By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • सनातनज्ञान
  • गीतकाव्य
  • आरोग्य
  • ज्योतिष
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > राम स्तोत्र > श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्
राम स्तोत्रशिव स्तोत्रस्तोत्र

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 27, 2026 5:09 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 27, 2026
Share
SHARE

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्रीरामानन्दस्वामि विरचितम्) भगवान शिव की स्तुति के लिए रचित एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है। इसका रचयिता महान संत और विद्वान श्रीरामानन्दस्वामी माने जाते हैं, जो भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे। वे भगवान राम और भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था और भक्ति रखते थे, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने यह स्तोत्र रचा।

Contents
  • श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्
  • श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् की रचना और उद्देश्य:
  • श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् के श्लोकों का भावार्थ:
  • श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् पाठ का महत्व:
  • श्रीरामानन्दस्वामी और उनके योगदान:
  • श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्

यह स्तोत्र भगवान शिव और राम दोनों के अद्वितीय और अभिन्न संबंध को प्रकट करता है, क्योंकि भक्तिपरक दृष्टिकोण से राम और शिव एक ही परमात्मा के विभिन्न रूप माने जाते हैं। इस स्तोत्र में शिव और राम दोनों की महिमा का वर्णन है, जिसमें दोनों की शक्ति, अनुग्रह और कृपा का स्मरण किया जाता है।

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् की रचना और उद्देश्य:

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् में कुल आठ श्लोक होते हैं, जो भगवान शिव और श्रीराम दोनों की महिमा का गुणगान करते हैं। श्रीरामानन्दस्वामी ने इसे साधकों और भक्तों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे वे भगवान शिव और राम के प्रति अपने भक्ति भाव को प्रकट कर सकें।

यह स्तोत्र शिव और राम की कृपा पाने का एक सरल और सशक्त माध्यम माना जाता है। इसमें भगवान शिव की विशेषताओं, उनकी शक्ति और महिमा का वर्णन किया गया है, साथ ही भगवान राम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति का भी उल्लेख है। इस स्तोत्र के माध्यम से भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है कि वे भक्तों को उनके जीवन में शक्ति, साहस, ज्ञान और सद्गुण प्रदान करें।

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् के श्लोकों का भावार्थ:

इस स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव और राम की अद्वितीयता का बखान किया गया है। श्लोकों में भगवान शिव की शांत, समर्पित, और विश्व कल्याण की भावना को महिमामंडित किया गया है। साथ ही, भगवान राम को धर्म और न्याय के पालनकर्ता के रूप में स्थापित किया गया है।

प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव के विभिन्न रूपों और लीलाओं का गुणगान किया गया है, जिनसे यह प्रतीत होता है कि वे सर्वशक्तिमान हैं, और राम के प्रति उनकी भक्ति अपार है। इस स्तोत्र में यह भी कहा गया है कि भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् पाठ का महत्व:

  • आध्यात्मिक लाभ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् का नियमित पाठ करने से भक्त को मानसिक शांति और आत्मिक बल मिलता है। यह मन की अशांति को दूर करके शांति और संतुलन प्रदान करता है।
  • भौतिक लाभ: इस स्तोत्र के माध्यम से भगवान शिव और राम की कृपा प्राप्त करके व्यक्ति अपने जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति प्राप्त कर सकता है।
  • धार्मिक लाभ: इस स्तोत्र का पाठ करने से भगवान शिव और राम के प्रति भक्ति और प्रेम प्रगाढ़ होता है, जो व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायता करता है।

श्रीरामानन्दस्वामी और उनके योगदान:

श्रीरामानन्दस्वामी ने भक्ति आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके द्वारा रचित श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् उनके भक्ति मार्ग की एक विशेष अभिव्यक्ति है, जिसमें शिव और राम के प्रति उनकी अद्वितीय श्रद्धा और प्रेम दिखाई देता है। उनके अन्य ग्रंथों की तरह, यह स्तोत्र भी भगवान की महिमा और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है।

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्

 

शिव हरे शिव राम सखे प्रभो
त्रिविधतापनिवारण हे प्रभो ।
अज जनेश्वर यादव पाहि मां
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥१॥

कमललोचन राम दयानिधे
हर गुरो गजरक्षक गोपते ।
शिवतनो भव शङ्कर पाहि मां
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥२॥

सुजनरञ्जन मङ्गलमन्दिरं
भजति ते पुरुषः परमं पदम् ।
भवति तस्य सुखं परमद्भुतं
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥३॥

जय युधिष्ठिरवल्लभ भूपते
जय जयार्जितपुण्यपयोनिधे ।
जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तु ते
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥४॥

भवविमोचन माधव मापते
सुकविमानसहंस शिवारते ।
जनकजारत राघव रक्ष मां
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥५॥

अवनिमण्डलमङ्गल मापते
जलदसुन्दर राम रमापते ।
निगमकीर्तिगुणार्णव गोपते
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥६॥

पतितपावन नाममयी लता
तव यशो विमलं परिगीयते ।
तदपि माधव मां किमुपेक्षसे
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥७॥

अमरतापरदेव रमापते
विजयतस्तव नामधनोपमा ।
मयि कथं करुणार्णव जायते
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥८॥


हनुमतः प्रिय चापकर प्रभो
सुरसरिद्धृतशेखर हे गुरो ।
ममविभो किमु विस्मरणं कृतं
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥९॥

अहरहर्जनरञ्जनसुन्दरं
पठति यः शिवरामकृतं स्तवम् ।
विशति रामरमाचरणाम्बुजे
शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥१०॥

प्रातरुत्थाय यो भक्त्या पठेदेकाग्रमानसः ।
विजयो जायते तस्य विष्णुमाराध्यमाप्नुयात् ॥११॥

 

श्री गणपति द्वादशनाम स्तोत्रम्
उपमन्युकृत शिवस्तोत्रम्
गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम्
कमला अष्टकम्
सरस्वती भुजंगा स्तोत्रम्
TAGGED:Shiv Stotra
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Popular News
भजनराम भजन

Ye Chamak Ye Damak Lyrics

Sanatani
Sanatani
जनवरी 23, 2026
आरती श्री रघुवर जी की
नरसिम्हा स्तुति
नवग्रह शरणागति स्तोत्रम्
करत नहिं क्यों प्रभुपर विस्वास – Karat Nahin Kyon Prabhupar Visvaas
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?