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Reading: मेहंदीपुर बालाजी की आरती
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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > आरती > मेहंदीपुर बालाजी की आरती
आरती

मेहंदीपुर बालाजी की आरती

Sanatani
Last updated: जनवरी 3, 2026 7:31 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 3, 2026
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मेहंदीपुर बालाजी(Mehandipur Balaji Ki Aarti), जिसे बालाजी या मेहंदीपुर के नाम से भी जाना जाता है, भारत के राजस्थान राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह स्थल विशेष रूप से भगवान हनुमान को समर्पित है और यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। मेहंदीपुर बालाजी की आरती, जो इस मंदिर की पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है।

Contents
    • मेहंदीपुर बालाजी का इतिहास
    • मेहंदीपुर बालाजी आरती का महत्व
  • श्री मेहंदीपुर बाला जी की आरती
    • मेहंदीपुर बालाजी आरती का समय और प्रक्रिया
    • मेहंदीपुर बालाजी आरती के लाभ

मेहंदीपुर बालाजी का इतिहास

मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर 16वीं शताब्दी में स्थापित किया गया था। इस मंदिर का इतिहास एक प्रसिद्ध मान्यता से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि यहाँ भगवान हनुमान ने भक्तों की मदद के लिए अवतार लिया था। यह स्थान उन लोगों के लिए विशेष है, जो भूत-प्रेत या नकारात्मक शक्तियों से पीड़ित हैं। यहाँ आने वाले भक्तों का मानना है कि भगवान हनुमान उनकी समस्याओं को दूर करते हैं।

मेहंदीपुर बालाजी आरती का महत्व

आरती एक धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें भगवान की स्तुति की जाती है। मेहंदीपुर बालाजी की आरती विशेष रूप से भगवान हनुमान की महिमा का गुणगान करती है। यह आरती भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। आरती के दौरान भक्त मंत्रों का उच्चारण करते हैं और भगवान के सामने दीप जलाते हैं। यह एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव होता है, जिसमें भक्त अपनी श्रद्धा और प्रेम के साथ भगवान को अर्पित करते हैं।

Image Credit Pujan N Pujari

श्री मेहंदीपुर बाला जी की आरती

मेहंदीपुर बालाजी की आरती के बोल सरल और भावनात्मक होते हैं। इनमें भगवान हनुमान की शक्ति और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। यहाँ एक सामान्य आरती के बोल दिए गए हैं:

ॐ जय हनुमत वीरा स्वामी जय हनुमत वीरा
संकट मोचन स्वामी तुम हो रणधीरा।। ॐ

पवन – पुत्र अंजनी – सुत महिमा अति भारी।
दुःख दरिद्र मिटाओ संकट सब हारी।। ॐ

बाल समय में तुमने रवि को भक्ष लियो।
देवन स्तुति किन्ही तबही छोड़ दियो।। ॐ

कपि सुग्रीव राम संग मैत्री करवाई।
बाली बली मराय कपीशाहि गद्दी दिलवाई।। ॐ

जारि लंक को ले सिय की सुधि वानर हर्षाये।
कारज कठिन सुधारे रधुवर मन भाये।। ॐ

शक्ति लगी लक्ष्मण के भारी सोच भयो।
लाय संजीवन बूटी दुःख सब दूर कियो।। ॐ

ले पाताल अहिरावण जबहि पैठि गयो।
ताहि मारि प्रभु लाये जय जयकार भयो।। ॐ

घाटे मेंहदीपुर में शोभित दर्शन अति भारी।
मंगल और शनिश्चर मेला है जारी।। ॐ

श्री बालाजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत इन्द्र हर्षित मन वांछित फल पावे।।ॐ

मेहंदीपुर बालाजी आरती का समय और प्रक्रिया

मेहंदीपुर बालाजी की आरती आमतौर पर दिन में दो बार होती है: सुबह और शाम।

  1. सुबह की आरती: सुबह के समय भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान कर मंदिर पहुँचते हैं। यहाँ विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिसके बाद आरती का आयोजन होता है।
  2. शाम की आरती: शाम के समय भी भक्त फिर से मंदिर में एकत्र होते हैं। इस समय की आरती में विशेष ध्यान दिया जाता है और भक्त अपने मन की इच्छाओं को भगवान के समक्ष रखते हैं।

आरती के दौरान दीप जलाना, फूल चढ़ाना और मंत्रों का उच्चारण करना अनिवार्य होता है। भक्त अक्सर समूह में आरती गाते हैं, जिससे एक सामूहिक धार्मिक अनुभव बनता है।

मेहंदीपुर बालाजी आरती के लाभ

  • मानसिक शांति: आरती के दौरान ध्यान और मंत्र जाप से मानसिक शांति मिलती है।
  • धार्मिक अनुशासन: नियमित आरती करने से भक्तों में अनुशासन और धैर्य बढ़ता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: आरती के माध्यम से भक्त भगवान के करीब पहुँचते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।
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