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श्री गणेश स्तोत्रस्तोत्र

गणेशावतार स्तोत्रं

Sanatani
Last updated: जनवरी 29, 2026 6:47 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 29, 2026
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गणेशावतार स्तोत्रं – Ganeshavatara Stotram

गणेशावतार स्तोत्रं(Sri Ganesha Avatara Stotram) भगवान श्री गणेश की महिमा का वर्णन करने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। यह स्तोत्र उनके विभिन्न अवतारों की व्याख्या करता है, जिनमें वे भक्तों की रक्षा करने और संसार से अधर्म को समाप्त करने के लिए प्रकट होते हैं।

Contents
  • गणेशावतार स्तोत्रं – Ganeshavatara Stotram
  • गणेशावतार स्तोत्रं का महत्व
  • गणेश के प्रमुख अवतार
    • 1. महोत्कट विनायक अवतार
    • 2. मयूरेश्वर अवतार
    • 3. गजानन अवतार
    • 4. लंबोदर अवतार
    • 5. विकट अवतार
    • 6. विघ्नराज अवतार
    • 7. धूम्रवर्ण अवतार
  • गणेशावतार स्तोत्रं के लाभ
  • गणेशावतार स्तोत्रं का पाठ करने की विधि
  • गणेशावतार स्तोत्रं Ganeshavatara Stotram

गणेशावतार स्तोत्रं का महत्व

  • यह स्तोत्र भगवान गणेश के दिव्य अवतारों का वर्णन करता है।
  • इसे कष्टों को दूर करने, बाधाओं को हटाने और समृद्धि प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है।
  • यह स्तोत्र विद्या, बुद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला माना जाता है।
  • जो व्यक्ति इसे श्रद्धा और भक्ति से पढ़ता है, उसे सुख, शांति और सफलता प्राप्त होती है।

गणेश के प्रमुख अवतार

1. महोत्कट विनायक अवतार

  • यह अवतार सतयुग में हुआ था।
  • भगवान गणेश ने असुरों का संहार करके धर्म की रक्षा की थी।

2. मयूरेश्वर अवतार

  • इस अवतार में भगवान गणेश मयूर वाहन पर विराजमान थे।
  • उन्होंने सिंधुरासुर का वध किया, जो देवताओं को कष्ट दे रहा था।

3. गजानन अवतार

  • इस अवतार में भगवान गणेश ने लोभ, मोह और अहंकार को नष्ट किया।
  • यह अवतार सद्बुद्धि और ज्ञान प्रदान करने वाला माना जाता है।

4. लंबोदर अवतार

  • इस अवतार में उन्होंने अज्ञान और अधर्म को समाप्त किया।
  • लंबोदर रूप में वे ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति के प्रतीक हैं।

5. विकट अवतार

  • इस अवतार में उन्होंने कुरुरासुर नामक दैत्य का संहार किया।
  • विकट रूप से वे दुष्टों के विनाश और धर्म की रक्षा करने वाले माने जाते हैं।

6. विघ्नराज अवतार

  • इस अवतार में भगवान गणेश विघ्नों के स्वामी बने और भक्तों के मार्ग की बाधाओं को दूर किया।
  • यह अवतार संकटों से मुक्ति और सफलता दिलाने वाला है।

7. धूम्रवर्ण अवतार

  • इस अवतार में भगवान गणेश ने अधर्म, आलस्य और अज्ञानता को नष्ट किया।
  • इस रूप में वे सकारात्मक ऊर्जा और शुभता प्रदान करते हैं।

गणेशावतार स्तोत्रं के लाभ

  1. विघ्नों का नाश करता है – जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं।
  2. बुद्धि और ज्ञान प्रदान करता है – विद्यार्थी और विद्वानों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
  3. आध्यात्मिक उन्नति – साधकों और भक्तों को आध्यात्मिक सफलता मिलती है।
  4. सौभाग्य और समृद्धि – व्यापार, करियर और धन में वृद्धि होती है।
  5. रोगों से मुक्ति – शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

गणेशावतार स्तोत्रं का पाठ करने की विधि

  • बुधवार या गणेश चतुर्थी के दिन पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • प्रातः स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र पहनकर, गणपति की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें।
  • पीले फूल, दूर्वा (दूब घास) और मोदक अर्पित करें।
  • स्तोत्र का श्रद्धा और पूर्ण एकाग्रता से पाठ करें।

गणेशावतार स्तोत्रं Ganeshavatara Stotram

अनन्ता अवताराश्च गणेशस्य महात्मनः ।
न शक्यते कथां वक्तुं मया वर्षशतैरपि ॥१॥

संक्षेपेण प्रवक्ष्यामि मुख्यानां मुख्यतां गतान् ।
अवतारांश्च तस्याष्टौ विख्यातान् ब्रह्मधारकान् ॥२॥

वक्रतुण्डावतारश्च देहिनां ब्रह्मधारकः ।
मत्सरासुरहन्ता स सिंहवाहनगः स्मृतः ॥३॥

एकदन्तावतारो वै देहिनां ब्रह्मधारकः ।
मदासुरस्य हन्ता स आखुवाहनगः स्मृतः ॥४॥

महोदर इति ख्यातो ङ्य़ानब्रह्मप्रकाशकः ।
मोहासुरस्य शत्रुर्वै आखुवाहनगः स्मृतः ॥५॥

गजाननः स विङ्य़ेयः सांख्येभ्यः सिद्धिदायकः ।
लोभासुरप्रहर्ता च मूषकगः प्रकीर्तितः ॥६॥

लम्बोदरावतारो वै क्रोधसुरनिबर्हणः ।
आखुगः शक्तिब्रह्मा सन् तस्य धारक उच्यते ॥७॥

विकटो नाम विख्यातः कामासुरप्रदाहकः ।
मयूरवाहनश्चायं सौरमात्मधरः स्मृतः ॥८॥

विघ्नराजावतारश्च शेषवाहन उच्यते ।
ममासुरप्रहन्ता स विष्णुब्रह्मेति वाचकः ॥९॥

धूम्रवर्णावतारश्चाभिमानासुरनाशकः ।
आखुवाहनतां प्राप्तः शिवात्मकः स उच्यते ॥१०॥

एतेऽष्टौ ते मया प्रोक्ता गणेशांशा विनायकाः ।
एषां भजनमात्रेण स्वस्वब्रह्मप्रधारकाः ॥११॥

स्वानन्दवासकारी स गणेशानः प्रकथ्यते ।
स्वानन्दे योगिभिर्दृष्टो ब्रह्मणि नात्र संशयः ॥१२॥

तस्यावताररूपाश्चाष्टौ विघ्नहरणाः स्मृताः ।
स्वानन्दभजनेनैव लीलास्तत्र भवन्ति हि ॥१३॥

माया तत्र स्वयं लीना भविष्यति सुपुत्रक ।
संयोगे मौनभावश्च समाधिः प्राप्यते जनैः ॥१४॥

अयोगे गणराजस्य भजने नैव सिद्ध्यति ।
मायाभेदमयं ब्रह्म निवृत्तिः प्राप्यते परा ॥१५॥

योगात्मकगणेशानो ब्रह्मणस्पतिवाचकः ।
तत्र शान्तिः समाख्याता योगरूपा जनैः कृता ॥१६॥

नानाशान्तिप्रभेदश्च स्थाने स्थाने प्रकथ्यते ।
शान्तीनां शान्तिरूपा सा योगशान्तिः प्रकीर्तिता ॥१७॥

योगस्य योगता दृष्टा सर्वब्रह्म सुपुत्रक ।
न योगात्परमं ब्रह्म ब्रह्मभूतेन लभ्यते ॥१८॥

एतदेव परं गुह्यं कथितं वत्स तेऽलिखम् ।
भज त्वं सर्वभावेन गणेशं ब्रह्मनायकम् ॥१९॥

पुत्रपौत्रादिप्रदं स्तोत्रमिदं शोकविनाशनम् ।
धनधान्यसमृद्ध्यादिप्रदं भावि न संशयः ॥२०॥

धर्मार्थकाममोक्षाणां साधनं ब्रह्मदायकम् ।
भक्तिदृढकरं चैव भविष्यति न संशयः ॥२१॥

इति मुद्गलपुराणान्तर्गतं गणेशावतारस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

गणेशावतार स्तोत्रं भगवान श्री गणेश के विभिन्न अवतारों का महिमामय वर्णन करता है। इसे पढ़ने और सुनने से विघ्न, कष्ट और नकारात्मकता दूर होती है, साथ ही सौभाग्य, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त होती है। जो भक्त इसे नियमित रूप से पढ़ते हैं, वे भगवान गणेश की कृपा से सफलता और शांति का अनुभव करते हैं।

सिद्धि विनायक स्तोत्रम्
शंकरादिकृतं गजाननस्तोत्रम्
अच्युताष्टकम्
जम्बुकेश्वरी स्तोत्रम्
अरुणाचल अक्षर मणि माला स्तोत्रम्
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