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आरती

मां नर्मदाजी की आरती

Sanatani
Last updated: जनवरी 21, 2026 6:56 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 21, 2026
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मां नर्मदाजी की आरती

श्री नर्मदा जी की आरती एक धार्मिक विधि है जो नर्मदा नदी की महत्ता और पवित्रता को दर्शाने के लिए की जाती है। नर्मदा नदी हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय मानी जाती है। इसे ‘नर्मदा मैया’ या ‘नर्मदा जी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह नदी भारत की सात पवित्र नदियों में से एक है और मध्य प्रदेश, गुजरात, और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बहती है। नर्मदा नदी को देवी का रूप माना जाता है और इसकी आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Contents
  • मां नर्मदाजी की आरती
  • नर्मदा नदी का धार्मिक महत्व
  • आरती का समय और विधि
  • नर्मदा जी की आरती के बोल
  • मां नर्मदाजी की आरती
  • नर्मदा की पूजा के लाभ
    • मां नर्मदाजी की आरती का क्या महत्व है?
    • मां नर्मदाजी की आरती कब और कैसे की जाती है?
    • मां नर्मदाजी की आरती कौन गा सकता है?
    • मां नर्मदाजी की आरती के क्या लाभ हैं?
    • मां नर्मदाजी की आरती किन धार्मिक अवसरों पर की जाती है?
  • अन्य पोस्ट

नर्मदा नदी का धार्मिक महत्व

नर्मदा नदी को पुराणों में मां गंगा, यमुना, और सरस्वती के समान पवित्रता दी गई है। कहा जाता है कि नर्मदा की परिक्रमा करने मात्र से व्यक्ति के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। नर्मदा परिक्रमा एक धार्मिक यात्रा है जिसे लोग श्रद्धा और भक्ति भाव से करते हैं। इस परिक्रमा में लोग नर्मदा के किनारे पैदल यात्रा करते हैं और नर्मदा माता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आरती का समय और विधि

नर्मदा जी की आरती दिन में दो बार की जाती है – एक सुबह और दूसरी शाम को। विशेष रूप से सूर्यास्त के समय नर्मदा जी की आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आरती की विधि में दीपक जलाना, फूल चढ़ाना, और धूप दिखाना प्रमुख होता है। आरती करते समय भक्तगण नर्मदा जी के जयकारे लगाते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं।

नर्मदा जी की आरती के बोल

नर्मदा जी की आरती को गाकर मां नर्मदा का गुणगान किया जाता है। आरती के कुछ लोकप्रिय बोल इस प्रकार हैं:

मां नर्मदाजी की आरती

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा शिव हरि शंकर रूद्री पालन्ती ॥

ॐ जय” देवी नारद शारद तुम वरदायक, अभिनव पदचण्डी ।
सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि शारद पदवन्ती ॥

ॐ जय” देवी धूमक वाहन राजत वीणा वादयन्ती ।
झूमकत झूमकत झूमकत झननन झननन रमती राजन्ती ॥

ॐ जय” देवी बाजत ताल मृदंगा सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती ॥

ॐ जय” देवी सकल भुवन पर आप विराजत निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा शंकर तुम भव मेटन्ती ॥

ॐ जय” मैया जी को कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती।
अमरकंठ में विराजत, घाटन घाट कोटी रतन जोती ॥

ॐ जय” मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें, हो रेवा जुग जुग नर गावें।
भजत शिवानंद स्वामी जपत हरि मन वांछित फल पावें ॥ ॐ जय”


आरती में नर्मदा जी की शक्ति, करुणा और कृपा की प्रशंसा की जाती है और उनसे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। आरती के दौरान वातावरण भक्तिमय हो जाता है और श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और आंतरिक आनंद की अनुभूति होती है।

नर्मदा की पूजा के लाभ

नर्मदा जी की आरती और पूजा से आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। कहा जाता है कि जो भी भक्त नर्मदा की सच्चे मन से आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नर्मदा नदी में स्नान करने से भी व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। नर्मदा जल को अमृत समान माना जाता है, जो शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है।

नर्मदा परिक्रमा एक विशेष धार्मिक यात्रा है जिसे भक्तगण पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं। यह परिक्रमा नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक से शुरू होती है और नर्मदा के दोनों किनारों से होते हुए पूरी होती है। इस परिक्रमा को पूर्ण करने में कई महीनों का समय लगता है और इसे करने वाले व्यक्ति को धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है।

 

मां नर्मदाजी की आरती का क्या महत्व है?

मां नर्मदाजी की आरती का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि इसे नर्मदा नदी की देवी के प्रति श्रद्धा और समर्पण के रूप में गाया जाता है। यह आरती नर्मदा मैया के आशीर्वाद की कामना के साथ की जाती है, जो भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं। मां नर्मदा को पवित्र नदी माना जाता है और उनकी आरती करने से भक्तों के सभी पाप और कष्ट समाप्त हो जाते हैं।

मां नर्मदाजी की आरती कब और कैसे की जाती है?

मां नर्मदाजी की आरती दिन में दो बार, सुबह और शाम के समय की जाती है। आरती करने से पहले नर्मदा नदी के तट पर या मंदिर में दीपक जलाया जाता है और धूप-दीप की व्यवस्था की जाती है। आरती के समय भक्त फूल, फल, और जल अर्पित करते हैं और मां नर्मदा से आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।

मां नर्मदाजी की आरती कौन गा सकता है?

मां नर्मदाजी की आरती कोई भी व्यक्ति गा सकता है, चाहे वह पुरुष हो, महिला हो या बच्चा हो। इसके लिए केवल श्रद्धा और भक्ति की आवश्यकता होती है। कोई विशेष नियम या पद्धति का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती, बस भक्त के हृदय में नर्मदा मैया के प्रति समर्पण होना चाहिए।

मां नर्मदाजी की आरती के क्या लाभ हैं?

मां नर्मदाजी की आरती के कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ होते हैं। यह आरती भक्तों के मन को शांति प्रदान करती है, आत्मिक उन्नति में सहायता करती है, और जीवन की समस्याओं का समाधान पाने में मदद करती है। ऐसा माना जाता है कि मां नर्मदा की आरती करने से भक्तों के कष्टों का निवारण होता है और उन्हें समृद्धि और सुख-शांति प्राप्त होती है।

मां नर्मदाजी की आरती किन धार्मिक अवसरों पर की जाती है?

मां नर्मदाजी की आरती विशेष रूप से नर्मदा जयंती, माघ पूर्णिमा, और शिवरात्रि जैसे धार्मिक अवसरों पर की जाती है। इसके अलावा, नर्मदा के किनारे रहने वाले भक्त प्रतिदिन मां नर्मदा की आरती करते हैं। तीर्थयात्रियों के लिए यह विशेष महत्व रखता है और वे इसे नर्मदा स्नान के बाद करते हैं, जिससे उन्हें पवित्रता और शांति का अनुभव होता है।



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