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Reading: केनोपनिषद
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उपनिषदकेनोपनिषद्

केनोपनिषद

Sanatani
Last updated: फ़रवरी 14, 2026 5:23 अपराह्न
Sanatani
Published: फ़रवरी 14, 2026
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केनोपनिषद: एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ का अध्ययन ( Kena Upanishad )

उपनिषदों को भारतीय दर्शन के आध्यात्मिक और तात्त्विक चिंतन का शिखर माना जाता है। इनमें अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन मिलता है। केनोपनिषद् अथर्ववेद के अन्तर्गत आती है और यह उपनिषद चार खण्डों में विभाजित है। इस उपनिषद का मुख्य उद्देश्य आत्मा और ब्रह्म का स्वरूप स्पष्ट करना है। इसका नाम ‘केन’ शब्द से निकला है जिसका अर्थ है ‘किसके द्वारा’। यह उपनिषद इस प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास करता है कि किसके द्वारा यह संसार संचालित होता है। केनोपनिषद् सामवेदीय टीकाकार ब्राह्मणके अन्तर्गत हैं। इसमें आरम्भसे लेकर अन्त तक सर्वप्रेरक प्रभु के ही खरूप और प्रभाव का विस्तृत वर्णन किया गया है। प्रथम दो खण्डों में सर्वाधिष्ठान परब्रह्मके परमार्थिक स्वरूप का लक्षणसे निर्देश करते हुए परमार्थ ज्ञानकी अनिर्वचनीयता साथ उसका अभेद प्रदर्शित किया है। इसके पश्चात् तीसरे और चौथे खण्डमें यक्षोपाख्यानद्वारा भगवान्‌का सर्वप्रेरक और सर्वकर्तृ दिखलाया गया है। इसकी वर्णनशैली बड़ी ही उदात्त और गम्भीर है। मंत्रो के पाठमात्रसे ही हृदय एक अपूर्व मस्तीका अनुभव करने लगता है। भगवंती श्रुतिकी महिमा अथवा वर्णन- शैलीके सम्बन्धमें कुछ भी कहना सूर्यको दीपक दिखाना है।

Contents
  • केनोपनिषद: एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ का अध्ययन ( Kena Upanishad )
  • प्रथम खण्ड
  • द्वितीय खण्ड
  • तृतीय खण्ड
  • चतुर्थ खण्ड
  • केनोपनिषद् ( Kena Upanishad PDF )
  • केनोपनिषद् के ऊपर पूछे जाने वाले प्रश्न
    • केनोपनिषद् क्या है?
    • केनोपनिषद् के मुख्य विषय क्या हैं?
    • केनोपनिषद् का महत्व क्या है?
    • केनोपनिषद् का उद्देश्य क्या है?
    • केनोपनिषद् के प्रमुख श्लोक कौन-कौन से हैं?

प्रथम खण्ड

प्रथम खण्ड में शिष्य और गुरु के संवाद के माध्यम से ब्रह्म की खोज की जाती है। शिष्य प्रश्न करता है। इस प्रश्न के उत्तर में गुरु बताते हैं कि यह सब ब्रह्म के कारण होता है, जो स्वयं किसी भी इंद्रिय या मन का विषय नहीं है। वह ब्रह्म इंद्रियों के परे है और सभी इंद्रियों का आधार है।

केनेषितं पतति प्रेषितं मनः
केन प्राणः प्रथमः प्रैति युक्तः।
केनेषितां वाचमिमां वदन्ति
चक्षुः श्रोत्रं क उ देवो युनक्ति॥

अर्थात, “किसके द्वारा प्रेरित होकर मन गतिमान होता है? किसके द्वारा संचालित होकर प्राण चलायमान होते हैं? किसके द्वारा संचालित होकर मनुष्य वाणी बोलता है? कौन-सा देवता नेत्र और कान को संचालन करता है?”

द्वितीय खण्ड

द्वितीय खण्ड में ब्रह्म के अनुभव को समझाया गया है। यह खण्ड बताता है कि ब्रह्म को प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा ही जाना जा सकता है। गुरु कहते हैं। यहां गुरु बताते हैं कि ब्रह्म इंद्रियों और मन की पकड़ में नहीं आता, बल्कि उसे आत्मज्ञान और अनुभव द्वारा ही समझा जा सकता है।

यद्वाचानभ्युदितं येन वागभ्युद्यते
तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते॥

अर्थात, “जिसे वाणी व्यक्त नहीं कर सकती और जिसके कारण वाणी व्यक्त होती है, वही ब्रह्म है, यह जानो। जिसे लोग पूजा करते हैं, वह ब्रह्म नहीं है।”

तृतीय खण्ड

तृतीय खण्ड में ब्रह्म का स्वरूप और उसकी महिमा का वर्णन किया गया है। यह खण्ड एक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसमें देवताओं और ब्रह्मा का संवाद होता है। देवता अपनी विजय का अभिमान करते हैं और तब ब्रह्मा उन्हें उनकी सीमा का बोध कराते हैं। इस खण्ड में उमा, ब्रह्मा के वास्तविक स्वरूप को प्रकट करती हैं। यह खण्ड इस बात पर जोर देता है कि ब्रह्म सर्वशक्तिमान है और सभी देवताओं के परे है।

चतुर्थ खण्ड

चतुर्थ खण्ड में आत्मा और ब्रह्म के एकत्व का सिद्धांत समझाया गया है। यह खण्ड ब्रह्म के साक्षात्कार का महत्व बताता है। यहां गुरु शिष्य को बताते हैं कि आत्मा ही ब्रह्म है और इसे जानने वाला अमर हो जाता है।

सत्यमेव जयते नानृतं
सत्येन पन्था विततो देवयानः।
येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामाः
यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥

अर्थात, “सत्य ही विजय प्राप्त करता है, असत्य नहीं। सत्य के द्वारा ही देवयान मार्ग पर चला जा सकता है। ऋषियों ने इसी मार्ग का अनुसरण कर परम सत्य का साक्षात्कार किया है।”

केनोपनिषद् ( Kena Upanishad PDF )

केनोपनिषद – Kenopanishad

केनोपनिषद् के ऊपर पूछे जाने वाले प्रश्न

केनोपनिषद् क्या है?

यह वैदिक साहित्य का एक महत्वपूर्ण भाग है जो उपनिषदों में से एक है। इसमें भगवान का अद्वितीयता का सन्देश प्रस्तुत होता है।u003cbru003e१.केनोपनिषद् वैदिक साहित्य का हिस्सा है।u003cbru003e२.इसमें ब्रह्मांड और आत्मा के विषय में विस्तृत चर्चा होती है।u003cbru003e३.यह उपनिषदों की एक प्रमुख रचना है जिसमें आध्यात्मिक ज्ञान का महत्वपूर्ण सन्देश है।

केनोपनिषद् के मुख्य विषय क्या हैं?

इसमें आत्मा और परमात्मा के संबंध में विचार किए गए हैं जो हमारे असली स्वरूप को समझाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।u003cbru003e१. आत्मा की स्वरूप की व्याख्या की गई है।u003cbru003e२. परमात्मा के साक्षात्कार के लिए उपायों का वर्णन किया गया है।u003cbru003e३. मानव जीवन की उच्चतम आदर्शों पर चर्चा की गई है।

केनोपनिषद् का महत्व क्या है?

यह उपनिषद्यों का एक प्रमुख स्रोत है जो आध्यात्मिक ज्ञान और मानवता के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझाने में सहायक है।u003cbru003e१. यह मानव जीवन के उच्चतम आदर्शों को प्रकट करती है।u003cbru003e२. इसमें आत्मा और परमात्मा के संबंध का विवेचन किया गया है।u003cbru003e३. इसके माध्यम से आध्यात्मिक सच्चाई का अनुभव किया जा सकता है।

केनोपनिषद् का उद्देश्य क्या है?

यह उपनिषद्यों का मुख्य उद्देश्य हमें आत्मा के सच्चे स्वरूप की जानकारी देना है और उससे हमारे जीवन को अध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देना है।u003cbru003e१. आत्मा के अद्वितीयता को समझाना।u003cbru003e२. जीवन में आध्यात्मिक प्रगति को प्रोत्साहित करना।u003cbru003e३. आत्मानुभव के माध्यम से आत्मा का अनुभव करना।

केनोपनिषद् के प्रमुख श्लोक कौन-कौन से हैं?

इस उपनिषद् में कुछ श्रेष्ठ श्लोक हैं जो आत्मा और ब्रह्मांड के विषय में गहराई से सोचने को प्रोत्साहित करते हैं।u003cbru003e१. u0022केनेषितं पतति प्रेषितं मनःu0022 – यह श्लोक मानव मन के महत्व को स्पष्ट करता है।u003cbru003e२. u0022यद्वाचाऽनभ्युदितं येन वागभ्युद्यतेu0022 – इस श्लोक में वाक्य और उसकी महत्वपूर्णता का वर्णन किया गया है।u003cbru003e३. u0022तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासतेu0022 – इस श्लोक में ब्रह्म की प्राप्ति के मार्ग का स्पष्टीकरण किया गया है।

केवल्यौपनिषद
निर्वाण उपनिषद
मुण्डकोपनिषद
ऐतरेयोपनिषद ( Aitareya Upanishad )
ईशोपनिषद
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