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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > दुर्गा स्तोत्र > अंबिका स्तव
दुर्गा स्तोत्रस्तोत्र

अंबिका स्तव

Sanatani
Last updated: जनवरी 25, 2026 3:18 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 25, 2026
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अंबिका स्तव

अम्बिका स्तव (या अंबिका स्तव) एक प्रसिद्ध धार्मिक स्तोत्र है जो देवी अंबिका की स्तुति में रचा गया है। देवी अंबिका को हिंदू धर्म में देवी दुर्गा, पार्वती, शक्ति या चामुंडा के रूप में पूजा जाता है। यह स्तव देवी के तेज, करुणा, शक्ति और रक्षणात्मक स्वरूप का गुणगान करता है और भक्ति भाव से उन्हें समर्पित होता है। इसे पाठ करने से भय, संकट, रोग, शत्रु और दुःखों से मुक्ति की प्राप्त होती है।

Contents
  • अंबिका स्तव
  • देवी अंबिका कौन हैं?
  • अंबिका स्तव ( Ambika Stava )
  • अंबिका स्तव का उद्देश्य और लाभ
  • अंबिका स्तव के पाठ की विधि

देवी अंबिका कौन हैं?


देवी अंबिका को शक्तिस्वरूपा माना जाता है। ‘अंबा’ का अर्थ होता है ‘माँ’ और ‘अंबिका’ उसका स्नेहमयी, तेजस्वी रूप है। पुराणों के अनुसार, देवी अंबिका ने असुरों का वध कर संसार की रक्षा की थी। देवी दुर्गा का जो रूप रक्तबीज, चण्ड-मुण्ड, महिषासुर आदि का संहार करता है, वही अंबिका कहलाता है।

अंबिका स्तव का उल्लेख मुख्यतः मार्कण्डेय पुराण के देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती या चंडी पाठ) में किया गया है। विशेषतः सप्तशती के 11वें अध्याय में राजा सुरथ और वैश्य सम्मदत्त द्वारा देवी के चरणों में जो स्तुति की जाती है, वह अंबिका स्तव कहलाता है।

यह स्तुति देवी के विभिन्न स्वरूपों, शक्तियों और गुणों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करती है।

Ambika Stava

अंबिका स्तव ( Ambika Stava )

स्मितास्यां सुरां शुद्धविद्याङ्कुराख्यां
मनोरूपिणीं देवकार्योत्सुकां ताम्।
सुसिंहस्थितां चण्डमुण्डप्रहारां
नमाम्यम्बिकामम्बु- जातेक्षणां ताम्।

सुमेरुस्थितां सर्वभूषाविभूषां
जगन्नायिकां रक्तवस्त्रान्विताङ्गाम्।
तमोभञ्जिनीं मीनसादृश्यनेत्रां
नमाम्यम्बिकामम्बु- जातेक्षणां ताम्।

शिवाङ्गीं भवानीं ज्वलद्रक्तजिह्वां
महापापनाशां जनानन्ददात्रीम्।
लसद्रत्नमालां धरन्तीं धराद्यां
नमाम्यम्बिकामम्बु- जातेक्षणां ताम्।

सदा मङ्गलां सर्वधर्स्वरूपां
सुमाहेश्वरीं सर्वजीवच्छरण्याम्।
तडित्सोज्ज्वलां सर्वदेवैः प्रणम्यां
नमाम्यम्बिकामम्बु- जातेक्षणां ताम्।

सहस्राब्जरूढां कुलान्तःस्थितैकां
सुधागर्भिणीं मूलमन्त्रात्मरूपाम्।
सुराह्लादिनीं शूरनन्द्यां धरित्रीं
नमाम्यम्बिकामम्बु- जातेक्षणां ताम्।

अंबिका स्तव का उद्देश्य और लाभ

  • संकट से रक्षा: यह स्तव पाठक की जीवन की विपत्तियों से रक्षा करता है।
  • शत्रु पर विजय: स्तव में देवी को शत्रुनाशिनी के रूप में वर्णित किया गया है।
  • रोगों से मुक्ति: इसे पढ़ने से मानसिक और शारीरिक रोगों का निवारण होता है।
  • मुक्ति की प्राप्ति: भक्त की आत्मा में वैराग्य, भक्ति और शांति का संचार होता है।
  • धन-धान्य में वृद्धि: स्तोत्र का प्रभाव व्यक्ति के सौभाग्य में वृद्धि करता है।

अंबिका स्तव के पाठ की विधि

  • प्रातःकाल या संध्या समय में स्वच्छ होकर शांत मन से पाठ करें।
  • देवी की मूर्ति, चित्र या यंत्र के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाकर करें।
  • शुद्ध उच्चारण के साथ स्तोत्र का पाठ करें।
  • अंत में देवी से प्रार्थना करें कि वह कृपा बनाए रखें।

अंबिका स्तव न केवल देवी की शक्ति को याद करता है, बल्कि यह एक साधक को आत्मिक बल प्रदान करता है। यह भक्त को याद दिलाता है कि किसी भी परिस्थिति में माँ शक्ति की कृपा से वह अजेय हो सकता है।

  • अंबिका स्तव के कई भाष्य (टीका) और व्याख्याएँ प्रसिद्ध आचार्यों ने की हैं।
  • यह स्तव संस्कृत में उपलब्ध है, लेकिन इसका हिंदी, गुजराती, तमिल, तेलुगु आदि भाषाओं में भी अनुवाद और भावार्थ मिलता है।
  • यह स्तव संपूर्ण देवी उपासना पद्धति का एक अभिन्न अंग है।
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