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सरस्वती स्तोत्रस्तोत्र

सरस्वती भुजंगा स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: फ़रवरी 11, 2026 7:01 अपराह्न
Sanatani
Published: फ़रवरी 11, 2026
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सरस्वती भुजंगा स्तोत्रम् – Saraswati Bhujanga Stotram

सदा भावयेऽहं प्रसादेन यस्याः
पुमांसो जडाः सन्ति लोकैकनाथे।
सुधापूरनिष्यन्दिवाग्रीतयस्त्वां
सरोजासनप्राणनाथे हृदन्ते।
विशुद्धार्कशोभावलर्क्षं विराज-
ज्जटामण्डलासक्तशीतांशुखण्डा।
भजाम्यर्धदोषाकरोद्यल्ललाटं
वपुस्ते समस्तेश्वरि श्रीकृपाब्धे।
मृदुभ्रूलतानिर्जितानङ्गचापं
द्युतिध्वस्तनीलारविन्दायताक्षम्।
शरत्पद्मकिञ्जल्कसङ्काशनासं
महामौक्तिकादर्शराजत्कपोलम्।
प्रवालाभिरामाधरं चारुमन्द-
स्मिताभावनिर्भर्त्सितेन्दुप्रकाशम्।
स्फुरन्मल्लिकाकुड्मलोल्लासिदन्तं
गलाभाविनिर्धूतशङ्खाभिरम्यम्।
वरं चाभयं पुस्तकं चाक्षमालां
दधद्भिश्चतुर्भिः करैरम्बुजाभैः।
सहस्राक्षकुम्भीन्द्रकुम्भोपमान-
स्तनद्वन्द्वमुक्ताघटाभ्यां विनम्रम्।
स्फुरद्रोमराजिप्रभापूरदूरी-
कृतश्यामचक्षुःश्रवःकान्तिभारम्।
गभीरत्रिरेखाविराजत्पिचण्ड-
द्युतिध्वस्तबोधिद्रुमस्निग्धशोभम्।
लसत्सूक्ष्मशुक्लाम्बरोद्यन्नितम्बं
महाकादलस्तम्बतुल्योरुकाण्डम्।
सुवृत्तप्रकामाभिरामोरुपर्व-
प्रभानिन्दितानङ्गसामुद्गकाभम्।
उपासङ्गसङ्काशजङ्घं पदाग्र-
प्रभाभर्त्सितोत्तुङ्गकूर्मप्रभावम्।
पदाम्भोजसम्भाविताशोकसालं
स्फुरच्चन्द्रिकाकुड्मलोद्यन्नखाभम्।
नमस्ते महादेवि हे वर्णरूपे
नमस्ते महादेवि गीर्वाणवन्द्ये।
नमस्ते महापद्मकान्तारवासे
समस्तां च विद्यां प्रदेहि प्रदेहि।
नमः पद्मभूवक्त्रपद्माधिवासे
नमः पद्मनेत्रादिभिः सेव्यमाने।
नमः पद्मकिञ्जल्कसङ्काशवर्णे
नमः पद्मपत्राभिरामाक्षि तुभ्यम्।
पलाशप्रसूनोपमं चारुतुण्डं
बलारातिनीलोत्पलाभं पतत्रम्।
त्रिवर्णं गलान्तं वहन्तं शुकं तं
दधत्यै महत्यै भवत्यै नमोऽस्तु।
कदम्बाटवीमध्यसंस्थां सखीभिः
मनोज्ञाभिरानन्दलीलारसाभिः।
कलस्वानया वीणया राजमानां
भजे त्वां सरस्वत्यहं देवि नित्यम्।
सुधापूर्णहैरण्यकुम्भाभिषेक-
प्रिये भक्तलोकप्रिये पूजनीये।
सनन्दादिभिर्योगिभिर्योगिनीभिः
जगन्मातरस्मन्मनः शोधय त्वम्।
अविद्यान्धकारौघमार्ताण्डदीप्त्यै
सुविद्याप्रदानोत्सुकायै शिवायै।
समस्तार्तरक्षाकरायै वरायै
समस्ताम्बिके देवि दुभ्यं नमोऽस्तु।
परे निर्मले निष्कले नित्यशुद्धे
शरण्ये वरेण्ये त्रयीमय्यनन्ते।
नमोऽस्त्वम्बिके युष्मदीयाङ्घ्रिपद्मे
रसज्ञातले सन्ततं नृत्यतां मे।
प्रसीद प्रसीद प्रसीदाम्बिके मा-
मसीमानुदीनानुकम्पावलोके।
पदाम्भोरुहद्वन्द्वमेकावलम्बं
न जाने परं किञ्चिदानन्दमूर्ते।
इतीदं भुजङ्गप्रयातं पठेद्यो
मुदा प्रातरुत्थाय भक्त्या समेतः।
स मासत्रयात्पूर्वमेवास्ति नूनं
प्रसादस्य सारस्वतस्यैकपात्रम्।

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