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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > पार्वती स्तोत्र > कामाक्षी सुप्रभातम्
पार्वती स्तोत्रस्तोत्र

कामाक्षी सुप्रभातम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 27, 2026 4:34 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 27, 2026
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कामाक्षी सुप्रभातम्

कामाक्षी सुप्रभातम् (Kamakshi Suprabhatam)देवी कामाक्षी को समर्पित एक भक्ति गीत है, जो उनकी महिमा का वर्णन करता है और भक्तों को उनकी कृपा पाने के लिए प्रेरित करता है। देवी कामाक्षी का संबंध दक्षिण भारत के प्रसिद्ध कांचीपुरम शहर से है, जहां उनका भव्य मंदिर स्थित है। कामाक्षी देवी त्रिपुरसुंदरी का एक रूप हैं, जिन्हें शक्ति की देवी माना जाता है।

Contents
  • कामाक्षी सुप्रभातम्
  • कामाक्षी सुप्रभातम्
  • कामाक्षी सुप्रभातम् का महत्व
  • कामाक्षी सुप्रभातम् का पाठ करने के लाभ
  • कामाक्षी मंदिर और सुप्रभातम् का संबंध
  • कैसे करें पाठ?

कामाक्षी सुप्रभातम्

जगदवनविधौ त्वं जागरूका भवानिजगदवनविधौ त्वं जागरूका भवानितव तु जननि निद्रामात्मवत्कल्पयित्वा।
प्रतिदिवसमहं त्वां बोधयामि प्रभातेत्वयि कृतमपराधं सर्वमेतं क्षमस्व।

यदि प्रभातं तव सुप्रभातंतदा प्रभातं मम सुप्रभातम्।
तस्मात् प्रभाते तव सुप्रभातंवक्ष्यामि मातः कुरु सुप्रभातम्।

कामाक्षि देव्यम्ब तवार्द्रदृष्ट्यामूकः स्वयं मूककविर्यथाऽसीत्।
तथा कुरु त्वं परमेश जायेत्वत्पादमूले प्रणतं दयार्द्रे।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ वरदे उत्तिष्ठ जगदीश्वरि।
उत्तिष्ठ जगदाधारे त्रैलोक्यं मङ्गलं कुरु।
श‍ृणोषि कश्चिद् ध्वनिरुत्थितोऽयंमृदङ्गभेरीपटहानका
नाम्।वेदध्वनिं शिक्षितभूसुराणांश‍ृणोषि भद्रे कुरु सुप्रभातम्।

श‍ृणोषि भद्रे ननु शङ्खघोषंवैतालिकानां मधुरं च गानम्।
श‍ृणोषि मातः पिककुक्कुटानांध्वनिं प्रभाते कुरु सुप्रभातम्।

मातर्निरीक्ष्य वदनं भगवान् शशाङ्कोलज्जान्वितः स्वयमहो निलयं प्रविष्टः।
द्रष्टुं त्वदीयवदनं भगवान् दिनेशोह्यायाति देवि सदनं कुरु सुप्रभातम्।

पश्याम्ब केचिद् धृतपूर्णकुम्भाःकेचिद् दयार्द्रे धृतपुष्पमालाः ।
काचित् शुभाङ्ग्यो ननु वाद्यहस्ता-स्तिष्ठन्ति तेषां कुरु सुप्रभातम्।

भेरीमृदङ्गपणवानकवाद्यहस्ताःस्तोतुं महेशदयिते स्तुतिपाठकास्त्वाम्।
तिष्ठन्ति देवि समयं तव काङ्क्षमाणाःह्युत्तिष्ठ दिव्यशयनात् कुरु सुप्रभातम्।

मातर्निरीक्ष्य वदनं भगवान् त्वदीयंनैवोत्थितः शशिधिया शयितस्तवाङ्के।
संबोधयाशु गिरिजे विमलं प्रभातंजातं महेशदयिते कुरु सुप्रभातम्।

अन्तश्चरन्त्यास्तव भूषणानाम्झल्झल्ध्वनिं नूपुरकङ्कणानाम्।
श्रुत्वा प्रभाते तव दर्शनार्थीद्वारि स्थितोऽहं कुरु सुप्रभातम्।

वाणी पुस्तकमंबिके गिरिसुते पद्मानि पद्मासनारम्भा त्वंबरडम्बरं गिरिसुता गङ्गा च गङ्गाजलम्।
काली तालयुगं मृदङ्गयुगलं बृन्दा च नन्दा तथानीला निर्मलदर्पणं धृतवती तासां प्रभातं शुभम्।

उत्थाय देवि शयनाद्भगवान् पुरारिःस्नातुं प्रयाति गिरिजे सुरलोकनद्याम्।
नैको हि गन्तुमनघे रमते दयार्द्रेह्युत्तिष्ठ देवि शयनात्कुरु सुप्रभातम्।

पश्याम्ब केचित्फलपुष्पहस्ताःकेचित्पुराणानि पठन्ति मातः।
पठन्ति वेदान्बहवस्तवाग्रेतेषां जनानां कुरु सुप्रभातम्।

लावण्यशेवधिमवेक्ष्य चिरं त्वदीयंकन्दर्पदर्पदलनोऽपि वशं गतस्ते।
कामारिचुम्बितकपोलयुगं त्वदीयंद्रष्टुं स्थिता वयमये कुरु सुप्रभातम्।

गाङ्गेयतोयममवाह्य मुनीश्वरास्त्वांगङ्गाजलैः स्नपयितुं बहवो घटांश्च।
धृत्वा शिरःसु भवतीमभिकाङ्क्षमाणाःद्वारि स्थिता हि वरदे कुरु सुप्रभातम्।

मन्दारकुन्दकुसुमैरपि जातिपुष्पै-र्मालाकृताविरचितानि मनोहराणि।
माल्यानि दिव्यपदयोरपि दातुमम्बतिष्ठन्ति देवि मुनयः कुरु सुप्रभातम्।

काञ्चीकलापपरिरम्भनितम्बबिम्बंकाश्मीरचन्दनविलेपितकण्ठदेशम्।
कामेशचुम्बितकपोलमुदारनासांद्रष्टुं स्थिता वयमये कुरु सुप्रभातम्।

मन्दस्मितं विमलचारुविशालनेत्रंकण्ठस्थलं कमलकोमलगर्भगौरम्।
चक्राङ्कितं च युगलं पदयोर्मृगाक्षिद्रष्टुं स्थिताः वयमये कुरु सुप्रभातम्।

मन्दस्मितं त्रिपुरनाशकरं पुरारेःकामेश्वरप्रणयकोपहरं स्मितं ते।
मन्दस्मितं विपुलहासमवेक्षितुं‌ ते मातः स्थिता वयमये कुरु सुप्रभातम्।

माता शिशूनां परिरक्षणार्थंन चैव निद्रावशमेति लोके।
माता त्रयाणां जगतां गतिस्त्वंसदा विनिद्रा कुरु सुप्रभातम्।

मातर्मुरारिकमलासनवन्दिताङ्घ्र्याहृद्यानि दिव्यमधुराणि मनोहराणि।
श्रोतुं तवाम्ब वचनानि शुभप्रदानद्वारि स्थिता वयमये कुरु सुप्रभातम्।

दिगम्बरो ब्रह्मकपालपाणि-र्विकीर्णकेशः फणिवेष्टिताङ्गः।
तथाऽपि मातस्तव देविसङ्गात्महेश्वरोऽभूत् कुरु सुप्रभातम्।

अयि तु जननि दत्तस्तन्यपानेन देविद्रविडशिशुरभूद्वै ज्ञानसम्पन्नमूर्तिः।
द्रविडतनयभुक्तक्षीरशेषं भवानिवितरसि यदि मातः सुप्रभातं भवेन्मे।

जननि तव कुमारः स्तन्यपानप्रभावात्शिशुरपि तव भर्तुः कर्णमूले भवानि।
प्रणवपदविशेषं बोधयामास देवियदि मयि च कृपा ते सुप्रभातं भवेन्मे।

त्वं विश्वनाथस्य विशालनेत्राहालस्यनाथस्य नु मीननेत्रा।
एकाम्रनाथस्य नु कामनेत्राकामेशजाये कुरु सुप्रभातम्।

श्रीचन्द्रशेखरगुरुर्भगवान् शरण्येत्वत्पादभक्तिभरितः फलपुष्पपाणिः।
एकाम्रनाथदयिते तव दर्शनार्थीतिष्ठत्ययं यतिवरो मम सुप्रभातम्।

एकाम्रनाथदयिते ननु कामपीठेसम्पूजिताऽसि वरदे गुरुशङ्करेण।
श्रीशङ्करादिगुरुवर्यसमर्चिताङ्घ्रिंद्रष्टुं स्थिता वयमये कुरु सुप्रभातम्।

दुरितशमनदक्षौ मृत्युसन्तासदक्षौचरणमुपगतानां मुक्तिदौ ज्ञानदौ तौ।
अभयवरदहस्तौ द्रष्टुमम्ब स्थितोऽहंत्रिपुरदलनजाये सुप्रभातं ममार्ये।

मातस्तदीयचरणं हरिपद्मजाद्यै-र्वन्द्यं रथाङ्गसरसीरुहशङ्खचिह्नम्।
द्रष्टुं च योगिजनमानसराजहंसंद्वारि स्थितोऽस्मि वरदे कुरु सुप्रभातम्।

पश्यन्तु केचिद्वदनं त्वदीयंस्तुवन्तु कल्याणगुणांस्तवान्ये।
नमन्तु पादाब्ज युगं त्वदीयाद्वारे स्थितानां कुरु सुप्रभातम्।

केचित्सुमेरोः शिखरेऽतितुङ्गेकेचिन्मणिद्वीपवरे विशाले।
पश्यन्तु केचित्त्वमृदाब्धिमध्येपश्याम्यहं त्वामिह सुप्रभातम्।

शम्भोर्वामाङ्कसंस्थां शशिनिभवदनां नीलपद्मायताक्षींश्यामाङ्गां चारुहासां निबिडतरकुचां पक्वबिम्बाधरोष्ठीम्।
कामाक्षीं कामदात्रीं कुटिलकचभरां भूषणैर्भूषिताङ्गींपश्यामः सुप्रभाते प्रणतजनिमतामद्य नः सुप्रभातम्।

कामप्रदाकल्पतरुर्विभासिनान्या गतिर्मे ननु चातकोऽहम्।
वर्षस्य मोघः कनकाम्बुधाराःकाश्चित्तु धारा मयि कल्पयाशु।

त्रिलोचनप्रियां वन्दे वन्दे त्रिपुरसुन्दरीम्।
त्रिलोकनायिकां वन्दे सुप्रभातं ममाम्बिके।

कामाक्षि देव्यम्ब तवार्द्रदृष्ट्याकृतं मयेदं खलु सुप्रभातम्।
सद्यः फलं मे सुखमम्ब लब्धंतथा च मे दुःखदशा गता हि।

ये वा प्रभाते पुरतस्तवार्येपठन्ति भक्त्या ननु सुप्रभातम्।
श‍ृण्वन्ति ये वा त्वयि बद्धचित्ता-स्तेषां प्रभातं कुरु सुप्रभातम्।

कामाक्षी सुप्रभातम् का महत्व

सुप्रभातम् का अर्थ है “शुभ प्रभात”। यह गीत सुबह के समय देवी की आराधना के लिए गाया जाता है, ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त हो और दिन शुभ हो। कामाक्षी सुप्रभातम् की रचना में संस्कृत भाषा का प्रयोग किया गया है, जिसमें देवी के सौंदर्य, शक्ति, करुणा और उनकी दिव्य लीला का वर्णन किया गया है। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि भक्त देवी की कृपा से अपने जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकें।

कामाक्षी सुप्रभातम् का पाठ करने के लाभ

  1. आध्यात्मिक शांति: इसे गाने या सुनने से मन को शांति मिलती है और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
  2. सकारात्मक ऊर्जा: सुबह-सुबह कामाक्षी सुप्रभातम् का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  3. ईश्वरीय कृपा: देवी कामाक्षी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  4. आंतरिक शक्ति: देवी शक्ति का रूप हैं। उनकी आराधना से आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति मिलती है।

कामाक्षी मंदिर और सुप्रभातम् का संबंध

कांचीपुरम का कामाक्षी मंदिर शक्ति पीठों में से एक है और यह मंदिर देवी कामाक्षी की महिमा का प्रतीक है। यहां सुबह के समय सुप्रभातम् का पाठ किया जाता है, जिसके साथ मंदिर में विशेष पूजा और आरती का आयोजन होता है। सुप्रभातम् के माध्यम से देवी को जगाने का रिवाज प्राचीन समय से चला आ रहा है।

कामाक्षी सुप्रभातम् को पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय संगीत की शैली में गाया जाता है। यह राग और ताल के संयोजन के साथ प्रस्तुत किया जाता है, जो इसे मधुर और प्रभावशाली बनाता है। भक्ति संगीत के क्षेत्र में इसका विशेष स्थान है।

कैसे करें पाठ?

  1. सुबह के समय स्वच्छ होकर पूजा स्थल पर जाएं।
  2. देवी कामाक्षी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
  3. कामाक्षी सुप्रभातम् के श्लोकों का उच्चारण करें या इसे सुनें।
  4. अंत में देवी से प्रार्थना करें और प्रसाद चढ़ाएं।
सरस्वती स्तव
शिव नामावल्यष्टकं (नामावली अष्टकं)
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