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Reading: श्री खाटू श्याम चालीसा
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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > चालीसा > श्री खाटू श्याम चालीसा
चालीसा

श्री खाटू श्याम चालीसा

Sanatani
Last updated: जनवरी 22, 2026 7:05 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 22, 2026
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श्री खाटू श्याम चालीसा

हिंदू धर्म में भक्ति और श्रद्धा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें भक्त अपने आराध्य देवी-देवताओं की स्तुति और प्रार्थना के माध्यम से उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। ऐसे ही प्रिय देवताओं में से एक हैं श्री खाटू श्याम जी, जिन्हें बर्बरीक के नाम से भी जाना जाता है। खाटू श्याम चालीसा इनकी भक्ति और कृपा प्राप्त करने का एक पवित्र मार्ग है। यह चालीसा 40 छंदों में लिखी गई एक भक्ति प्रार्थना है, जो भक्तों को उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है। इस लेख में हम श्री खाटू श्याम चालीसा के अर्थ, महत्व, पाठ विधि और लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

Contents
  • श्री खाटू श्याम चालीसा
  • खाटू श्याम जी का परिचय
  • चालीसा का पाठ
  • श्री खाटू श्याम चालीसा
  • चालीसा का महत्व
  • चालीसा के लाभ

खाटू श्याम जी का परिचय

खाटू श्याम जी को भगवान श्रीकृष्ण का कलयुगी अवतार माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, बर्बरीक महाभारत युद्ध में भाग लेने के इच्छुक थे और उन्होंने श्रीकृष्ण से अपने शीश का दान कर दिया था। प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि वे कलयुग में “खाटू श्याम” के नाम से पूजे जाएंगे और उनके भक्तों की हर मनोकामना पूरी होगी। बर्बरीक का शीश राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में दफनाया गया, जहां आज उनका भव्य मंदिर स्थित है। उन्हें “हारे का सहारा,” “शीश का दानी,” और “लखदातार” जैसे नामों से भी संबोधित किया जाता है।

चालीसा का पाठ

श्री खाटू श्याम चालीसा का पाठ करने की एक सरल और प्रभावी विधि है, जो निम्नलिखित चरणों में की जा सकती है:

  1. शुद्धिकरण: सुबह या शाम के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. स्थान की तैयारी: एक शांत स्थान पर खाटू श्याम जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और दीपक जलाएं।
  3. ध्यान और प्रार्थना: गुरु और श्री खाटू श्याम जी का ध्यान करते हुए चालीसा का पाठ शुरू करें।
  4. भावना: पूरे मन और श्रद्धा के साथ चालीसा का उच्चारण करें। इसे धीरे-धीरे और साफ शब्दों में पढ़ना चाहिए।
  5. प्रसाद और आरती: पाठ के बाद प्रसाद चढ़ाएं और खाटू श्याम जी की आरती करें।
Shri Khatu Shyam Chalisa
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श्री खाटू श्याम चालीसा

॥ दोहा ॥

श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द ।
श्याम चालीसा भणत हूँ, रच चौपाई छंद ॥

॥ चौपाई ॥

श्याम श्याम भजि बारम्बारा, सहज ही हो भवसागर पारा।
इन सम देव न दूजा कोई, दीन दयालु न दाता होई।

भीमसुपुत्र अहिलवती जाया, कहीं भीम का पौत्र कहाया।
यह सब कथा सही कल्पान्तर, तनिक न मानों इसमें अन्तर ।

बर्बरीक विष्णु अवतारा, भक्तन हेतु मनुज तनु धारा।
वसुदेव देवकी प्यारे, यशुमति मैया नन्द दुलारे।

मधुसूदन गोपाल मुरारी, बृजकिशोर योवर्धन धारी।
सियाराम श्री हरि गोविन्दा, दीनपाल श्री बाल मुकन्दा ।

दामोदर रणछोड़ बिहारी, नाथ द्वारिकाधीश खरारी।
नरहरि रुप प्रहलाद प्यारा, खम्भ फारि हिरनाकुश मारा।

राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता, गोपी वल्लभ कंस हनंता।
मनमोहन चित्तचोर कहाये, माखन चोरि चोरि कर खाये।

मुरलीधर यदुपति घनश्याम, कृष्ण पतितपावन मायापति लक्ष्मीपति ईसा, पुरुषोत्तम केशव अभिरामा ।

जगदीश विश्वपति त्रिभुवन उजियारा, दीन बन्धु भक्तन रखवारा ।

प्रभु का भेद कोई न पाया, शेष महेश थके मुनिराया।
नारद शारद ऋषि योगिन्दर, श्याम श्याम सब रटत निरन्तर ।

करि कोविद करि सके न गिनन्ता, नाम अपार अथाह अनन्ता ।
हर सृष्टि हर युग में भाई, ले अवतार भक्त सुखदाई।

हृदय माँहि करि देखु विचारा, श्याम भजे तो हो निस्तारा।
कीर पढ़ावत गणिका तारी, भीलनी की भक्ति बलिहारी ।

सती अहिल्या गौतम नारी, भई श्राप वश शिला दुखारी।
श्याम चरण रज नित लाई, पहुँची पतिलोक में जाई।

अजामिल अरू सदन कसाई, नाम प्रताप परम गति पाई।
जाके श्याम नाम अधारा, सुख लहहि दुःख दूर हो सारा ।

श्याम सुलोचन है अति सुन्दर, मोर मुकुट सिर तन पीताम्बर ।
गल वैजयन्तिमाल सुहाई, छवि अनूप भक्तन मन भाई।

श्याम श्याम सुमिरहु दिनराती, शाम दुपहरि अरू परभाती।
श्याम सारथी जिसके रथ के, रोड़े दूर होय उस पथ के।

श्याम भक्त न कहीं पर हारा, भीर परि तब श्याम पुकारा।
रसना श्याम नाम रस पी ले, जी ले श्याम नाम के हाले।

संसारी सुख भोग मिलेगा, अन्त श्याम सुख योग मिलेगा।
श्याम प्रभु हैं तन के काले, मन के गोरे भोले भाले।

श्याम संत भक्तन हितकारी, रोग दोष अघ नाशै भारी।
प्रेम सहित जे नाम पुकारा, भक्त लगत श्याम को प्यारा ।

खाटू में है मथुरा वासी, पार ब्रह्म पूरण अविनासी।
सुधा तान भरि मुरली बजाई, चहुं दिशि नाना जहाँ सुनि पाई।

वृद्ध बाल जेते नारी नर, मुग्ध भये सुनि वंशी के स्वर ।
दौड़ दौड़ पहुँचे सब जाई, खाटू में जहां श्याम कन्हाई।

जिसने श्याम स्वरूप निहारा, भव भय से पाया छुटकारा ।

॥ दोहा ॥

श्याय सलोने साँवरे, बर्बरीक तनु धार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार ॥

चालीसा का महत्व

श्री खाटू श्याम चालीसा का पाठ करने का विशेष महत्व है। यह निम्नलिखित कारणों से भक्तों के लिए प्रिय है:

  • आध्यात्मिक शांति: नियमित पाठ से मन को शांति और आत्मिक संतुष्टि मिलती है।
  • कष्टों से मुक्ति: यह चालीसा भक्तों को जीवन के सभी कष्टों और भय से मुक्ति दिलाती है।
  • मनोकामना पूर्ति: खाटू श्याम जी की कृपा से भक्तों की हर इच्छा पूरी होती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा: चालीसा का पाठ घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और नकारात्मकता को दूर करता है।

चालीसा के लाभ

श्री खाटू श्याम चालीसा का पाठ करने से भक्तों को कई लाभ प्राप्त होते हैं:

  • संकट से रक्षा: खाटू श्याम जी अपने भक्तों की हर विपदा में सहारा बनते हैं।
  • धन और समृद्धि: यह चालीसा आर्थिक समृद्धि और समृद्ध जीवन प्रदान करती है।
  • स्वास्थ्य लाभ: नियमित पाठ से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • परिवार कल्याण: परिवार पर श्याम बाबा की कृपा बनी रहती है और सभी सदस्यों को सुख मिलता है।

श्री बाँकेबिहारी चालीसा
श्री परशुराम चालीसा
श्री ललिता चालीसा
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