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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > अष्टकम् > श्री वेंकटेश्वर मंगलाष्टकम्
अष्टकम्

श्री वेंकटेश्वर मंगलाष्टकम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 3, 2026 6:05 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 3, 2026
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श्रीक्षोण्यौ रमणीयुगं सुरमणीपुत्रोऽपि वाणीपतिः
पौत्रश्चंद्रशिरोमणिः फणिपतिः शय्या सुराः सेवकाः ।
तार्क्ष्यो यस्य रथो महश्च भवनं ब्रह्मांडमाद्यः पुमान्
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 1 ॥

यत्तेजो रविकोटिकोटिकिरणान् धिक्कृत्य जेजीयते
यस्य श्रीवदनांबुजस्य सुषमा राकेंदुकोटीरपि ।
सौंदर्यं च मनोभवानपि बहून् कांतिश्च कादंबिनीं
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 2 ॥

नानारत्न किरीटकुंडलमुखैर्भूषागणैर्भूषितः
श्रीमत्कौस्तुभरत्न भव्यहृदयः श्रीवत्ससल्लांछनः ।
विद्युद्वर्णसुवर्णवस्त्ररुचिरो यः शंखचक्रादिभिः
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 3 ॥

यत्फाले मृगनाभिचारुतिलको नेत्रेऽब्जपत्रायते
कस्तूरीघनसारकेसरमिलच्छ्रीगंधसारो द्रवैः ।
गंधैर्लिप्ततनुः सुगंधसुमनोमालाधरो यः प्रभुः
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 4 ॥

एतद्दिव्यपदं ममास्ति भुवि तत्संपश्यतेत्यादरा-
-द्भक्तेभ्यः स्वकरेण दर्शयति यद्दृष्ट्याऽतिसौख्यं गतः ।
एतद्भक्तिमतो महानपि भवांभोधिर्नदीति स्पृशन्
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 5 ॥

यः स्वामी सरसस्तटे विहरतो श्रीस्वामिनाम्नः सदा
सौवर्णालयमंदिरो विधिमुखैर्बर्हिर्मुखैः सेवितः ।
यः शत्रून् हनयन् निजानवति च श्रीभूवराहात्मकः
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 6 ॥

यो ब्रह्मादिसुरान् मुनींश्च मनुजान् ब्रह्मोत्सवायागतान्
दृष्ट्वा हृष्टमना बभूव बहुशस्तैरर्चितः संस्तुतः ।
तेभ्यो यः प्रददाद्वरान् बहुविधान् लक्ष्मीनिवासो विभुः
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 7 ॥

यो देवो भुवि वर्तते कलियुगे वैकुंठलोकस्थितो
भक्तानां परिपालनाय सततं कारुण्यवारां निधिः ।
श्रीशेषाख्यमहींध्रमस्तकमणिर्भक्तैकचिंतामणिः
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 8 ॥

शेषाद्रिप्रभुमंगलाष्टकमिदं तुष्टेन यस्येशितुः
प्रीत्यर्थं रचितं रमेशचरणद्वंद्वैकनिष्ठावता ।
वैवाह्यादिशुभक्रियासु पठितं यैः साधु तेषामपि
श्रीमद्वेंकटभूधरेंद्ररमणः कुर्याद्धरिर्मंगलम् ॥ 9 ॥

इति श्री वेंकटेश मंगलाष्टकम् ।

शिव नामावल्यष्टकं (नामावली अष्टकं)
सरस्वती अष्टकम्
संकटमोचन हनुमानाष्टक
कालिका अष्टकम
लक्ष्मी अष्टकम्
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