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श्री गणेश स्तोत्रस्तोत्र

विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 29, 2026 6:34 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 29, 2026
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विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम्

विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् भगवान गणेश को समर्पित एक पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जो सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह स्तोत्र मुद्गल पुराण में वर्णित है और इसे भगवान गणेश के सिद्धिविनायक स्वरूप की स्तुति के लिए रचा गया है। सिद्धिविनायक का अर्थ है “सिद्धि प्रदान करने वाला,” और यह स्तोत्र भक्तों के जीवन से सभी प्रकार के विघ्नों (बाधाओं) को दूर करने और सुख, समृद्धि, ज्ञान, और संतान प्राप्ति जैसे वरदानों को प्रदान करने के लिए जाना जाता है।

Contents
  • विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम्
  • विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् – Vighna Nivarakam Siddhivinayaka Stotram
  • स्तोत्र का महत्व
  • स्तोत्र का पाठ और विधि
  • लाभ और प्रभाव

इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो जीवन में बाधाओं, संकटों, या अज्ञानता से जूझ रहे हैं। सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है, और इस दिन इस स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् – Vighna Nivarakam Siddhivinayaka Stotram

विघ्नेश विघ्नचयखण्डननामधेय श्रीशङ्करात्मज सुराधिपवन्द्यपाद ।
दुर्गामहाव्रतफलाखिलमङ्गलात्मन् विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥१॥

सत्पद्मरागमणिवर्णशरीरकान्तिः श्रीसिद्धिबुद्धिपरिचर्चितकुङ्कुमश्रीः ।
दक्षस्तने वलयितातिमनोज्ञशुण्डो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥२॥

पाशाङ्कुशाब्जपरशूंश्च दधच्चतुर्भिर्दोर्भिश्च शोणकुसुमस्रगुमाङ्गजातः ।
सिन्दूरशोभितललाटविधुप्रकाशो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥३॥

कार्येषु विघ्नचयभीतविरञ्चिमुख्यैः सम्पूजितः सुरवरैरपि मोदकाद्यैः ।
सर्वेषु च प्रथममेव सुरेषु पूज्यो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥४॥

शीघ्राञ्चनस्खलनतुङ्गरवोर्ध्वकण्ठस्थूलोन्दुरुद्रवणहासितदेवसङ्घः ।
शूर्पश्रुतिश्च पृथुवर्तुलतुङ्गतुन्दो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥५॥

यज्ञोपवीतपदलम्भितनागराजो मासादिपुण्यददृशीकृतऋक्षराजः ।
भक्ताभयप्रद दयालय विघ्नराज विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥६॥

सद्रत्नसारततिराजितसत्किरीटः कौसुम्भचारुवसनद्वय ऊर्जितश्रीः ।
सर्वत्रमङ्गलकरस्मरणप्रतापो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥७॥

देवान्तकाद्यसुरभीतसुरार्तिहर्ता विज्ञानबोधेनवरेण तमोपहर्ता ।
आनन्दितत्रिभुवनेशु कुमारबन्धो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥८॥

इति मौद्गलोक्तं विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

 

स्तोत्र का महत्व

विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् का महत्व इसकी चमत्कारी शक्ति और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने की क्षमता में निहित है। यह स्तोत्र निम्नलिखित कारणों से विशेष माना जाता है:

  1. विघ्न निवारण: यह स्तोत्र भक्तों के जीवन से सभी प्रकार की बाधाओं, जैसे आर्थिक, सामाजिक, या व्यक्तिगत समस्याओं को दूर करता है।
  2. सिद्धि प्राप्ति: सिद्धिविनायक भगवान गणेश सभी सिद्धियों (आध्यात्मिक और भौतिक उपलब्धियों) के दाता हैं। इस स्तोत्र के पाठ से भक्तों को सिद्धि और समृद्धि प्राप्त होती है।
  3. ज्ञान और बुद्धि: यह स्तोत्र अज्ञानता के अंधकार को दूर कर भक्तों को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है।
  4. संतान प्राप्ति: निःसंतान दंपतियों के लिए यह स्तोत्र विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि यह संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देता है।
  5. रक्षा और भय निवारण: यह स्तोत्र भूत-प्रेत, बुरी शक्तियों, और अन्य भयों से रक्षा करता है।

स्तोत्र का पाठ और विधि

विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् का पाठ करने की विधि सरल और प्रभावी है। निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

  1. शुद्धता: पाठ करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल: एक शांत और स्वच्छ स्थान पर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  3. पूजन सामग्री: दीपक, धूप, फूल, चंदन, दूर्वा (दूब घास), और मोदक (लड्डू) जैसे प्रसाद तैयार करें।
  4. प्रारंभ: गणेश जी को प्रणाम करें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  5. स्तोत्र पाठ: पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् का पाठ करें। इसे 3, 5, या 11 बार पढ़ा जा सकता है।
  6. समापन: पाठ के बाद गणेश जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
  7. नियमितता: सर्वोत्तम परिणामों के लिए इस स्तोत्र का पाठ नियमित रूप से, विशेषकर बुधवार को, करें।

लाभ और प्रभाव

विघ्ननिवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् के नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • आर्थिक समृद्धि: धन की कमी दूर होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
  • शैक्षिक सफलता: विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  • संतान सुख: निःसंतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
  • मानसिक शांति: तनाव, चिंता, और भय से मुक्ति मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: भगवान गणेश की कृपा से आध्यात्मिक प्रगति होती है।
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