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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > अष्टकम् > शरभेशाष्टकम्
अष्टकम्

शरभेशाष्टकम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 3, 2026 6:05 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 1, 1970
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शरभेशाष्टकम्

श्री शिव उवाच

शृणु देवि महागुह्यं परं पुण्यविवर्धनं .
शरभेशाष्टकं मंत्रं वक्ष्यामि तव तत्त्वतः ॥

ऋषिन्यासादिकं यत्तत्सर्वपूर्ववदाचरेत् .
ध्यानभेदं विशेषेण वक्ष्याम्यहमतः शिवे ॥

ध्यानं

ज्वलनकुटिलकेशं सूर्यचंद्राग्निनेत्रं
निशिततरनखाग्रोद्धूतहेमाभदेहम् ।
शरभमथ मुनींद्रैः सेव्यमानं सितांगं
प्रणतभयविनाशं भावयेत्पक्षिराजम् ॥

अथ स्तोत्रं

देवादिदेवाय जगन्मयाय शिवाय नालीकनिभाननाय ।
शर्वाय भीमाय शराधिपाय नमोऽस्तु तुभ्यं शरभेश्वराय ॥ 1 ॥

हराय भीमाय हरिप्रियाय भवाय शांताय परात्पराय ।
मृडाय रुद्राय विलोचनाय नमोऽस्तु तुभ्यं शरभेश्वराय ॥ 2 ॥

शीतांशुचूडाय दिगंबराय सृष्टिस्थितिध्वंसनकारणाय ।
जटाकलापाय जितेंद्रियाय नमोऽस्तु तुभ्यं शरभेश्वराय ॥ 3 ॥

कलंककंठाय भवांतकाय कपालशूलात्तकरांबुजाय ।
भुजंगभूषाय पुरांतकाय नमोऽस्तु तुभ्यं शरभेश्वराय ॥ 4 ॥

शमादिषट्काय यमांतकाय यमादियोगाष्टकसिद्धिदाय ।
उमाधिनाथाय पुरातनाय नमोऽस्तु तुभ्यं शरभेश्वराय ॥ 5 ॥

घृणादिपाशाष्टकवर्जिताय खिलीकृतास्मत्पथि पूर्वगाय ।
गुणादिहीनाय गुणत्रयाय नमोऽस्तु तुभ्यं शरभेश्वराय ॥ 6 ॥

कालाय वेदामृतकंदलाय कल्याणकौतूहलकारणाय ।
स्थूलाय सूक्ष्माय स्वरूपगाय नमोऽस्तु तुभ्यं शरभेश्वराय ॥ 7 ॥

पंचाननायानिलभास्कराय पंचाशदर्णाद्यपराक्षयाय ।
पंचाक्षरेशाय जगद्धिताय नमोऽस्तु तुभ्यं शरभेश्वराय ॥ 8 ॥

इति श्री शरभेशाष्टकम् ॥

जगन्नाथाष्टकम्
कालिका अष्टकम
कमला अष्टकम्
गोकुलेश अष्टकम
मधुराष्टकम्
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