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Reading: लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्
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लक्ष्मी स्तोत्रस्तोत्र

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 28, 2026 6:43 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 28, 2026
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लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् (Lakshmi Sharanagati Stotram) एक अत्यंत श्रद्धापूर्ण और भावनात्मक स्तोत्र है जो कि संपूर्ण भक्ति और आत्मसमर्पण की भावना से ओतप्रोत है। इस स्तोत्र में भक्त श्री लक्ष्मी माता की शरण में आकर उन्हें अपनी एकमात्र आश्रय, रक्षक, और उद्धारकर्ता मानता है।

Contents
  • लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्
    • लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् का स्वरूप:
  • लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्
  • पाठ विधि

इस स्तोत्र की रचना श्री वेदांत देशिक (Vedanta Desika) ने की थी, जो कि श्रीवैष्णव संप्रदाय के महान आचार्य थे। उन्होंने यह स्तोत्र तमिलनाडु के श्रीरंगम में रंगनाथ स्वामी मंदिर के पास स्थित श्री रंगनायकि लक्ष्मी देवी को समर्पित करके लिखा था।

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम् का स्वरूप:

  • भाषा: संस्कृत
  • शैली: स्तोत्र (भावनात्मक और भक्तिपूर्ण शैली)
  • छंद: श्लोकों में रचित
  • शरणागत भाव: प्रत्येक श्लोक में “त्वत्पादमूलं शरणं प्रपद्ये” (मैं आपके चरणकमलों की शरण में आता हूँ) वाक्य से समर्पण की अभिव्यक्ति होती है।

लक्ष्मी शरणागति स्तोत्रम्

जलधीशसुते जलजाक्षवृते जलजोद्भवसन्नुते दिव्यमते।
जलजान्तरनित्यनिवासरते शरणं शरणं वरलक्ष्मि नमः।
प्रणताखिलदेवपदाब्जयुगे भुवनाखिलपोषण श्रीविभवे।
नवपङ्कजहारविराजगले शरणं शरणं गजलक्ष्मि नमः।
घनभीकरकष्टविनाशकरि निजभक्तदरिद्रप्रणाशकरि।
ऋणमोचनि पावनि सौख्यकरि शरणं शरणं धनलक्ष्मि नमः।
अतिभीकरक्षामविनाशकरि जगदेकशुभङ्करि धान्यप्रदे।
सुखदायिनि श्रीफलदानकरि शरणं शरणं शुभलक्ष्मि नमः।
सुरसङ्घशुभङ्करि ज्ञानप्रदे मुनिसङ्घप्रियङ्करि मोक्षप्रदे।
नरसङ्घजयङ्करि भाग्यप्रदे शरणं शरणं जयलक्ष्मि नमः।
परिसेवितभक्तकुलोद्धरिणि परिभावितदासजनोद्धरिणि।
मधुसूदनमोहिनि श्रीरमणि शरणं शरणं तव लक्ष्मि नमः।
शुभदायिनि वैभवलक्ष्मि नमो वरदायिनि श्रीहरिलक्ष्मि नमः।
सुखदायिनि मङ्गललक्ष्मि नमो शरणं शरणं सततं शरणम्।
वरलक्ष्मि नमो धनलक्ष्मि नमो जयलक्ष्मि नमो गजलक्ष्मि नमः।
जय षोडशलक्ष्मि नमोऽस्तु नमो शरणं शरणं सततं शरणम्।
देवि विष्णुविलासिनि शुभकरि दीनार्तिविच्छेदिनि
सर्वैश्वर्यप्रदायिनि सुखकरि दारिद्र्यविध्वंसिनि।
नानाभूषितभूषणाङ्गि जननि क्षीराब्धिकन्यामणि
देवि भक्तसुपोषिणि वरप्रदे लक्ष्मि सदा पाहि नः।
सद्यःप्रफुल्लसरसीरुहपत्रनेत्रे
हारिद्रलेपितसुकोमलश्रीकपोले।
पूर्णेन्दुबिम्बवदने कमलान्तरस्थे
लक्ष्मि त्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
भक्तान्तरङ्गगतभावविधे नमस्ते
रक्ताम्बुजातनिलये स्वजनानुरक्ते।
मुक्तावलीसहितभूषणभूषिताङ्गि
लक्ष्मि त्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
क्षामादितापहारिणि नवधान्यरूपे
अज्ञानघोरतिमिरापहज्ञानरूपे।
दारिद्र्यदुःखपरिमर्दितभाग्यरूपे
लक्ष्मि त्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
चम्पालताभदरहासविराजवक्त्रे
बिम्बाधरेषु कपिकाञ्चितमञ्जुवाणि।
श्रीस्वर्णकुम्भपरिशोभितदिव्यहस्ते
लक्ष्मि त्वत्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
स्वर्गापवर्गपदविप्रदे सौम्यभावे
सर्वागमादिविनुते शुभलक्षणाङ्गि।
नित्यार्चिताङ्घ्रियुगले महिमाचरित्रे
लक्ष्मि त्वत्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
जाज्ज्वल्यकुण्डलविराजितकर्णयुग्मे
सौवर्णकङ्कणसुशोभितहस्तपद्मे।
मञ्जीरशिञ्जितसुकोमलपावनाङ्घ्रे
लक्ष्मि त्वत्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
सर्वापराधशमनि सकलार्थदात्रि
पर्वेन्दुसोदरि सुपर्वगणाभिरक्षिन्।
दुर्वारशोकमयभक्तगणावनेष्टे
लक्ष्मि त्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
बीजाक्षरत्रयविराजितमन्त्रयुक्ते
आद्यन्तवर्णमयशोभितशब्दरूपे।
ब्रह्माण्डभाण्डजननि कमलायताक्षि
लक्ष्मि त्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
श्रीदेवि बिल्वनिलये जय विश्वमातः
आह्लाददात्रि धनधान्यसुखप्रदात्रि।
श्रीवैष्णवि द्रविणरूपिणि दीर्घवेणि
लक्ष्मि त्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
आगच्छ तिष्ठ तव भक्तगणस्य गेहे
सन्तुष्टपूर्णहृदयेन सुखानि देहि।
आरोग्यभाग्यमकलङ्कयशांसि देहि
लक्ष्मि त्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।
श्रीआदिलक्ष्मि शरणं शरणं प्रपद्ये
श्रीअष्टलक्ष्मि शरणं शरणं प्रपद्ये।
श्रीविष्णुपत्नि शरणं शरणं प्रपद्ये
लक्ष्मि त्वदीयचरणौ शरणं प्रपद्ये।

पाठ विधि

  • प्रातःकाल या संध्या के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • देवी लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के समक्ष दीप जलाएं, पुष्प अर्पण करें।
  • श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र आदि के साथ इस स्तोत्र का पाठ करें।
  • शुक्रवार को विशेष रूप से इस स्तोत्र का पाठ अत्यधिक शुभ माना जाता है।
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