By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > नवग्रह स्तोत्र > शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्
नवग्रह स्तोत्रस्तोत्र

शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 26, 2026 8:04 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 26, 2026
Share
SHARE

शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्

शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्(Shanaischara Dwadasa Nama Stotram) शनिदेव को समर्पित एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। शनिदेव, जिन्हें शनि या शनिचर के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक प्रमुख ग्रह देवता हैं। वे न्याय और कर्म के देवता माने जाते हैं और उनका प्रभाव व्यक्ति के जीवन में अनेक परिवर्तन ला सकता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और ग्रहों के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

Contents
  • शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्
  • शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् महत्व
  • शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् शास्त्र और स्रोत
  • शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् के पाठ विधि
  • शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्
  • शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न
    • 1.शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् क्या है?
    • 2.शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् के नाम कौन-कौन से हैं?
    • 3.u003cstrongu003eशनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्u003c/strongu003e का पाठ करने के लाभ क्या हैं?
    • 4. u003cstrongu003eशनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्u003c/strongu003e का पाठ कैसे किया जाना चाहिए?
    • 5.क्या u003cstrongu003eशनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्u003c/strongu003e का जाप किसी विशेष दिन पर करना चाहिए?

शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् महत्व


इस स्तोत्र का महत्व विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जो शनि की दशा या शनि की महादशा से प्रभावित हैं। यह स्तोत्र संकटों को दूर करने, मानसिक शांति पाने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए पढ़ा जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि इस स्तोत्र के पाठ से शनि ग्रह की अशुभता समाप्त होती है और भक्तों को शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् शास्त्र और स्रोत


शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्, भगवान शनिदेव के 12 नामों का संग्रह है। इसे विशेष रूप से भक्तों द्वारा उनके 12 नामों का उच्चारण करके पाठ किया जाता है। ये नाम विभिन्न पुराणों में उल्लेखित हैं और इनका महत्व शास्त्रों में बताया गया है। यह स्तोत्र भक्तों को मानसिक, भौतिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करने में सहायक है।

शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् के पाठ विधि

पाठ के अंत में शांति पाठ और प्रार्थना करें।

इस स्तोत्र का पाठ किसी पवित्र स्थान पर बैठकर किया जाना चाहिए।

श्रद्धा और भक्ति से शनिदेव का ध्यान करें।

12 नामों का उच्चारण क्रम से करें।

शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्

नित्यं नीलाञ्जनप्रख्यं नीलवर्णसमस्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं नमस्यामि शनैश्चरम्।


नमोऽर्कपुत्राय शनैश्चराय नीहारवर्णाञ्जनमेचकाय।
श्रुत्वा रहस्यं भवकामदश्च फलप्रदो मे भव सूर्यपुत्र।

नमोऽस्तु प्रेतराजाय कृष्णदेहाय वै नमः।
शनैश्चराय क्रूराय शुद्धबुद्धिप्रदायिने।

य एभिर्नामभिः स्तौति तस्य तुष्टो भवाम्यहम्।
मदीयं तु भयं तस्य स्वप्नेऽपि न भविष्यति।


शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न

1.शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् क्या है?

u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003e शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान शनिदेव की आराधना के लिए विशेष रूप से लिखा गया है। यह स्तोत्र उनके बारह नामों का उल्लेख करता है और भक्तों को उनके आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और विभिन्न समस्याओं का समाधान होता है।

2.शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् के नाम कौन-कौन से हैं?

u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003e शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् में भगवान शनिदेव के बारह नाम शामिल हैं। ये नाम हैं:u003cbru003eशनैश्चर, काल, शान्ति, मयू, भैरव,गदाधर,दण्डधर,जयंती,घण्टाकर्ण,धनपति,कालसर्प,चन्द्रिकाu003cbru003eइन नामों का जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

3.u003cstrongu003eशनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्u003c/strongu003e का पाठ करने के लाभ क्या हैं?

u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003e शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् का पाठ करने से अनेक लाभ होते हैं, जैसे:u003cbru003eशनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।u003cbru003eजीवन में कठिनाइयों और दुखों का निवारण होता है।u003cbru003eधन, स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि होती है।u003cbru003eमानसिक शांति और संतोष प्राप्त होता है।u003cbru003eशनि ग्रह की खराब स्थिति के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

4. u003cstrongu003eशनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्u003c/strongu003e का पाठ कैसे किया जाना चाहिए?

u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003e इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए, भक्त को शुद्धता और ध्यान के साथ इसे पढ़ना चाहिए। इसे निम्नलिखित विधि से किया जा सकता है:u003cbru003eस्वच्छ स्थान पर बैठें।u003cbru003eशनिदेव की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।u003cbru003eध्यान से इस स्तोत्र का पाठ करें।u003cbru003eपाठ के बाद भगवान से प्रार्थना करें और उनका आशीर्वाद मांगें। इस विधि से पाठ करने से अधिक फलदायी परिणाम मिलते हैं।

5.क्या u003cstrongu003eशनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम्u003c/strongu003e का जाप किसी विशेष दिन पर करना चाहिए?

u003cstrongu003eउत्तर:u003c/strongu003e हां, शनैश्चर द्वादश नाम स्तोत्रम् का जाप विशेष रूप से शनिवार के दिन करना सबसे लाभदायक माना जाता है। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित होता है, और इस दिन इस स्तोत्र का पाठ करने से उनकी कृपा अधिक प्राप्त होती है। इसके अलावा, किसी विशेष समस्या के समाधान के लिए भी इसे किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है।

कृष्ण मंगल स्तोत्र
श्री हनुमत्कवचम्
लक्ष्मी नरसिम्हा करावलम्ब स्तोत्रम्
कृष्ण लहरी स्तोत्रम
रवि अष्टकम्
TAGGED:Grah Stotra
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Popular News
आरती

शारदा माता की आरती

Sanatani
Sanatani
जनवरी 22, 2026
दशावतार स्तोत्रम् – Dashavatar Stotram
धन्वंतरी आरती
बिहारी जू है तुम छौ मेरी दौर | Bihaaree Joo Hai Tum Chhau Meree Daur
अयनांश : ज्योतिषीय दृष्टिकोण और उसका जीवन पर प्रभाव
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?