By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: जगतमें कोइ नहिं तेरा रे
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > विष्णु भजन > जगतमें कोइ नहिं तेरा रे
भजनविष्णु भजन

जगतमें कोइ नहिं तेरा रे

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 2:21 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
Share
SHARE

जगतमें कोइ नहिं तेरा रे – Jagatamen Koi Nahin Tera Re

 

जगतमें कोइ नहिं तेरा रे ।

छाड वृथा अभिमान त्याग दे मेरा-मेरा रे ॥

काल-करम बस जग-सराय बिच कीन्हा डेरा रे ।

इस सरायमें सभी मुसाफर, रैन बसेरा रे ॥

जिस तनको तू सदा सँवारै, साँझ-सबेरा रे ।

एक दिन मरघट पड़े भसमका होकर देरा रे॥

मात-पिता, भ्राता, सुत-बांधव, नारी-चेरा रे ।

अंत न होय सहाय, काल जब देवै घेरा रे ॥

जंगका सारा भोग सदा कारन दुस्खकेरा रे ।

भज मन इरिका नाम, पार हो भव-जल बेरा रे ।।

दीनदयालु भक्त बत्सल हरि मालिक तेरा रे ।

दीन होय उनके चरनोंमें कर ले डेरा रे ॥

प्रभु मेरो मन ऐसो है जावै
नाथ मैं धारोजी थारो
आज मेरे श्याम की शादी है
रघुवर तुमको मेरी लाज
बिहारी जू है तुम छौ मेरी दौर | Bihaaree Joo Hai Tum Chhau Meree Daur
TAGGED:राग कान्हरा ( Raag Kaanhara )श्री विष्णु चरण वन्दन ( Shree Vishnu Charan Vandan )श्री विष्णु भजन ( Shree Vishnu Bhajan )
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Popular News
चालीसा

श्री परशुराम चालीसा

Sanatani
Sanatani
जनवरी 22, 2026
शास्ता भुजंग स्तोत्रम्
श्री गंगा चालीसा
श्री गोपाल जी की आरती
श्री गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम्
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?