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अय्यप्पा स्तोत्रम्कवचम्स्तोत्र

धर्म शास्ता कवचम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 22, 2026 4:40 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 22, 2026
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धर्म शास्ता कवचम्

धर्म शास्ता कवचम् (Dharma Shasta Kavacham) भगवान अय्यप्पा (धर्म शास्ता) की स्तुति में रचित एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसे भक्तजन सुरक्षा, स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पाठ करते हैं।

Contents
  • धर्म शास्ता कवचम्
  • Dharma Shasta Kavacham
  • धर्म शास्ता कवचम् का महत्व

Dharma Shasta Kavacham

अथ धर्मशास्ताकवचम्।

ॐ देव्युवाच –

भगवन् देवदेवेश सर्वज्ञ त्रिपुरान्तक।
प्राप्ते कलियुगे घोरे महाभूतैः समावृते।
महाव्याधिमहाव्याल- घोरराजैः समावृते।
दुःस्वप्नघोरसन्तापै- र्दुर्विनीतैः समावृते।
स्वधर्मविरते मार्गे प्रवृत्ते हृदि सर्वदा।
तेषां सिद्धिं च मुक्तिं च त्वं मे ब्रूहि वृषध्वज।

ईश्वर उवाच –

शृणु देवि महाभागे सर्वकल्याणकारणे।
महाशास्तुश्च देवेशि कवचं पुण्यवर्धनम्।

अग्निस्तम्भजलस्तम्भ- सेनास्तम्भविधायकम्।
महाभूतप्रशमनं महाव्याधिनिवारणम्।

महाज्ञानप्रदं पुण्यं विशेषात् कलितापहम्।
सर्वरक्षाकरं दिव्यमायुरारोग्य- वर्धनम्।

किमतो बहुनोक्तेन यं यं कामयते द्विजः।
तं तमाप्नोत्यसन्देहो महाशास्तुः प्रसादतः।

कवचस्य ऋषिर्ब्रह्मा गायत्रीश्छन्द उच्यते।
देवता श्रीमहाशास्ता देवो हरिहरात्मजः।

षडङ्गमाचरेद् भक्त्या मात्रया जातियुक्तया।
ध्यानमस्य प्रवक्ष्यामि शृणुष्वावहिता प्रिये।

अस्य श्रीमहाशास्तुः कवचस्तोत्र- महामन्त्रस्य। ब्रह्मा ऋषिः। गायत्री छन्दः। श्रीमहाशास्ता देवता।
प्रां बीजम्। प्रीं शक्तिः। प्रूं कीलकम्। श्रीमहाशास्तुः प्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः।

ध्यानम्।

तेजोमण्डलमध्यगं त्रिनयनं दिव्याम्बरालङ्कृतं
देवं पुष्पशरेक्षुकार्मुक- लसन्माणिक्यपात्राभयम्।

बिभ्राणं करपङ्कजे मदगजस्कन्धाधिरूढं विभुं
शास्तारं शरणं व्रजामि सततं त्रैलोक्यसम्मोहनम्।

महाशास्ता शिरः पातु फालं हरिहरात्मजः।
कामरूपी दृशौ पातु सर्वज्ञो मे श्रुती सदा।

घ्राणं पातु कृपाध्यक्षो मुखं गौरीप्रियः सदा।
वेदाध्यायी च जिह्वां मे पातु मे चुबुकं गुरुः।

कण्ठं पातु विशुद्धात्मा स्कन्धौ पातु सुरार्चितः।
बाहू पातु विरूपाक्षः करौ तु कमलाप्रियः।

भूताधिपो मे हृदयं मध्यं पातु महाबलः।
नाभिं पातु महावरीः कमलाक्षोऽवतात् कटिम्।

अपाणं पातु विश्वात्मा गुह्यं गुह्यार्थवित्तमः।
ऊरू पातु गजारूढो वज्रधारी च जानुनी।

जङ्घे पाशाङ्कुशधरः पादौ पातु महामतिः।
सर्वाङ्गं पातु मे नित्यं महामायाविशारदः।

इतीदं कवचं पुण्यं सर्वाघौघनिकृन्तनम्।
महाव्याधिप्रशमनं महापातकनाशनम्।

ज्ञानवैराग्यदं दिव्यमणिमादि- विभूषितम्।
आयुरारोग्यजननं महावश्यकरं परम्।

यं यं कामयते कामं तं तमाप्नोत्यसंशयः।
त्रिसन्ध्यं यः पठेद्विद्वान् स याति परमां गतिम्।

इति धर्मशास्ताकवचं संपूर्णम्।

धर्म शास्ता कवचम् का महत्व

  • यह कवचम् भगवान अय्यप्पा के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन करता है, जैसे कि वेदों के ज्ञाता, भक्तों के रक्षक, और करुणामय देवता।
  • कवचम् के श्लोकों में भगवान अय्यप्पा से प्रार्थना की जाती है कि वे शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा करें, जैसे कि सिर, आँखें, कान, हृदय, और पैर।
  • इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
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