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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > भजन > विष्णु भजन > प्रभु तुम अपनो बिरद सँभारो
भजनविष्णु भजन

प्रभु तुम अपनो बिरद सँभारो

Sanatani
Last updated: जनवरी 23, 2026 7:51 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 23, 2026
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प्रभु  तुम अपनो बिरद सँभारो – प्रार्थना | Prabhu Tum Apano Birad Sanbhaaro Lyrics

प्रभु ! तुम अपनो बिरद सँभारो ।

अधम-उधारन नाम धरायो अब मत ताहि बिसारो ।।

मोसों अधिक अधम को जगमहूँ, पापिनमहँ सरदारो ।

ढूँढ़ ढूँढ़ जग अघ अति कीन्हे गनत न आवै पारो ॥

मोरे अघकौं लिखत लिखावत, चित्रगुप्त पचि हारो ।

तऊ न आयो अंत अघनको,छाड़ी कलम बिचारो ।।

अबलों अधम अनेक उधारे, हारो । बिचारो ।।

मो सों पल्लो डारो । राखो लाज नाम अपनेकी, मत खोबो पतियारो ।।

चेत कर नर चेत कर गफ़लतमें – Chet Kar Nar Chet Kar Gafalata Men Sona Chhod De
भीषण तम परिपूर्ण निशीथिनि – Bheeshan Tamapariporn Nishethini
जर्यात देव जयति देव जय दयालु देवा
ऊधौ सो मनमोहन रूप
सौंप दिये मन प्राण उसी को मुखसे गाते उसका नाम
TAGGED:राग बागेश्री ( Raag Baageshree )
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