By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: अष्टलक्ष्मी स्तुति
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • सनातनज्ञान
  • गीतकाव्य
  • आरोग्य
  • ज्योतिष
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > लक्ष्मी स्तोत्र > अष्टलक्ष्मी स्तुति
लक्ष्मी स्तोत्रस्तोत्र

अष्टलक्ष्मी स्तुति

Sanatani
Last updated: जनवरी 28, 2026 6:45 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 28, 2026
Share
SHARE

अष्टलक्ष्मी स्तुति

अष्टलक्ष्मी स्तुति एक अत्यंत प्रभावशाली और लोकप्रिय स्तोत्र है जो देवी लक्ष्मी जी के आठ स्वरूपों (अष्टलक्ष्मी) की स्तुति के लिए रचित है। यह स्तुति न केवल भौतिक समृद्धि, बल्कि आध्यात्मिक, मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

Contents
  • अष्टलक्ष्मी स्तुति
  • अष्टलक्ष्मी कौन-कौन हैं?
  • अष्टलक्ष्मी स्तुति की रचना
  • अष्टलक्ष्मी स्तुति
  • अष्टलक्ष्मी स्तुति का महत्व
  • कब करें अष्टलक्ष्मी स्तुति का पाठ?
  • पाठ विधि और नियम
  • अष्टलक्ष्मी स्तुति के लाभ

अष्टलक्ष्मी स्तुति देवी लक्ष्मी के आठ प्रमुख रूपों की भक्ति और स्तुति के लिए रचित एक संस्कृत प्रार्थना है। यह स्तुति विशेष रूप से दक्षिण भारत में अत्यधिक प्रचलित है, परंतु अब पूरे भारतवर्ष में इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है।

अष्टलक्ष्मी कौन-कौन हैं?

देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूपों को सामूहिक रूप से अष्टलक्ष्मी कहा जाता है। ये सभी स्वरूप जीवन के विभिन्न पहलुओं में धन, शक्ति, सफलता, विद्या और सौभाग्य प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।

क्रमलक्ष्मी स्वरूपअर्थ/आशीर्वाद
1आदि लक्ष्मीआध्यात्मिक समृद्धि व मुक्ति
2धन लक्ष्मीधन, संपत्ति, सोना-चाँदी
3धैर्य लक्ष्मीधैर्य, शक्ति और साहस
4गज लक्ष्मीऐश्वर्य और सामाजिक प्रतिष्ठा
5संतान लक्ष्मीसंतान सुख और वंश वृद्धि
6विद्या लक्ष्मीज्ञान, बुद्धि और शिक्षा
7विजय लक्ष्मीसफलता, विजय और यश
8धान्य लक्ष्मीअन्न, कृषि और पोषण

अष्टलक्ष्मी स्तुति की रचना

इस स्तुति की रचना संस्कृत में की गई है और यह श्लोकों के रूप में देवी लक्ष्मी के आठों स्वरूपों की प्रशंसा करती है। कुछ लोकप्रिय रचनाएँ श्री उत्तानपदाचार्य या शंकराचार्य से भी संबंधित मानी जाती हैं। सबसे प्रसिद्ध पाठ “अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्” है जो दक्षिण भारत के वैष्णव परंपरा से जुड़ा है।

अष्टलक्ष्मी स्तुति

विष्णोः पत्नीं कोमलां कां मनोज्ञां
पद्माक्षीं तां मुक्तिदानप्रधानाम्।
शान्त्याभूषां पङ्कजस्थां सुरम्यां
सृष्ट्याद्यन्तामादिलक्ष्मीं नमामि।

शान्त्या युक्तां पद्मसंस्थां सुरेज्यां
दिव्यां तारां भुक्तिमुक्तिप्रदात्रीम्।
देवैरर्च्यां क्षीरसिन्ध्वात्मजां तां
धान्याधानां धान्यलक्ष्मीं नमामि।

मन्त्रावासां मन्त्रसाध्यामनन्तां
स्थानीयांशां साधुचित्तारविन्दे।
पद्मासीनां नित्यमाङ्गल्यरूपां
धीरैर्वन्द्यां धैर्यलक्ष्मीं नमामि।

नानाभूषारत्नयुक्तप्रमाल्यां
नेदिष्ठां तामायुरानन्ददानाम्।
श्रद्धादृश्यां सर्वकाव्यादिपूज्यां
मैत्रेयीं मातङ्गलक्ष्मीं नमामि।

मायायुक्तां माधवीं मोहमुक्तां
भूमेर्मूलां क्षीरसामुद्रकन्याम्।
सत्सन्तानप्राप्तिकर्त्रीं सदा मां
सत्त्वां तां सन्तानलक्ष्मीं नमामि।

निस्त्रैगुण्यां श्वेतपद्मावसीनां
विश्वादीशां व्योम्नि राराज्यमानाम्।
युद्धे वन्द्यव्यूहजित्यप्रदात्रीं
शत्रूद्वेगां जित्यलक्ष्मीं नमामि।

विष्णोर्हृत्स्थां सर्वभाग्यप्रदात्रीं
सौन्दर्याणां सुन्दरीं साधुरक्षाम्।
सङ्गीतज्ञां काव्यमालाभरण्यां
विद्यालक्ष्मीं वेदगीतां नमामि।

सम्पद्दात्रीं भार्गवीं सत्सरोजां
शान्तां शीतां श्रीजगन्मातरं ताम्।
कर्मेशानीं कीर्तिदां तां सुसाध्यां
देवैर्गीतां वित्तलक्ष्मीं नमामि।

स्तोत्रं लोको यः पठेद् भक्तिपूर्णं
सम्यङ्नित्यं चाष्ष्टलक्ष्मीः प्रणम्य।
पुण्यं सर्वं देहजं सर्वसौख्यं
भक्त्या युक्तो मोक्षमेत्यन्तकाले।

अष्टलक्ष्मी स्तुति का महत्व

  1. धन-संपत्ति की वृद्धि: विशेष रूप से धन लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, और धान्य लक्ष्मी की स्तुति आर्थिक समृद्धि लाती है।
  2. विद्या और ज्ञान की प्राप्ति: विद्यार्थी और विद्वान विद्या लक्ष्मी की कृपा से बुद्धि और स्मरण शक्ति पाते हैं।
  3. संतान सुख और वैवाहिक जीवन: संतान लक्ष्मी और विजय लक्ष्मी दांपत्य जीवन और परिवार में सुखद वातावरण बनाए रखती हैं।
  4. कठिनाईयों में धैर्य और विजय: धैर्य लक्ष्मी और विजय लक्ष्मी कठिन समय में संयम और सफलता प्रदान करती हैं।
  5. आध्यात्मिक उन्नति: आदि लक्ष्मी की स्तुति से आत्मा को शांति और मोक्ष का मार्ग मिलता है।

कब करें अष्टलक्ष्मी स्तुति का पाठ?

  • शुक्रवार: लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ दिन।
  • पूर्णिमा: पूर्ण चंद्रमा की रात को लक्ष्मी कृपा अधिक होती है।
  • दीपावली: विशेष रूप से धनतेरस से लेकर लक्ष्मी पूजन तक।
  • नवरात्रि: विशेष रूप से अष्टमी और नवमी को।

पाठ विधि और नियम

  1. सुबह स्नान करके शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. दीपक, पुष्प, तिलक, चंदन आदि से पूजन करें।
  3. शांत मन से प्रत्येक लक्ष्मी स्वरूप की ध्यानपूर्वक स्तुति करें।
  4. अंत में लक्ष्मी माता से संपूर्ण जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करें।

अष्टलक्ष्मी स्तुति के लाभ

  • आर्थिक संकटों से मुक्ति
  • संतान प्राप्ति और पारिवारिक सुख
  • व्यापार और करियर में उन्नति
  • मानसिक शांति और साहस की प्राप्ति
  • समाज में प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

शत रुद्रीयम्
नरसिम्हा पंचरत्न स्तोत्रम्
देवी क्षमापण स्तोत्रम्
श्री गणेश स्तोत्र नारद उवाच
भारती भावना स्तोत्रम्
TAGGED:Ashtalakshmi Stuti
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow
Popular News
अष्टकम्शिव स्तोत्रस्तोत्र

बिल्वाष्टकम्

Sanatani
Sanatani
जनवरी 2, 2026
ऋग्वेद हिंदी में
नर्मदा अष्टकम
नवदुर्गा स्तुति
मारुती स्तोत्र

Categories

Reading: अष्टलक्ष्मी स्तुति
Share

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?