31 C
Gujarat
सोमवार, मार्च 9, 2026

जगतमें स्वारथके सत्र मीत – Jagatmen Svarathake Satra Meet

Post Date:

 जगतमें स्वारथके सत्र मीत

Jagatmen Svarathake Satra Meet Lyrics

 

जगतमें स्वारथके सत्र मीत । जबलगि जासौं रहत स्वार्थ कछु, तबलगि तासौं प्रीत।।

मात-पिता जेहि सुतहित निस-दिन, सहत कष्ट-समुदाई। बृद्ध भये स्वारथ जब नास्यो, सोइ सुत मृत्यु मनाई ॥

भोगजोग जबलौं जुवती स्त्री, तबलौं अतिही पियारी । बिधिबस सोइ जर्जाद भई व्याधिवस, तुरत चहत तेहि मारी प्रियतम॥

प्राननाथ कहि कहि जा अतुलित प्रीति दिखाबत सोइ नारी रचि आन पुरुष सँग, पतिकी मृत्यु मनावत ।।

कल नहिं परत मित्र बिनु छिनभर, संग रहे, सँग खाये । बिनस्यं । धन, स्वारथ जब छूट्यो, मुख बतरात लजाये ।।

साँचो सुहृद, अकारन प्रेमी, राम एक जग माँहीं । तेहि सँग जोरहु प्रीति निरंतर, जग कोउ अपनो नाहीं ।।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सरस्वती मां की आरती

सरस्वती मां(Saraswati Mata Aarti) को ज्ञान, संगीत, कला और...

गोकुल अष्टकं

गोकुल अष्टकं - Shri Gokul Ashtakamश्रीमद्गोकुलसर्वस्वं श्रीमद्गोकुलमंडनम् ।श्रीमद्गोकुलदृक्तारा श्रीमद्गोकुलजीवनम्...

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्

अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम्अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र...

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक...
error: Content is protected !!