पहले स्नान कर शुद्ध हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  3. पूजा स्थान पर दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
  4. नवग्रह यंत्र या नवग्रह मूर्तियों के सामने बैठकर ध्यानपूर्वक पाठ करें।

विशेष तिथि और दिन

  • ग्रहों की शांति के लिए विशेषकर मंगलवार, शनिवार, अमावस्या, पूर्णिमा, या ग्रहण के समय इस स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
  • ग्रहों की दशा और महादशा के अनुसार भी इसका पाठ किया जाता है।

नवग्रह स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. नवग्रह स्तोत्रम् क्या है?

    नवग्रह स्तोत्रम् एक प्राचीन वैदिक मंत्र है जो नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, और केतु) की स्तुति के लिए रचा गया है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से जीवन में ग्रहों से संबंधित समस्याओं का समाधान और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

  2. नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?

    नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ प्रातःकाल या संध्या समय करना शुभ माना जाता है। इसे नहाने के बाद शुद्ध होकर और शांत मन से पढ़ना चाहिए। शनिवार और मंगलवार के दिन इसका पाठ विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

  3. नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने के लाभ क्या हैं?

    नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने से ग्रहों की अशुभता दूर होती है, जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह स्वास्थ्य, धन, और पारिवारिक संबंधों में सुधार लाने के लिए भी प्रभावी माना जाता है।

  4. क्या नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ किसी विशेष विधि से करना चाहिए?

    हाँ, नवग्रह स्तोत्रम् का पाठ करते समय अपने मन को शांत रखना चाहिए और ध्यानपूर्वक प्रत्येक मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। पाठ से पहले भगवान गणेश और नवग्रहों का ध्यान करना शुभ होता है। दीपक जलाकर और पूजा स्थान पर बैठकर पाठ करना अधिक प्रभावी माना जाता है।

  5. नवग्रह स्तोत्रम् कहां से प्राप्त कर सकते हैं?

    नवग्रह स्तोत्रम् प्राचीन ग्रंथों, धार्मिक पुस्तकों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है। इसे धार्मिक पुस्तकों की दुकानों या विभिन्न वेब साइट्स और मोबाइल ऐप्स से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।u003cbru003eu003cbru003e

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