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श्री गणेश स्तोत्रस्तोत्र

श्री काशी विश्वनाथ मंगल स्तोत्र

Sanatani
Last updated: जनवरी 29, 2026 6:43 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 29, 2026
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श्री काशी विश्वनाथ मंगल स्तोत्र – Kashi Vishvanath Mangal Stotra



।। अथ श्रीविश्वनाथमङ्गलस्तोत्रम् ।।

गङ्गाधरं शशिकिशोरधरं त्रिलोकी-
रक्षाधरं निटिलचन्द्रधरं त्रिधारम् ।

भस्मावधूलनधरं गिरिराजकन्या-
दिव्यावलोकनधरं वरदं प्रपद्ये ॥ १॥

काशीश्वरं सकलभक्तजनातिहारं
विश्वेश्वरं प्रणतपालनभव्यभारम् ।

रामेश्वरं विजयदानविधानधीरं
गौरीश्वरं वरदहस्तधरं नमामः ॥ २॥

गङ्घोत्तमाङ्ककलितं ललितं विशालं
तं मङ्गलं गरलनीलगलं ललामम् ।

श्रीमुण्डमाल्यवलयोज्ज्वलमञ्जुलीलं
लक्ष्मीशवरार्चितपदाम्बुजमाभजामः ॥ ३॥

दारिव्र्यदुःखदहनं कमनं सुराणां
दीनार्तिदावदहनं दमनं रिपूणाम् ।

दानं श्रियां प्रणमनं भुवनाधिपानां
मानं सतां वृषभवाहनमानमामः ॥ ४॥

श्रीकृष्णचन्द्रशरणं रमणं भवान्याः
शशवत्प्रपन्नभरणं धरणं धरायाः ।

संसारभारहरणं करुणं वरेण्यं
संतापतापकरणं करवै शरण्यम् ॥ ५॥

चण्डीपिचण्डिलवितुण्डधृताभिषेकं
श्रीकार्तिकेयकलनृत्यकलावलोकम् ।

नन्दीशवरास्यवरवाद्यमहोत्सवाढ्यं
सोल्लासहासगिरिजं गिरिशं तमीडे ॥ ६॥

श्रीमोहिनीनिविडरागभरोपगूढं
योगेश्वरेशवरहदम्बुजवासरासम् ।

सम्मोहनं गिरिसुताञ्चितचन्द्रचूडं
श्रीविश्वनाथमधिनाथमुपैमि नित्यम् ॥ ७॥

आपद् विनश्यति समृध्यति सर्वसम्पद्
विघ्नाः प्रयान्ति विलयं शुभमभ्युदेति ।

योग्याङ्गनाप्तिरतुलोत्तमपुत्रलाभो
विश्वेश्वरस्तवमिमं पठतो जनस्य ॥ ८॥

वन्दी विमुक्तिमधिगच्छति तूर्णमेति
स्वास्थ्यं रुजार्दित उपैति गृहं प्रवासी ।

विद्यायशोविजय इष्टसमस्तलाभः
सम्पद्यतेऽस्य पठनात् स्तवनस्य सर्वम् ॥ ९॥

कन्या वरं सुलभते पठनादमुष्य
स्तोत्रस्य धान्यधनवृद्धिसुखं समिच्छन् ।

किं च प्रसीदति विभुः परमो दयालुः
श्रीविश्वनाथ इह सम्भजतोऽस्य साम्बः ॥ १०॥

काशीपीठाधिनाथेन शङ्कराचार्यभिक्षुणा ।
महेश्वरेण ग्रथिता स्तोत्रमाला शिवारपिता ॥ ११॥

॥ इति काशीपीठाधीश्वर शङ्कराचार्यश्रीस्वामिमहेश्वरानन्दसरस्वती विरचितं श्रीविश्वनाथमङ्गलस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

 

शिव तांडव स्तोत्रम्
बुध कवचम्
दशाक्षरमन्त्र स्तोत्रम्
विष्णु पादादि केशांत वर्णन स्तोत्रं
कमला स्तोत्रम्
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