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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > शिव स्तोत्र > श्री कालभैरव स्तोत्रम् (Kaal Bhairav Ashtakam)
स्तोत्रशिव स्तोत्र

श्री कालभैरव स्तोत्रम् (Kaal Bhairav Ashtakam)

Sanatani
Last updated: अप्रैल 5, 2026 5:18 अपराह्न
Sanatani
Published: अप्रैल 5, 2026
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श्री कालभैरव स्तोत्रम् (Kaal Bhairav Ashtakam)

अथ संकल्पः
ॐ ऐं शिव शक्ति सायि सिद्धगुरु श्री रमणानंद महर्षि गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री दश महाविद्या देवताभ्यो नमः
ॐ श्री दश भैरव देवताभ्यो नमः

अथ चतुर्वेद ज्ञान ब्रह्म सिद्धगुरु श्री रमणानंद महर्षि विरचित
चतुर्विंशति श्लोकात्मक श्री काल भैरव स्तोत्रं

शिवाय परमात्मने महाते पापनाशिने ।
नीललोहितदेहाय भैरवाय नमो नमः ॥

ब्रह्म शिरो विखंडिने ब्रह्म गर्व निपातिने ।
कालकालाय रुद्राय नमोभैरव शूलिने ॥

विष्णु मोह विनाशिने विष्णु सेवित शंभवे ।
विष्णु कीर्तित सोमाय कालभैरव ते नमः ॥

सर्वभूषित सर्वेशं चतुर्भुजं सुतेजसे ।
शिव तेजोद्भवं हरं श्री भैरवीपतिं भजे ॥

सद्रूपं सकलेश्वरं चिद्र्रूपं चिन्मयेश्वरम् ।
तपोवंतं महानंदं महाभैरव ते नमः ॥

नीलाय नीलकंठाय अनंताय परात्मने ।
भीमाय दुष्टमर्दिने कालभैरव ते नमः ॥

नमस्ते सर्वबीजाय नमस्ते सुखदायिने ।
नमस्ते दुःखनाशिने भैरवाय नमो नमः ॥

सुंदरं करुणानिधिं पावनं करुणामयम् ।
अघोरं करुणासिंधुं श्रिभैरवं नमाम्यहम् ॥

जटाधरं त्रिलोचनं जगत् पतिं वृषध्वजम् ।
जगन्मूर्तिं कपालिनिं श्रीभैरवं नंमामितम् ॥

असितांगः कपालश्च उन्मत्तः भीषणो रुरुः ।
क्रोधः संहार चंडश्च अष्टभैरव ते नमः ॥

कौमारी वैश्णवी चंडी इंद्राणी ब्राह्मणीसुधा ।
अष्टमातृक चामुंडा श्री वाराही महेश्वरी ॥

काशी क्षेत्र सदा स्थितं काशी क्षेत्र सुपालकम् ।
काशी जन समाराध्यं नमामि कालभैरवम् ॥

अष्टभैरव स्रष्टारं अष्टमातृ सुपूजितम् ।
सर्व भैरव नाथं च श्री काल भैरवं भजे ॥

विष्णु कीर्तित वेदेशं सर्व ऋषि नमस्कृतम् ।
पंच पातक नाशकं श्री काल भैरवं भजे ॥

सम्मोहन महारूपं चेतुर्वेद प्रकीर्तितम् ।
विराट् पुरुष महेशं श्री काल भैरवं भजे ॥

असितांगः चतुर्भुजः ब्रह्मणी मतृकापतिः ।
श्वेतवर्णो हंसारूढः प्राक् दिशा रक्षकः शिवः ॥

श्रीरुरुं वृषभारूढं आग्नेय दिक् सुपालकम् ।
नीलवर्णं महाशूरं महेश्वरीपतिं भजे ॥

मयूर वाहनः चंडः कौमारी मातृका प्रियः ।
रक्तवर्णो महाकालः दक्षिणा दिक् सुरक्षकः ॥

गरुड वाहनः क्रोधः वैष्णवी मातृका प्रभुः ।
ईशानो नीलवर्णश्च निरुती दिक् सुरक्षकः ॥

उन्मत्तः खड्गधारी च अश्वारूढो महोदरः ।
श्री वाराही मनोहरः पश्चिम दिक् सुरक्षकः ॥

कपालो हस्तिवाहनः इंद्राणी मातृकापतिः ।
स्वर्ण वर्णो महातेजाः वायव्यदिक् सुरक्षकः ॥

भीषणः प्रेतवाहनः चामुंडा मातृका विभुः ।
उत्तरदिक् सुपालकः रक्तवर्णो भयंकरः ॥

संहारः सिंहवाहनः श्री चंडी मातृकापतिः ।
अशभुजः प्राक्रमी ईशान्यदिक् सुपालकः ॥

तंत्र योगीश्वरेश्वरं तंत्र विद्या प्रदायकम् ।
ज्ञानदं सिद्धिदं शिवं मोक्षदं भैरवं भजे ॥

इति चतुर्वेद ज्ञान ब्रह्म सिद्धगुरु श्री रमणानंद महर्षि विरचित
चतुर्विंशति श्लोकात्मक श्री काल भैरव स्तोत्रम् ॥

नृसिंह कवच
बाल मुकुन्दाष्टकम्
भवानी अष्टकम्
श्री हनुमान बाहुक
गोदावरी स्तोत्रम्
TAGGED:Kaal Bhairav Ashtakamश्री काल भैरव स्तोत्रम्
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