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Reading: ललिता अपराध क्षमापण स्तोत्रम्
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ललिता स्तोत्रस्तोत्र

ललिता अपराध क्षमापण स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 29, 2026 4:30 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 29, 2026
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ललिता अपराध क्षमापण स्तोत्रम्

यह स्तोत्र देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी से अपने जाने-अनजाने किए गए पापों और अपराधों की क्षमा माँगने के लिए रचा गया है। भक्त इस स्तोत्र का पाठ करते हुए माँ से निवेदन करता है कि वह उसके सभी त्रुटियों को क्षमा करें और उसे अपनी शरण में लें।

Contents
  • ललिता अपराध क्षमापण स्तोत्रम्
  • ललिता अपराध क्षमापण स्तोत्रम्
  • इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करें
  • स्तोत्र का मूल स्रोत

ललिता अपराध क्षमापण स्तोत्रम्

कञ्जमनोहरपादचलन्मणिनूपुरहंसविराजिते
कञ्जभवादिसुरौघपरिष्टुतलोकविसृत्वरवैभवे।
मञ्जुलवाङ्मयनिर्जितकीरकुलेचलराजसुकन्यके
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

एणधरोज्वलफालतलोल्लसदैणमदाङ्कसमन्विते
शोणपरागविचित्रितकन्दुकसुन्दरसुस्तनशोभिते।
नीलपयोधरकालसुकुन्तलनिर्जितभृङ्गकदम्बके
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

ईतिविनाशिनि भीतिनिवारिणि दानवहन्त्रि दयापरे
शीतकराङ्कितरत्नविभूषितहेमकिरीटसमन्विते।
दीप्ततरायुधभण्डमहासुरगर्वनिहन्त्रि पुराम्बिके
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

लब्धवरेण जगत्रयमोहनदक्षलतान्तमहेषुणा
लब्धमनोहरसालविषण्णसुदेहभुवा परिपूजिते।
लङ्घितशासनदानवनाशनदक्षमहायुधराजिते
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

ह्रीम्पदभूषितपञ्चदशाक्षरषोडशवर्णसुदेवते
ह्रीमतिहादिहामनुमन्दिररत्नविनिर्मितदीपिके।
हस्तिवराननदर्शितयुद्धसमादरसाहसतोषिते
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

हस्तलसन्नवपुष्पसरेक्षुशरासनपाशमहाङ्कुशे
हर्यजशम्भुमहेश्वरपादचतुष्टयमञ्चनिवासिनि।
हंसपदार्थमहेश्वरि योगिसमूहसमादृतवैभवे
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

सर्वजगत्करणावननाशनकर्त्रि कपालिमनोहरे
स्वच्छमृणालमरालतुषारसमानसुहारविभूषिते।
सज्जनचित्तविहारिणि शङ्करि दुर्जननाशनतत्परे
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

कञ्जदलाक्षि निरञ्जनि कुञ्जरगामिनि मञ्जुलभाषिते
कुङ्कुमपङ्कविलेपनशोभितदेहलते त्रिपुरेश्वरि।
दिव्यमतङ्गसुताधृतराज्यभरे करुणारसवारिधे
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

हल्लकचम्पकपङ्कजकेतकपुष्पसुगन्धितकुन्तले
हाटकभूधरश‍ृङ्गविनिर्मितसुन्दरमन्दिरवासिनि।
हस्तिमुखाम्बवराहमुखीधृतसैन्यभरे गिरिकन्यके
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

लक्ष्मणसोदरसादरपूजितपादयुगे वरदे शिवे
लोहमयादिबहून्नतसालनिषण्णबुधेश्वरसंयुते।
लोलमदालसलोचननिर्जितनीलसरोजसुमालिके
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

ह्रीमितिमन्त्रमहाजपसुस्थिरसाधकमानसहंसिके
ह्रीम्पदशीतकराननशोभितहेमलते वसुभास्वरे।
हार्दतमोगुणनाशिनि पाशविमोचनि मोक्षसुखप्रदे
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।
सच्चिदभेदसुखामृतवर्षिणि तत्त्वमसीति सदादृते
सद्गुणशालिनि साधुसमर्चितपादयुगे परशाम्बवि।
सर्वजगत्परिपालनदीक्षितबाहुलतायुगशोभिते
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

कम्बुगले वरकुन्दरदे रसरञ्जितपादसरोरुहे
काममहेश्वरकामिनि कोमलकोकिलभाषिणि भैरवि।
चिन्तितसर्वमनोहरपूरणकल्पलते करुणार्णवे
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

लस्तकशोभिकरोज्वलकङ्कणकान्तिसुदीपितदिङ्मुखे
शस्ततरत्रिदशालयकार्यसमादृतदिव्यतनुज्वले।
कश्चतुरोभुवि देविपुरेशि भवानि तव स्तवने भवेत्
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

ह्रीम्पदलाञ्चितमन्त्रपयोदधिमन्थनजातपरामृते
हव्यवहानिलभूयजमानकखेन्दुदिवाकररूपिणि।
हर्यजरुद्रमहेश्वरसंस्तुतवैभवशालिनि सिद्धिदे
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

श्रीपुरवासिनि हस्तलसद्वरचामरवाक्कमलानुते
श्रीगुहपूर्वभवार्जितपुण्यफले भवमत्तविलासिनि।
श्रीवशिनीविमलादिसदानतपादचलन्मणिनूपुरे
पालय हे ललितापरमेश्वरि मामपराधिनमम्बिके।

इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करें

  1. समय: नित्य प्रातःकाल, विशेष रूप से नवरात्रि, पूर्णिमा, शुक्रवार, या किसी देवी-उत्सव पर।
  2. स्थान: शांत, स्वच्छ और पवित्र स्थान, जहाँ आप मानसिक रूप से एकाग्र हो सकें।
  3. भावना: पाठ करते समय अपने मन, वाणी और कर्म से क्षमा याचना करनी चाहिए। अहंकार को त्याग कर पूर्ण समर्पण की भावना रखें।
  4. अंत में प्रार्थना करें: “हे माँ ललिता, मेरी भूलें क्षमा करें और मुझे अपने चरणों में स्थान दें।”

स्तोत्र का मूल स्रोत

ललिता अपराध क्षमापन स्तोत्रम् की रचना किसी एक ऋषि या ग्रंथ से नहीं मानी जाती, बल्कि यह श्रीविद्या परंपरा से संबंधित है और पारंपरिक रूप से गुरु-शिष्य परंपरा में मौखिक रूप से चला है। कई बार यह स्तोत्र ललिता सहस्रनाम के पाठ के बाद भी पढ़ा जाता है।

द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्रम्‌
एक श्लोकी नवग्रह स्तोत्रम्
शिव भुजंग स्तोत्रम्
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