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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > कृष्ण भजन > साँवलियाकी चेरी कहाँ री
कृष्ण भजनभजन

साँवलियाकी चेरी कहाँ री

Sanatani
Last updated: जनवरी 22, 2026 7:38 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 22, 2026
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साँवलियाकी चेरी कहाँ री  – राग दुर्गा – ताल झप

।।टेक।।

साँवलियाकी चेरी कहाँ री ॥

चाहे मारौ चहै जिवाबौ, जनम जनम नहिं टेक तजौ री ।

कर गहि लियौ कहत हौं साँची, नहिं माने तो तेरी सौं री ॥

जो त्रिभुवन ऐश्वर्य लुभावै, तिनका लौं हौं सो समुझौं री ।

जुगलप्रिया सुन मेरी सजनी, प्रगट भई अत्र नाहिन चोरी ॥

 

Contents
  • साँवलियाकी चेरी कहाँ री  – राग दुर्गा – ताल झप
    • ।।टेक।।
  • Sanvaliyake Cheri Kahan Re – Raag Durga – Taal Jhap


Sanvaliyake Cheri Kahan Re – Raag Durga – Taal Jhap

Saanvaliyaakee Cheree Kahaan Ree .

Chaahe Maarau Chahai Jivaabau, Janam Janam Nahin Tek Tajau Ree .

Kar Gahi Liyau Kahat Haun Saanchee, Nahin Maane to Teree Saun Ree .

Jo Tribhuvan Aishvary Lubhaavai, Tinaka Laun Haun so Samujhaun Ree .

Jugalapriya Sun Meree Sajanee, Pragat Bhee Atr Naahin Choree .

लागो कृष्ण-चरण मन मेरौ
आज सोमवार है ये शिव का दरबार है
छोड मन तू मेरा मेरा अंतमें कोई नहीं तेरा – Chhod Man Too Mera Mera Antamen Koee Nahin Tera
बारम्बार प्रणाम मैया बारम्बार प्रणाम
मोकों कछु न चहिये राम
TAGGED:ताल झप ( Taal Jhap )युगलप्रियाजी ( Yugalpriya ji )राग मेघरंजनी ( Raag Megharanjanee )
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