By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: मणिकंठ अष्टकम्
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • सनातनज्ञान
  • गीतकाव्य
  • आरोग्य
  • ज्योतिष
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > अय्यप्पा स्तोत्रम् > मणिकंठ अष्टकम्
अय्यप्पा स्तोत्रम्अष्टकम्

मणिकंठ अष्टकम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 2, 2026 7:54 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 2, 2026
Share
SHARE

मणिकंठ अष्टकम्

मणिकंठ अष्टकम् एक प्रसिद्ध स्तोत्र है, जो भगवान अय्यप्पा को समर्पित है। भगवान अय्यप्पा को दक्षिण भारत में विशेष रूप से केरल और तमिलनाडु में अत्यधिक श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। इन्हें ‘हरिहरपुत्र’ कहा जाता है, क्योंकि वे भगवान शिव और भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के पुत्र माने जाते हैं। इस स्तोत्र की रचना भक्तों ने भगवान अय्यप्पा की महिमा का गुणगान करने के लिए की थी।

Contents
  • मणिकंठ अष्टकम्
  • नाम की उत्पत्ति
  • मणिकंठ अष्टकम का महत्व
  • मणिकंठ अष्टकम का पाठ विधि
  • Manikantha Ashtakam
  • अष्टकम के लाभ

नाम की उत्पत्ति

भगवान अय्यप्पा को ‘मणिकंठ’ नाम से भी जाना जाता है। इस नाम का अर्थ है—

  • मणि (रत्न) + कंठ (गला) = जिसके कंठ में दिव्य मणि है
    ऐसा माना जाता है कि जब भगवान अय्यप्पा का जन्म हुआ, तो उनके कंठ में एक दिव्य मणि (रत्न) थी, जिससे उनका यह नाम पड़ा।

मणिकंठ अष्टकम का महत्व

  1. भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति – जो भी श्रद्धालु इस स्तोत्र का नित्य पाठ करता है, उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।
  2. आध्यात्मिक उन्नति – भगवान अय्यप्पा के ध्यान और गुणगान से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से उन्नत होता है।
  3. संकट निवारण – जीवन में आने वाली परेशानियाँ और बाधाएँ दूर होती हैं।
  4. स्वास्थ्य एवं बल – यह स्तोत्र व्यक्ति के मन और शरीर को मजबूत बनाता है।
  5. साबरिमाला यात्रा में विशेष महत्व – यह स्तोत्र खासतौर पर उन भक्तों द्वारा गाया जाता है जो अय्यप्पा स्वामी के प्रसिद्ध तीर्थस्थल साबरिमाला की यात्रा पर जाते हैं।

मणिकंठ अष्टकम का पाठ विधि

  • सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • किसी पवित्र स्थान पर दीपक जलाएँ और भगवान अय्यप्पा का ध्यान करें।
  • इस अष्टकम का श्रद्धा और भक्ति से पाठ करें।
  • अंत में भगवान अय्यप्पा के मंत्र “स्वामीये शरणम अय्यप्पा” का 108 बार जाप करें।

Manikantha Ashtakam

हरिकलभतुरङ्गतुङ्गवाहनं हरिमणिमोहनहारचारुदेहम्।
हरिदधीपनतं गिरीन्द्रगेहं हरिहरपुत्रमुदारमाश्रयामि।
निरुपम परमात्मनित्यबोधं गुरुवरमद्भुतमादिभूतनाथम्।
सुरुचिरतरदिव्यनृत्तगीतं हरिहरपुत्रमुदारमाश्रयामि।
अगणितफलदानलोलशीलं नगनिलयं निगमागमादिमूलम्।
अखिलभुवनपालकं विशालं हरिहरपुत्रमुदारमाश्रयामि।
घनरसकलभाभिरम्यगात्रं कनककरोज्वल कमनीयवेत्रम्।
अनघसनकतापसैकमित्रं हरिहरपुत्रमुदारमाश्रयामि।
सुकृतसुमनसां सतां शरण्यं सकृदुपसेवकसाधुलोकवर्ण्यम्।
सकलभुवनपालकं वरेण्यं हरिहरपुत्रमुदारमाश्रयामि।
विजयकर विभूतिवेत्रहस्तं विजयकरं विविधायुध प्रशस्तम्।
विजित मनसिजं चराचरस्थं हरिहरपुत्रमुदारमाश्रयेहम्।
सकलविषयमहारुजापहारं जगदुदयस्थितिनाशहेतुभूतम्।
अगनगमृगयामहाविनोदं हरिहरपुत्रमुदारमाश्रयेहम्।
त्रिभुवनशरणं दयापयोधिं प्रभुममराभरणं रिपुप्रमाथिम्।
अभयवरकरोज्ज्वलत्समाधिं हरिहरपुत्रमुदारमाश्रयेहम्।
जयजय मणिकण्ठ वेत्रदण्ड जय करुणाकर पूर्णचन्द्रतुण्ड।
जयजय जगदीश शासिताण्ड जयरिपुखण्ड वखण्ड चारुखण्ड।

अष्टकम के लाभ

  1. आध्यात्मिक शांति – नित्य पाठ करने से मानसिक शांति और आंतरिक संतोष प्राप्त होता है।
  2. साहस और शक्ति – भगवान अय्यप्पा की कृपा से व्यक्ति को जीवन में साहस और आत्मबल मिलता है।
  3. सकारात्मक ऊर्जा – यह स्तोत्र घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
  4. रोग निवारण – इसे पढ़ने से रोग और शारीरिक कष्टों में राहत मिलती है।
  5. मोक्ष प्राप्ति – भगवान अय्यप्पा के भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्री सरबेेश्वर अष्टकम
महालक्ष्मी अष्टक
शास्ता स्तुति
धन्याष्टकम्
दामोदर अष्टकम
TAGGED:Ayyappa Swamy BhajansLord Ayyappa Devotional SongsManikanta Ashtakam Benefits in HindiManikanta Ashtakam LyricsManikanta Ashtakam Meaning in EnglishManikanta Ashtakam PDF DownloadSabarimala Ayyappa Stotramमणिकंठ अष्टकम् मंत्रमणिकंठ अष्टकम् लिरिक्समणिकंठ अष्टकम् हिंदी अर्थ
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow
Popular News
भजनविष्णु भजन

स्याम मोरे ढिगतें कबहुँ न जावै – Syam More Dhigaten Kabahun Na Javai

Sanatani
Sanatani
जनवरी 24, 2026
प्रेतराज सरकार की आरती
ललिता अष्टकम्
ललिता त्रिशती – லலிதா திரிசதி
नागकन्या उलूपी और अर्जुन की कथा. (Ulupi and Arjuna Short Story)

Categories

Reading: मणिकंठ अष्टकम्
Share

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?