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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > श्री विष्णु स्तोत्र > वराह स्तोत्रम्
श्री विष्णु स्तोत्रस्तोत्र

वराह स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: फ़रवरी 11, 2026 5:52 अपराह्न
Sanatani
Published: फ़रवरी 11, 2026
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वराह स्तोत्रम् – Varaha Stotam Lyrics

ऋष्य ऊचुः ॥
जितं जितं तेऽजित यज्ञभावन त्रयीं तनुं त्वां परिधुन्वते नमः ।
यद्रोमगर्तेषु निलिल्युरध्वरास्तस्मै नमः कारणसूकराय ते ॥ १ ॥


रूपं तवैतन्ननु दुष्कृतात्मनाम दुर्दर्शनं देव यदध्वरात्मकम् ।
छन्दांसि यस्य त्वचि बर्हिरोमस्वाज्यं दृशि त्वङघ्रिषु चातुर्होत्रम् ॥ २ ॥


स्रुक् तुण्ड आसीत्स्त्रुव ईश नाशयोरिडोदरे चमसाः कर्णरंध्रे ।
प्राशित्रमास्ये ग्रसने ग्रहास्तु ते यच्चर्वणं ते भगवन्नग्निहोत्रम् ॥ ३ ॥


दीक्षानुजन्मोपसदः शिरोधरं त्वं प्रायणीयोदयनीयदंष्ट्रः ।
जिह्वा प्रवर्ग्यस्तव शीर्षकं क्रतोः सभ्यावसथ्यं चितयोऽसवो हि ते ॥ ४ ॥


सोमस्तु रेतः सवनान्यवस्थितिः संस्थाविभेदास्तव देव धातवः ।
सत्राणि सर्वाणि शरीरसंधिस्त्वं सर्वयज्ञक्रतुरिष्टिबन्धनः ॥ ५ ॥


नमो नमस्तेऽखिलमन्त्रदेवताद्रव्याय सर्वक्रतवे क्रियात्मने ।
वैराग्यभक्त्यात्मजयानुभावितज्ञानाय विद्यागुरवे नमो नमः ॥ ६ ॥


दंष्ट्राग्रकोट्या भगवंस्त्वया धृता विराजते भूधर भूः सभूधरा ।
यथा वनान्निःसरतो दता धृता मतंगजेन्द्रस्य सपत्रपद्मिनी ॥ ७ ॥


त्रयीमयं रूपमिदं च सौकरं भूमंडलेनाथ दता धृतेन ते ।
चकास्ति श्रृङ्गोढघनेन भूयसा कुलाचलेन्द्रस्य यथैव विभ्रमः ॥ ८ ॥


संस्थापयैनां जगतां सतस्थुषां लोकाय पत्‍नीमसि मातरं पिता ।
विधेम चास्यै नमसा सह त्वया यस्यां स्वतेजोऽग्निमिवारणावधाः ॥ ९ ॥

कः श्रद्दधीतान्यतमस्तव प्रभो रसां गताया भुव उद्विबर्हणम् ।
न विस्मयोऽसौ त्वयि विश्वविस्मये यो माययेदं ससृजेऽतिविस्मयम् ॥ १० ॥


विधुन्वता वेदमयं निजं वपुर्जनस्तपःसत्यनिवासिनो वयम् ।
सटाशिखोद्‌भूतशिवांबुबिंदुभिर्विमृज्यमाना भृशमीश पाविताः ॥ ११ ॥


स वै बत भ्रष्टमतिस्तवैष ते यः कर्मणां पारमपारकर्मणः ।
यद्योगमायागुणयोगमोहितं विश्वं समस्तं भगवन्विधेहि शम् ॥ १२ ॥


इति श्रीमद्भागवतांतर्गतं वराहस्तोत्रम् संपूर्णम् ।

 

पद्मालय स्तोत्रम्
चंडी कवच
यमभय निवारण स्तोत्रम्
दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्रम् 
उपमन्युकृत शिवस्तोत्रम्
TAGGED:Varaha Stotam Lyrics
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