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Reading: अनन्त कृष्ण अष्टकम्
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अष्टकम्कृष्ण स्तोत्र

अनन्त कृष्ण अष्टकम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 3, 2026 4:56 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 3, 2026
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Ananta Krishna Ashtakam In Hindi

अनन्त कृष्ण अष्टकम्(Ananta Krishna Ashtakam) भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति में रचित एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जो संस्कृत भाषा में लिखा गया है। यह स्तोत्र उनके अनन्त स्वरूप, उनकी दिव्यता और लीलाओं का गुणगान करता है। “अष्टकम्” शब्द का अर्थ होता है “आठ श्लोकों का संग्रह,” और प्रत्येक श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन किया गया है।

Contents
  • Ananta Krishna Ashtakam In Hindi
  • अनन्त कृष्ण अष्टकम् लेखक एवं रचना का महत्त्व
  • अनन्त कृष्ण अष्टकम् अर्थ एवं उद्देश्य
  • श्लोकों का संक्षिप्त भावार्थ
  • अनन्त कृष्ण अष्टकम् के लाभ
  • अनन्त कृष्ण अष्टकम् पाठ का समय और विधि
  • अनन्त कृष्ण अष्टकम्
  • FAQs for Ananta Krishna Ashtakam
    • अनन्त कृष्ण अष्टकम् क्या है?
    • अनन्त कृष्ण अष्टकम् की रचना किसने की?
    • अनन्त कृष्ण अष्टकम् का पाठ करने के लाभ क्या हैं?
    • अनन्त कृष्ण अष्टकम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
    • अनन्त कृष्ण अष्टकम् का अर्थ और महत्व क्या है?

अनन्त कृष्ण अष्टकम् लेखक एवं रचना का महत्त्व

इस अष्टकम् की रचना का श्रेय प्राचीन संतों और भक्त कवियों को दिया जाता है। हालांकि इसका सटीक लेखक स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह श्रीकृष्ण-भक्ति परंपरा का एक अमूल्य हिस्सा माना जाता है। यह स्तोत्र वैष्णव संप्रदाय के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसमें श्रीकृष्ण के गुण, स्वरूप और अनन्तता का वर्णन बड़ी ही काव्यात्मक शैली में किया गया है।

अनन्त कृष्ण अष्टकम् अर्थ एवं उद्देश्य

अनन्त कृष्ण अष्टकम् का मुख्य उद्देश्य भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति की ओर प्रेरित करना है। इसमें श्रीकृष्ण को अनन्त और सर्वव्यापी बताया गया है। यह स्तोत्र उनकी विभिन्न लीलाओं जैसे माखन चुराने, गोपियों के साथ रासलीला, और कंस का वध करने जैसे प्रसंगों का स्मरण कराता है।

श्लोकों का संक्षिप्त भावार्थ

  1. पहले श्लोक में श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का वर्णन है। उन्हें गोपियों के प्रेमास्पद और गोकुल के रक्षक के रूप में चित्रित किया गया है।
  2. दूसरे श्लोक में भगवान को जगत के पालनकर्ता, धर्म के रक्षक और भक्तों के संकटहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  3. तीसरे श्लोक में उनके बाल रूप और लीलाओं का वर्णन है, जिसमें वे माखन चुराने और यशोदा मां से डरने का भाव प्रकट करते हैं।
  4. चौथे श्लोक में उनके शौर्य और पराक्रम का गुणगान किया गया है, जैसे कंस, शेषनाग और असुरों का वध।
  5. पाँचवें श्लोक में उनकी करुणा, दया और भक्तवत्सलता को वर्णित किया गया है।
  6. छठे श्लोक में गीता के उपदेशक के रूप में उनकी भूमिका का उल्लेख है।
  7. सातवें श्लोक में उनके अनन्त और शाश्वत स्वरूप की व्याख्या है।
  8. आठवें श्लोक में भक्त को श्रीकृष्ण की शरण में जाने की प्रेरणा दी गई है और उनका ध्यान करने का आग्रह किया गया है।

अनन्त कृष्ण अष्टकम् के लाभ

  1. भक्ति की वृद्धि: इस स्तोत्र का नियमित पाठ भक्त के मन में श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति उत्पन्न करता है।
  2. मन की शांति: श्रीकृष्ण की लीलाओं और गुणों का स्मरण करने से मन को शांति और संतोष मिलता है।
  3. सकारात्मक ऊर्जा: यह स्तोत्र भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करता है।
  4. संकटों का निवारण: यह माना जाता है कि अनन्त कृष्ण अष्टकम् के पाठ से जीवन के कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

अनन्त कृष्ण अष्टकम् पाठ का समय और विधि

  1. प्रातःकाल या सायंकाल में इस स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  2. पाठ से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  3. भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाएं और भक्ति-भाव से स्तोत्र का पाठ करें।
  4. पाठ के पश्चात श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री या तुलसी पत्र अर्पित करें।

अनन्त कृष्ण अष्टकम्

श्रीभूमिनीलापरिसेव्यमानमनन्तकृष्णं वरदाख्यविष्णुम्।
अघौघविध्वंसकरं जनानामघंहरेशं प्रभजे सदाऽहम्।
तिष्ठन् स्वधिष्ण्ये परितो विपश्यन्नानन्दयन् स्वानभिराममूर्त्या।
योऽघंहरग्रामजनान् पुनीते ह्यनन्तकृष्णं वरदेशमीडे।
भक्तान् जनान् पालनदक्षमेकं विभुं श्रियाऽऽश्लिष्यतनुं महान्तम्।
सुपर्णपक्षोपरिरोचमानमनन्तकृष्णं वरदेशमीडे।
सूर्यस्य कान्त्या सदृशैर्विराजद्रत्नैः समालङ्कृतवेषभूषम्।
तमो विनाशाय मुहुर्मुहुस्त्वामनन्तकृष्णं वरदेशमीडे।
अनन्तसंसारसमुद्रतारनौकायितं श्रीपतिमाननाब्जम्।
अनन्तभक्तैः परिदृश्यमानमनन्तकृष्णं वरदेशमीडे।
नमन्ति देवाः सततं यमेव किरीटिनं गदिनं चक्रिणं तम्।
वैखानसैः सूरिभिरर्चयन्तमनन्तकृष्णं वरदेशमीडे।
तनोति देवः कृपया वरान् यश्चिरायुषं भूतिमनन्यसिद्धिम्।
तं देवदेवं वरदानदक्षमनन्तकृष्णं वरदेशमीडे।
कृष्णं नमस्कृत्य महामुनीन्द्राः स्वानन्दतुष्टा विगतान्यवाचः।
तं स्वानुभूत्यै भवपाद्मवन्द्यमनन्तकृष्णं वरदेशमीडे।
अनन्तकृष्णस्य कृपावलोकादघंहरग्रामजदीक्षितेन।
सुसूक्तिमालां रचितां मनोज्ञां गृह्णातु देवो वरदेशविष्णुः।

FAQs for Ananta Krishna Ashtakam

  1. अनन्त कृष्ण अष्टकम् क्या है?

    अनन्त कृष्ण अष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण के अद्वितीय और अनन्त स्वरूप की महिमा का वर्णन करता है। इसे भगवान कृष्ण के भक्तों द्वारा उनकी स्तुति और प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। इसमें आठ श्लोक होते हैं जो उनके दिव्य गुणों और लीलाओं का गुणगान करते हैं।

  2. अनन्त कृष्ण अष्टकम् की रचना किसने की?

    अनन्त कृष्ण अष्टकम् के रचयिता की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसे प्राचीन वैदिक साहित्य से संबंधित माना जाता है और इसकी रचना किसी महान ऋषि या भक्त द्वारा की गई हो सकती है।

  3. अनन्त कृष्ण अष्टकम् का पाठ करने के लाभ क्या हैं?

    अनन्त कृष्ण अष्टकम् का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, भक्त को भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह स्तोत्र आत्मा की शुद्धि, भक्ति की वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।

  4. अनन्त कृष्ण अष्टकम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

    अनन्त कृष्ण अष्टकम् का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन प्रातःकाल और संध्या समय को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसे शुद्ध मन और शांत वातावरण में, भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर, भक्ति-भाव से करना चाहिए।

  5. अनन्त कृष्ण अष्टकम् का अर्थ और महत्व क्या है?

    अनन्त कृष्ण अष्टकम् का अर्थ भगवान श्रीकृष्ण के अनन्त स्वरूप और उनके गुणों का वर्णन करना है। यह भक्तों को यह समझने में मदद करता है कि भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप सीमित नहीं है और वे संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हैं। इसका महत्व भक्तों के लिए आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति का मार्गदर्शन करना है।

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