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भजनविष्णु भजन

नारायणं हृषीकेशं गोविन्दं गरुडध्वजम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 23, 2026 7:46 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 23, 2026
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नारायणं हृषीकेशं गोविन्दं गरुडध्वजम् – श्री विष्णु चरण वन्दन  | Narayanam Hrisheekeshan Govindan Garudadhvajam

श्लोक-नारायणं हृषीकेशं गोविन्दं गरुडध्वजम् ।

बासुदेवं हरिं कृष्णं केशवं प्रणमाम्यहम् ।।

दोहा-श्रीगनपति गुरु सारदा, बंदों चारंचार ।

परब्रह्मके रूप सत्र, भिन्न भिन्न आकार ।। १ ।।

पुनि सुमिरौं गुरुबर-चरन, बांछित फल दातार ।

अतिदुम्नर भवसिंधुतें, जे पहुॅचाहिं पार ।। २ ।।

इस अखिल विश्वमें भरा एक तू ही तू
रुचिर रसना तू राम क्यों न रटत
प्रेममुदित मनसे कहो राम राम राम
करत नहिं क्यों प्रभुपर विस्वास – Karat Nahin Kyon Prabhupar Visvaas
स्याम तव मूरति हृदय समानी – Syam Tav Murti Hriday Samani
TAGGED:राग कल्याण ( Raag Kalyaan )
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