Narasimha Stava In Hindi
नरसिंह स्तव(Narasimha Stava) भगवान नरसिंह को समर्पित एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र उनकी शक्ति, पराक्रम और उनके भक्तों की रक्षा के प्रति उनकी करुणा का गुणगान करता है। नरसिंह भगवान विष्णु के एक उग्र और दिव्य अवतार हैं, जिन्हें उनके भक्त संकट के समय स्मरण करते हैं।
नरसिंह अवतार की पौराणिक कथा
नरसिंह अवतार का उल्लेख विष्णु पुराण, भगवत पुराण, और अन्य ग्रंथों में मिलता है। इस अवतार की कथा हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद की कहानी से जुड़ी है। हिरण्यकशिपु ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि उसे न तो कोई मानव मार सकेगा, न पशु, न दिन में, न रात में, न किसी अस्त्र से, और न किसी शस्त्र से। इस वरदान के कारण वह अत्यंत अहंकारी हो गया और स्वयं को ईश्वर मानने लगा।
उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकशिपु ने कई बार प्रह्लाद को विष्णु की आराधना करने से रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रह्लाद ने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी। जब हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने का प्रयास किया, तब भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण कर हिरण्यकशिपु का वध किया। उन्होंने आधे मानव और आधे सिंह का रूप धारण किया और सांध्यकाल में (जब न दिन था न रात), एक खंभे से प्रकट होकर, हिरण्यकशिपु को अपने नखों से मार डाला।
नरसिंह स्तव का महत्व Importance of Narasimha Stava
नरसिंह स्तव भगवान नरसिंह की महिमा का गुणगान करता है और उनके अद्वितीय रूप, शक्ति और दैवीय गुणों की प्रशंसा करता है। यह स्तव संकट के समय भक्तों के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। जो भी व्यक्ति इसे सच्चे मन से पढ़ता या सुनता है, उसे भय, रोग, और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।
नरसिंह स्तव की रचना
नरसिंह स्तव का रचनाकार प्रहलाद स्वयं माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जब नरसिंह भगवान ने हिरण्यकशिपु का वध किया, तो उन्होंने अपने उग्र रूप को शांत करने के लिए भगवान की स्तुति की। यह स्तुति ही नरसिंह स्तव के रूप में प्रसिद्ध हुई।
नरसिंह स्तव Narasimha Stava
भैरवाडम्बरं बाहुदंष्ट्रायुधं
चण्डकोपं महाज्वालमेकं प्रभुम्।
शङ्खचक्राब्जहस्तं स्मरात्सुन्दरं
ह्युग्रमत्युष्णकान्तिं भजेऽहं मुहुः।
दिव्यसिंहं महाबाहुशौर्यान्वितं
रक्तनेत्रं महादेवमाशाम्बरम्।
रौद्रमव्यक्तरूपं च दैत्याम्बरं
वीरमादित्यभासं भजेऽहं मुहुः।
मन्दहासं महेन्द्रेन्द्रमादिस्तुतं
हर्षदं श्मश्रुवन्तं स्थिरज्ञप्तिकम्।
विश्वपालैर्विवन्द्यं वरेण्याग्रजं
नाशिताशेषदुःखं भजेऽहं मुहुः।
सव्यजूटं सुरेशं वनेशायिनं
घोरमर्कप्रतापं महाभद्रकम्।
दुर्निरीक्ष्यं सहस्राक्षमुग्रप्रभं
तेजसा सञ्ज्वलन्तं भजेऽहं मुहुः।
सिंहवक्त्रं शरीरेण लोकाकृतिं
वारणं पीडनानां समेषां गुरुम्।
तारणं लोकसिन्धोर्नराणां परं
मुख्यमस्वप्नकानां भजेऽहं मुहुः।
पावनं पुण्यमूर्तिं सुसेव्यं हरिं
सर्वविज्ञं भवन्तं महावक्षसम्।
योगिनन्दं च धीरं परं विक्रमं
देवदेवं नृसिंहं भजेऽहं मुहुः।
सर्वमन्त्रैकरूपं सुरेशं शुभं
सिद्धिदं शाश्वतं सत्त्रिलोकेश्वरम्।
वज्रहस्तेरुहं विश्वनिर्मापकं
भीषणं भूमिपालं भजेऽहं मुहुः।
सर्वकारुण्यमूर्तिं शरण्यं सुरं
दिव्यतेजःसमानप्रभं दैवतम्।
स्थूलकायं महावीरमैश्वर्यदं
भद्रमाद्यन्तवासं भजेऽहं मुहुः।
भक्तवात्सल्यपूर्णं च सङ्कर्षणं
सर्वकामेश्वरं साधुचित्तस्थितम्।
लोकपूज्यं स्थिरं चाच्युतं चोत्तमं
मृत्युमृत्युं विशालं भजेऽहं मुहुः।
भक्तिपूर्णां कृपाकारणां संस्तुतिं
नित्यमेकैकवारं पठन् सज्जनः।
सर्वदाऽऽप्नोति सिद्धिं नृसिंहात् कृपां
दीर्घमायुष्यमारोग्यमप्युत्तमम्।
नरसिंह स्तव का पाठ और लाभ
नरसिंह स्तव का पाठ प्रातःकाल या संकट के समय किया जाता है। इसे पढ़ने से निम्नलिखित लाभ होते हैं:
- भय से मुक्ति: जो भी व्यक्ति इस स्तव का पाठ करता है, उसे सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
- शत्रु विजय: भगवान नरसिंह की कृपा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- रोगों का नाश: इसे नियमित पढ़ने से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति पाता है।
- संकटों का समाधान: जीवन में आने वाले सभी संकटों का समाधान भगवान नरसिंह की कृपा से होता है।
नरसिंह स्तव पूजा विधि
नरसिंह स्तव का पाठ करने से पहले भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है।
- भगवान की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
- पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
- भगवान का ध्यान करें और उनके नामों का जप करें।
- नरसिंह स्तव का पाठ करें।
नरसिंह स्तव पर पूछे जाने वाले प्रश्न Narasimha Stava
नरसिंह स्तव क्या है?
उत्तर:
नरसिंह स्तव भगवान नरसिंह की स्तुति में रचित एक पवित्र स्तोत्र है। इसे भगवान नरसिंह के भक्त उनकी महिमा का गुणगान करने के लिए गाते हैं। यह स्तोत्र उनकी शक्ति, पराक्रम और भक्तों की रक्षा करने की क्षमता को समर्पित है।
नरसिंह स्तव का महत्व क्या है?
उत्तर:
नरसिंह स्तव का पाठ करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं से रक्षा होती है। यह भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति प्रदान करता है। विशेषकर यह स्तोत्र विपत्ति और संकट के समय भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रभावी माना जाता है।
नरसिंह स्तव का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
उत्तर:
नरसिंह स्तव का पाठ प्रातःकाल या सायंकाल के समय शुद्ध मन और शरीर के साथ करना चाहिए। इसे भगवान नरसिंह की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर ध्यानपूर्वक पढ़ा जाता है। यदि संभव हो, तो इसे पूजा के बाद दीपक जलाकर करें।
नरसिंह स्तव में कौन-कौन से प्रमुख श्लोक होते हैं?
उत्तर:
नरसिंह स्तव में भगवान नरसिंह के पराक्रम और उनके भक्त प्रह्लाद की रक्षा के वर्णन से संबंधित श्लोक होते हैं। इसमें भगवान की उग्र और शांत दोनों रूपों की महिमा का गुणगान किया गया है। इसके कुछ प्रमुख श्लोक “उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्” जैसे मंत्र हैं।
नरसिंह स्तव का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
उत्तर:
नरसिंह स्तव का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, भयमुक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शत्रु बाधा से मुक्ति प्रदान करता है। साथ ही, भगवान नरसिंह की कृपा से आध्यात्मिक विकास भी होता है।