By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: नाथ अब लीजै मोहि उबार
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > विष्णु भजन > नाथ अब लीजै मोहि उबार
भजनविष्णु भजन

नाथ अब लीजै मोहि उबार

Sanatani
Last updated: जनवरी 23, 2026 7:53 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 23, 2026
Share
SHARE

नाथ अब लीजै मोहि उबार लीरिक्स | Naath Ab Leejai Mohi Ubaar

नाथ अब लीजै मोहि उबार !

कामी, कुटिल, कठिन कलि-कबलित, कुत्सित कपटागार ।

मोही, मुखर, महा मद-मर्दित, मंद, मलिन-आचार ॥

बलयित-विषय, विताड़ित, विचलित, विकसित विविध विकार ।

दीन, दुखी, दुरदृष्ट, दुरत्यय, दुर्गत दुर्गुण-भार ।।

पंकिल प्रचुर, पतित, परिपंथी, निरपत्रप, निःसार ।

निःस्व, निखिल निगमागम वर्जित, निगडित नित गृह-दार ।।

दीनाश्रय ! तव विरद वित्ति- विदारण श्रुति-विस्तार ।

सुनत सुयश शुचि सो अब मैं आगत अघहारी-द्वार ।।

इधर उधर क्यों भटक रहा मन
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे राम आएँगे
देखो री छबि नंदसुवनकी – ( Dekho Re Chhabi Nandasuvanaki Lyrics )
बहु जुग बहुत जानि फिरि हारो
नाथ मनें अबकी बार बचाओ
TAGGED:राग आसावरी ( Raag Aasaavaree )
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Popular News
नृसिंह स्तोत्रस्तोत्र

नरसिंह नमस्कार स्तोत्रम्

Sanatani
Sanatani
जनवरी 26, 2026
शिवाष्टकम्
गिरिधर अष्टकम
Hanuman Chalisa Lyrics
उपमन्युकृत शिवस्तोत्रम्
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?