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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > पार्वती स्तोत्र > देवी आनंद लहरी स्तोत्रम्
पार्वती स्तोत्रस्तोत्र

देवी आनंद लहरी स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 27, 2026 4:25 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 27, 2026
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देवी आनंद लहरी स्तोत्रम्

देवी आनंद लहरी स्तोत्रम् एक अत्यंत दिव्य और रहस्यमयी स्तोत्र है, जो आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। यह स्तोत्र दुर्गा, पार्वती, ललिता त्रिपुरसुंदरी या श्रीविद्या के रूप में पूजित आद्य शक्ति देवी की स्तुति करता है। ‘आनंद लहरी’ का अर्थ होता है “आनंद की तरंगें”, और यह स्तोत्र शक्ति की दिव्यता, सौंदर्य, करुणा, शक्ति और अनुग्रह की महिमा का सुंदर और काव्यात्मक चित्रण है।

Contents
  • देवी आनंद लहरी स्तोत्रम्
  • देवी आनंद लहरी स्तोत्रम्
  • देवी आनंद लहरी स्तोत्रम् का लाभ और फल
  • देवी की कृपा कैसे प्राप्त करें?

देवी आनंद लहरी स्तोत्रम्

भवानि स्तोतुं त्वां प्रभवति चतुर्भिर्न वदनैः भवानि स्तोतुं त्वां प्रभवति चतुर्भिर्न वदनैः प्रजानामीशानस्त्रिपुरमथनः पञ्चभिरपि।
न षड्भिः सेनानीर्दशशतमुखैरप्यहिपतिःतदान्येषां केषां कथय कथमस्मिन्नवसरः।
घृतक्षीरद्राक्षामधुमधुरिमा कैरपि पदैःविशिष्यानाख्येयो भवति रसनामात्र विषयः।
तथा ते सौन्दर्यं परमशिवदृङ्मात्रविषयःकथङ्कारं ब्रूमः सकलनिगमागोचरगुणे।

मुखे ते ताम्बूलं नयनयुगळे कज्जलकलाललाटे काश्मीरं विलसति गळे मौक्तिकलता।
स्फुरत्काञ्ची शाटी पृथुकटितटे हाटकमयीभजामि त्वां गौरीं नगपतिकिशोरीमविरतम्।
विराजन्मन्दारद्रुमकुसुमहारस्तनतटीनदद्वीणानादश्रवणविलसत्कुण्डलगुणा।
नताङ्गी मातङ्गी रुचिरगतिभङ्गी भगवतीसती शम्भोरम्भोरुहचटुलचक्षुर्विजयते।

नवीनार्कभ्राजन्मणिकनकभूषणपरिकरैःवृताङ्गी सारङ्गीरुचिरनयनाङ्गीकृतशिवा।
तडित्पीता पीताम्बरललितमञ्जीरसुभगाममापर्णा पूर्णा निरवधिसुखैरस्तु सुमुखी।
हिमाद्रेः संभूता सुललितकरैः पल्लवयुतासुपुष्पा मुक्ताभिर्भ्रमरकलिता चालकभरैः।
कृतस्थाणुस्थाना कुचफलनता सूक्तिसरसारुजां हन्त्री गन्त्री विलसति चिदानन्दलतिका।

सपर्णामाकीर्णां कतिपयगुणैः सादरमिहश्रयन्त्यन्ये वल्लीं मम तु मतिरेवं विलसति।
अपर्णैका सेव्या जगति सकलैर्यत्परिवृतःपुराणोऽपि स्थाणुः फलति किल कैवल्यपदवीम्।
विधात्री धर्माणां त्वमसि सकलाम्नायजननीत्वमर्थानां मूलं धनदनमनीयाङ्घ्रिकमले।
त्वमादिः कामानां जननि कृतकन्दर्पविजयेसतां मुक्तेर्बीजं त्वमसि परमब्रह्ममहिषी।

प्रभूता भक्तिस्ते यदपि न ममालोलमनसःत्वया तु श्रीमत्या सदयमवलोक्योऽहमधुना।
पयोदः पानीयं दिशति मधुरं चातकमुखेभृशं शङ्के कैर्वा विधिभिरनुनीता मम मतिः।
कृपापाङ्गालोकं वितर तरसा साधुचरितेन ते युक्तोपेक्षा मयि शरणदीक्षामुपगते।
न चेदिष्टं दद्यादनुपदमहो कल्पलतिकाविशेषः सामान्यैः कथमितरवल्लीपरिकरैः।

महान्तं विश्वासं तव चरणपङ्केरुहयुगेनिधायान्यन्नैवाश्रितमिह मया दैवतमुमे।
तथापि त्वच्चेतो यदि मयि न जायेत सदयंनिरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम्।
अयः स्पर्शे लग्नं सपदि लभते हेमपदवींयथा रथ्यापाथः शुचि भवति गङ्गौघमिलितम् ।
तथा तत्तत्पापैरतिमलिनमन्तर्मम यदित्वयि प्रेम्णासक्तं कथमिव न जायेत विमलम्।

त्वदन्यस्मादिच्छाविषयफललाभे न नियमःत्वमर्थानामिच्छाधिकमपि समर्था वितरणे।
इति प्राहुः प्राञ्चः कमलभवनाद्यास्त्वयि मनःत्वदासक्तं नक्तं दिवमुचितमीशानि कुरु तत्।
स्फुरन्नानारत्नस्फटिकमयभित्तिप्रतिफलत्त्वदाकारं चञ्चच्छशधरकलासौधशिखरम्।
मुकुन्दब्रह्मेन्द्रप्रभृतिपरिवारं विजयतेतवागारं रम्यं त्रिभुवनमहाराजगृहिणि।

निवासः कैलासे विधिशतमखाद्याः स्तुतिकराःकुटुम्बं त्रैलोक्यं कृतकरपुटः सिद्धिनिकरः।
महेशः प्राणेशस्तदवनिधराधीशतनयेन ते सौभाग्यस्य क्वचिदपि मनागस्ति तुलना।
वृषो वृद्धो यानं विषमशनमाशा निवसनंश्मशानं क्रीडाभूर्भुजगनिवहो भूषणविधिः।
समग्रा सामग्री जगति विदितैव स्मररिपोःयदेतस्यैश्वर्यं तव जननि सौभाग्यमहिमा।

अशेषब्रह्माण्डप्रलयविधिनैसर्गिकमतिःश्मशानेष्वासीनः कृतभसितलेपः पशुपतिः।
दधौ कण्ठे हालाहलमखिलभूगोलकृपयाभवत्याः सङ्गत्याः फलमिति च कल्याणि कलये।
त्वदीयं सौन्दर्यं निरतिशयमालोक्य परयाभियैवासीद्गङ्गा जलमयतनुः शैलतनये।
तदेतस्यास्तस्माद्वदनकमलं वीक्ष्य कृपयाप्रतिष्ठामातन्वन्निजशिरसिवासेन गिरिशः।

विशालश्रीखण्डद्रवमृगमदाकीर्णघुसृणप्रसूनव्यामिश्रं भगवति तवाभ्यङ्गसलिलम्।
समादाय स्रष्टा चलितपदपांसून्निजकरैःसमाधत्ते सृष्टिं विबुधपुरपङ्केरुहदृशाम्।
वसन्ते सानन्दे कुसुमितलताभिः परिवृतेस्फुरन्नानापद्मे सरसि कलहंसालिसुभगे।
सखीभिः खेलन्तीं मलयपवनान्दोलितजलेस्मरेद्यस्त्वां तस्य ज्वरजनितपीडापसरति।

देवी आनंद लहरी स्तोत्रम् का लाभ और फल

देवी आनंद लहरी का नित्य पाठ करने से साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • मानसिक शांति व आध्यात्मिक ऊर्जा
  • श्रीचक्र साधना में प्रगति
  • कुंडलिनी जागरण में सहायता
  • विद्या, ऐश्वर्य और भौतिक सुखों की प्राप्ति
  • देवी की विशेष कृपा और रक्षा
  • तांत्रिक अवरोधों की शांति

देवी की कृपा कैसे प्राप्त करें?

  1. शुद्ध मन और स्थान में पाठ करें
  2. श्रीचक्र या त्रिपुरसुंदरी की मूर्ति/यंत्र के सामने ध्यानपूर्वक करें
  3. “ॐ श्री माते नमः” या “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं” मंत्र से आरंभ करें
  4. नित्य पाठ से देवी कृपा शीघ्र प्राप्त होती है
श्री राम कर्णामृतम्
जम्बुकेश्वरी स्तोत्रम्
उमा अक्षरमाला स्तोत्रम्
अन्नपूर्णा स्तोत्रम्
लक्ष्मी नरसिम्हा करावलम्ब स्तोत्रम्
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