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भजनविष्णु भजन

मैं हरि पतित पावन सुने – भजन

Sanatani
Last updated: मार्च 21, 2026 6:11 अपराह्न
Sanatani
Published: मार्च 21, 2026
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मैं हरि पतित पावन सुने – भजन

मैं हरि, पतित-पावन सुने ।

Contents
  • मैं हरि पतित पावन सुने – भजन
  • Main Hari, Patit Paavan Sune – Tulsidas Bhajan

मैं पतित, तुम पतित-पावन, दोउ बानक बने ॥

व्याध गनिका गज अजामिल, साखि निगमनि भने ।

और अधम अनेक तारे, जात कापै गने ॥

जानि नाम अजानि लीन्हें, नरक जमपुर मने ।

दास तुलसी सरन आयो राखिये अपने ॥

Main Hari, Patit Paavan Sune – Tulsidas Bhajan

Main Hari, Patit Paavan Sune.

Main Patit, Tum Patit-Paavan, Dou Baanak Bane॥

Byaadh Ganik Agaj Ajaamil, Saakhi Nigamani Bhane.

Aur Adham Anek Taare, Jaat Kaapai Gane॥

Jaani Naam Ajaani Liinhen Narak Jamapur Mane.

Daas Tulasii Saran Aayo Raakhiye Apane॥

मन सत संगति नित कीजै
पावन प्रेम रामचरन कमल
प्रभु मैं नहिं नाव चलाबौं तब पद रज – Prabhu Main Nahin Naav Chalaabaun
प्रभुके दो ही दास हैं साँचे ( राग शुद्ध कल्याण – ताल तिताला – प्रकीर्ण )
हे नाथ तुम्हीं सबके मालिक तुम
TAGGED:तुलसीदास भजन ( Tulsidas Bhajan )राम भजन ( Ram Bhajan )
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