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भजनविष्णु भजन

पलभर पहले जो कहता था यह धन मेरा यह घर मेरा

Sanatani
Last updated: जनवरी 24, 2026 2:19 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 24, 2026
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पलभर पहले जो कहता था यह धन मेरा यह घर मेरा

 

पलभर पहले जो कहता था, यह धन मेरा यह घर मेरा । प्राणोंके तनसे जाते ही उसको लाकर बाहर गेरा ।।

जिस चटक मटक औ फैशनपर तू है इतना भूला फिरता । जिस पद-गौरबके रौरवमें दिन-रात शौकसे है गिरता ।।

जिस तड़क भड़क औ मौज-मजोंमेंफुरसत नहीं तुझे मिलती जिस गान-तान ओ गप्प-शप्पमें सदा जीभ तेरी हिलती।।

इन सभी साज-सामानोंसे छुट जायेगा रिश्ता तेरा । प्राणोंके तनसे जाते ही उसको लाकर बाहर गेरा ||१||

जिस धन-दौलतके पानेको तू आठों पहर भटकता है। जिन भोगोंका अभाव तेरे अंतरमें सदा खटकता है ।।

जिस सवल देह सुंदर आकृतिपर तू इतना अकड़ा जाता । जिन विषयोंमें सुख देख रहा, पर कभी नहीं पकड़े पाता ।।

इस धन, जोबन, बल, रूप सभीसे टूटेगा नाता तेरा । प्राणोंके तनसे जाते ही उसको लाकर बाहर गेरा ॥२॥

जिस तनको सुख पहुँचानेको तू ऊँचे महल बनाता है। जिसके विलासके लिये निरंतर चुन चुन साज सजाता है ।।

जिसको सुंदर दिखलानेको है साबुन तेल लगाता तू । जिसकी रक्षाके लिये सदा है देवी-देव मनाता तू ।।

वह धूलि-धूसरित हो जायेगा सोने-सा शरीर तेरा । प्राणोंके तनसे जाते ही उसको लाकर बाहर गेरा ॥ ३॥

जिस नश्वर तनके लिये किसीसे लड़नेमें नहिं सकुचाता। जिस तनके लिये हाथ फैलाते जरा नहीं तू शरमाता ।।

जो चोर-डाकुओंके डरसे नित पहरोंके अंदर सोता । जो छायाको भी भूत समझकर डरता है व्याकुल होता ।।

वह देह खाक हो पड़ा अकेला सूने मरघटमें तेरा । प्राणोंके तनसे जाते ही उसको लाकर बाहर गेरा ||४||

जिन माता-पिता, पुत्र-स्वामीको अपना मान रहा है तू । जिन मित्र-बन्धुओंको, वैभवको अपना जान रहा है तू ।

है जिनसे यह सम्बन्ध टूटना कभी नहीं तैंने जाना । है जिनके कारण अहंकारसे नहीं बड़ा किसको माना ।।

यह छूटेगा सम्बन्ध सभीसे, होगा जंगलमें डेरा । प्राणोंके तनसे जाते ही उसको लाकर बाहर गेरा ॥५॥

है जिनके लिये भूल बैठा उस जगदीश्वरका पावन नाम । तू जिनके लिये छोड़ सब सुकृत पापोंका है बना गुलाम ।।

रे ! भूले हुए जीव ! यह सब कुछ पड़े यहीं रह जायेंगे । जिनको तैंने अपना समझा, वे सभी दूर हट जायेंगे ।।

हो जा सचेत ! अब व्यर्थ गवाँ मत जीवन यह अमूल्य तेरा प्राणोंके तनसे जाते ही उसको लाकर बाहर गेरा ।।६।।

आज मेरे श्याम की शादी है
राम भजो राम भजो माई – Ram Bhajo Ram Bhajo Mai
इमपर कच कृपालु हरि दुइहौ
सनातन सत चित आनंदा रूप
नारायणं हृषीकेशं गोविन्दं गरुडध्वजम्
TAGGED:लावनी ( Laavanee )श्री विष्णु चरण वन्दन ( Shree Vishnu Charan Vandan )श्री विष्णु भजन ( Shree Vishnu Bhajan )
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