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नदी स्तोत्रस्तोत्र

गंगा स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 26, 2026 6:19 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 26, 2026
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गंगा स्तोत्रम्

गंगा स्तोत्रम्(Ganga Stotram) एक पवित्र और प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है, जो माँ गंगा की महिमा और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। गंगा नदी हिंदू धर्म में केवल एक नदी नहीं है, बल्कि उसे एक देवी का स्थान दिया गया है। गंगा को पापों का नाश करने वाली, मोक्षदायिनी, और जीवनदायिनी माना गया है। गंगा स्तोत्रम् का पाठ भक्तों के लिए शुद्धिकरण, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

Contents
  • गंगा स्तोत्रम्
  • गंगा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
  • गंगा स्तोत्रम् के पाठ की विधि
  • गंगा स्तोत्रम्
  • गंगा स्तोत्रम पर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs for Ganga Stotram.
    • गंगा स्तोत्रम क्या है?
    • गंगा स्तोत्रम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
    • गंगा स्तोत्रम का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
    • गंगा स्तोत्रम में कौन-कौन से श्लोक सम्मिलित हैं?
    • u003cstrongu003eगंगा स्तोत्रम का पाठ क्या केवल पवित्र नदियों के पास ही करना चाहिए?u003c/strongu003e

गंगा स्तोत्रम् का उद्देश्य माँ गंगा की महिमा का बखान करना और उनकी कृपा प्राप्त करना है। इसे प्राचीन ऋषियों और संतों ने रचा है, जो गंगा की महत्ता और उनकी दिव्य कृपा को समझते थे। यह स्तोत्र गंगा के प्रति श्रद्धा और आस्था को बढ़ाता है और भक्तों को उनकी पवित्रता का अनुभव कराता है।

गंगा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

माँ गंगा को त्रिवेणी संगम (प्रयागराज) में सरस्वती और यमुना के साथ जोड़ा जाता है, और यह स्थान हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। माना जाता है कि गंगा का जल सभी प्रकार के पापों और दोषों का नाश करता है। इसलिए लोग गंगा में स्नान को मोक्ष प्राप्ति का एक साधन मानते हैं। गंगा स्तोत्रम् के पाठ से व्यक्ति को पवित्रता और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। गंगा स्तोत्रम् का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में भी मिलता है। यह माना जाता है कि ऋषि भागीरथ ने कठोर तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर अवतरित किया था। उनकी तपस्या और भगवान शिव की जटाओं से गंगा के अवतरण की कथा हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। गंगा स्तोत्रम् उस दिव्य गंगा की महिमा का गान है, जो पृथ्वी पर पापों का नाश करने के लिए आईं।

गंगा केवल धार्मिक महत्व की नहीं है, बल्कि यह भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का आधार भी है। गंगा स्तोत्रम् में गंगा की महिमा का वर्णन करते समय यह ध्यान देना भी आवश्यक है कि हम गंगा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखें। गंगा की पवित्रता और उसकी प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।
गंगा को संरक्षित करके न केवल धार्मिक दृष्टि से पुण्य कमाया जा सकता है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए इसे एक जीवनदायिनी धरोहर के रूप में भी सहेजा जा सकता है।

गंगा स्तोत्रम् के पाठ की विधि

गंगा स्तोत्रम् का पाठ करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि इसका अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सके।

  1. पवित्रता का ध्यान: पाठ से पहले स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र पहनना अनिवार्य है। यदि गंगा नदी के पास हों, तो वहां स्नान करके पाठ करें।
  2. गंगा जल का प्रयोग: यदि संभव हो, तो गंगा जल से अपने पूजा स्थान को शुद्ध करें और इसे अपने पास रखें।
  3. शुद्ध स्थान: पाठ किसी शांत और पवित्र स्थान पर करें। यदि गंगा नदी के किनारे न हों, तो घर में ही पूजा स्थल पर पाठ करें।
  4. ध्यान और मंत्र: पाठ से पहले ध्यान करें और भगवान शिव या माँ गंगा का स्मरण करें।
  5. शांति और एकाग्रता: गंगा स्तोत्रम् का पाठ शांति और ध्यानमग्न होकर करें। मन को भटकने न दें।

गंगा स्तोत्रम्

देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे
त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे।


शङ्करमौलिनिवासिनि विमले
मम मतिरास्तां तव पदकमले।

भागीरथिसुखदायिनि मातः
तव जलमहिमा निगमे ख्यातः।

नाहं जाने तव महिमानं
त्राहि कृपामयि मामज्ञानम्।

हरिपदपाद्यतरङ्गिणि गङ्गे
हिमविधुमुक्ताधवलतरङ्गे।

दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं
कुरु कृपया भवसागरपारम्।

तव जलममलं येन निपीतं
परमपदं खलु तेन गृहीतम्।

मातर्गङ्गे त्वयि यो भक्तः
किल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः।

पतितोद्धारिणि जाह्नवि गङ्गे
खण्डितगिरिवरमण्डितभङ्गे।

भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये
पतितनिवारिणि त्रिभुवनधन्ये।

कल्पलतामिव फलदां लोके
प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके।

पारावारविहारिणि गङ्गे
विबुधवधूकृततरलापाङ्गे।

तव चेन्मातः स्रोतस्नातः
पुनरपि जठरे सोऽपि न जातः।

नरकनिवारिणि जाह्नवि गङ्गे
कलुषविनाशिनि महिमोत्तुङ्गे।

परिलसदङ्गे पुण्यतरङ्गे
जय जय जाह्नवि करुणापाङ्गे।

इन्द्रमुकुटमणिराजितचरणे
सुखदे शुभदे सेवकचरणे।

रोगं शोकं पापं तापं
हर मे भगवति कुमतिकलापम्।

त्रिभुवनसारे वसुधाहारे
त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे।

अलकानन्दे परमानन्दे
कुरु करुणामयि कातरवन्द्ये।

तव तटनिकटे यस्य हि वासः
खलु वैकुण्ठे तस्य निवासः।

वरमिह नीरे कमठो मीनः
किं वा तीरे सरटः क्षीणः।

अथवा गव्यूतौ श्वपचो दीन-
स्तव न हि दूरे नृपतिकुलीनः।

भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये
देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये।

गङ्गास्तवमिमममलं नित्यं
पठति नरो यः स जयति सत्यम्।

येषां हृदये गङ्गा भक्ति-
स्तेषां भवति सदा सुखमुक्तिः।

मधुरमनोहरपञ्झटिकाभिः
परमानन्दकलितललिताभिः।

गङ्गास्तोत्रमिदं भवसारं
वाञ्छितफलदं विदितमुदारं।

शङ्करसेवकशङ्कररचितं
पठति च विषयीदमिति समाप्तम्।

गंगा स्तोत्रम पर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs for Ganga Stotram.

  1. गंगा स्तोत्रम क्या है?

    गंगा स्तोत्रम एक धार्मिक स्तुति है, जो देवी गंगा की महिमा और उनकी पवित्रता का गुणगान करती है। इसे अनेक भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ रचा है। यह स्तोत्रम जीवन में शुद्धता, आध्यात्मिकता और शांति का संदेश देता है।

  2. गंगा स्तोत्रम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

    गंगा स्तोत्रम का पाठ सुबह स्नान के बाद, शांत और पवित्र मन से करना चाहिए। यदि संभव हो तो गंगा नदी के पास या उनकी स्मृति में पाठ करें। इसका पाठ मंगलवार और शुक्रवार को विशेष फलदायी माना जाता है।

  3. गंगा स्तोत्रम का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

    गंगा स्तोत्रम के पाठ से मानसिक शांति, पापों से मुक्ति, और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि इसका पाठ जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

  4. गंगा स्तोत्रम में कौन-कौन से श्लोक सम्मिलित हैं?

    गंगा स्तोत्रम में कुल 10 से 12 श्लोक होते हैं, जिनमें देवी गंगा की महिमा, उनके जल की पवित्रता और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। इन श्लोकों में संस्कृत के सरल और भावपूर्ण शब्दों का उपयोग किया गया है।

  5. u003cstrongu003eगंगा स्तोत्रम का पाठ क्या केवल पवित्र नदियों के पास ही करना चाहिए?u003c/strongu003e

    ऐसा आवश्यक नहीं है। गंगा स्तोत्रम का पाठ कहीं भी किया जा सकता है। हालांकि, पवित्र नदियों के पास या गंगा जल की उपस्थिति में पाठ करने से विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है।

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