By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SanatanWeb.comSanatanWeb.comSanatanWeb.com
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
      • धर्मशास्त्र
      • कामशास्त्र
      • रसायनशास्त्र
      • संगीतशास्त्र
      • ज्योतिषशास्त्र
      • अर्थशास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Reading: सूर्य ग्रह स्तोत्रम्
Share
Font ResizerAa
SanatanWeb.comSanatanWeb.com
  • सनातनज्ञान
  • गीतकाव्य
  • आरोग्य
  • ज्योतिष
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
Search
  • सनातनज्ञान
    • वेद
    • उपनिषद
    • शास्त्र
    • पुराण
    • उपपुराण
    • सूत्र
  • गीतकाव्य
    • अष्टकम्
    • आरती
    • स्तोत्र
    • कथाए
    • कवचम्
    • कविताये और प्राथनाए
    • गरबा
    • चालीसा
    • भजन
    • भारत माता
    • मंत्र
    • शाबर मंत्र
    • शतकम्
    • संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
    • सूक्तम्
  • आरोग्य
    • आयुर्वेद
    • घरेलू उपचार
    • योग और योगासन
  • ज्योतिष
    • ज्योतिष उपाय
    • राशि चिन्‍ह
    • राशिफल
    • हस्तरेखा
  • त्यौहार
  • धार्मिक पुस्तके
  • प्राचीन मंदिर
  • व्यक्तिपरिचय
  • हिन्दी
    • हिन्दी
    • English
    • ગુજરાતી
Follow US
SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > स्तोत्र > नवग्रह स्तोत्र > सूर्य ग्रह स्तोत्रम्
नवग्रह स्तोत्रस्तोत्र

सूर्य ग्रह स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: जनवरी 26, 2026 6:39 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 26, 2026
Share
SHARE

सूर्य ग्रह स्तोत्रम्

सूर्य ग्रह स्तोत्रम्(Surya Graha Stotram)सूर्य ग्रह की महिमा और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए रचित है। सूर्य, जिन्हें ‘आदित्य’ के नाम से भी जाना जाता है, को नवग्रहों का आदिदेव और सृष्टि के संरक्षणकर्ता माना गया है। इस स्तोत्र के माध्यम से भक्त सूर्यदेव से अपनी सभी प्रकार की समस्याओं और पीड़ाओं को हरने की प्रार्थना करता है।

Contents
  • सूर्य ग्रह स्तोत्रम्
  • सूर्य ग्रह स्तोत्रम् श्लोक का अर्थ
  • सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का महत्व
  • सूर्य स्तोत्र का पाठ करने की विधि
  • सूर्य ग्रह स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
    • सूर्य ग्रह स्तोत्रम् क्या है?
    • सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ क्यों किया जाता है?
    • सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने का सही समय और विधि क्या है?
    • सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने के लाभ क्या हैं?
    • सूर्य ग्रह स्तोत्रम् को कौन पढ़ सकता है?

ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः।
विषणस्थानसंभूतां पीडां हरतु मे रविः।

grahaanaamaadiraadityo lokarakshanakaarakah’.
vishanasthaanasambhootaam peed’aam haratu me ravih’.

सूर्य ग्रह स्तोत्रम् श्लोक का अर्थ

1.ग्रहाणामादिरादित्यो:
इसका अर्थ है कि सूर्य सभी ग्रहों के आदिदेव और प्रमुख हैं। उनका स्थान ग्रहों के बीच सर्वोपरि है।

2.लोकरक्षणकारकः:
सूर्य को इस सृष्टि के रक्षक के रूप में वर्णित किया गया है। वे जीवनदायी ऊर्जा प्रदान करते हैं और संपूर्ण सृष्टि का पोषण करते हैं।

3.विषणस्थानसंभूतां पीडां हरतु मे रविः:
इस पंक्ति में व्यक्ति सूर्यदेव से प्रार्थना करता है कि वे उनके जीवन की सभी कठिनाइयों और पीड़ाओं को हर लें, जो दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों के कारण उत्पन्न हुई हैं।

सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का महत्व

1.आरोग्य का वरदान:
सूर्यदेव को स्वास्थ्य और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस श्लोक का नित्य जाप करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

2.आध्यात्मिक उन्नति:
सूर्य ग्रह का ध्यान व्यक्ति को आत्मिक उन्नति प्रदान करता है। यह आत्मविश्वास, साहस और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाता है।

3.कुंडली के दोषों का निवारण:
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में है, तो इस स्तोत्र का जाप लाभकारी होता है। यह जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ प्रभाव लाता है।

4.प्राकृतिक शक्ति का स्तुति:
सूर्यदेव को प्राकृतिक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। उनका ध्यान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता, स्थिरता और समृद्धि लाता है।

सूर्य स्तोत्र का पाठ करने की विधि

  1. प्रातःकाल स्नानादि के बाद, पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्वच्छ आसन पर बैठें।
  2. शांत मन से सूर्यदेव का ध्यान करें।
  3. इस श्लोक का कम से कम 11 बार जाप करें।
  4. जाप के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य (जल) अर्पित करें।

सूर्य ग्रह स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. सूर्य ग्रह स्तोत्रम् क्या है?

    सूर्य ग्रह स्तोत्रम् एक प्राचीन वैदिक स्तुति है जो सूर्य देवता की आराधना के लिए रची गई है। यह स्तोत्र सूर्य की ऊर्जा, प्रकाश और जीवनदायिनी शक्ति का गुणगान करता है। इसे नियमित रूप से पाठ करने से जीवन में सकारात्मकता, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त होती है।

  2. सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ क्यों किया जाता है?

    सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ सूर्य देवता की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद से जीवन की समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से स्वास्थ्य सुधार, आत्मविश्वास बढ़ाने और कुंडली में सूर्य ग्रह की अशुभ स्थिति को शांत करने के लिए प्रभावी माना जाता है।

  3. सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने का सही समय और विधि क्या है?

    सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ सुबह के समय, विशेषकर सूर्योदय के दौरान, सबसे उपयुक्त माना जाता है। पाठ करते समय स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। शांत चित्त और भक्ति भाव से इसका पाठ करें।

  4. सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने के लाभ क्या हैं?

    सूर्य ग्रह स्तोत्रम् का पाठ करने के अनेक लाभ हैं:u003cbru003e1.शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार।u003cbru003e2.आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि।u003cbru003e3.ग्रह दोषों से मुक्ति।u003cbru003e4.जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता का आगमन।u003cbru003e5.समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति।

  5. सूर्य ग्रह स्तोत्रम् को कौन पढ़ सकता है?

    सूर्य ग्रह स्तोत्रम् को कोई भी व्यक्ति पढ़ सकता है, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। यह किसी भी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है। पाठ करते समय शुद्धता और श्रद्धा का होना आवश्यक है। यदि पाठ के श्लोक ठीक से उच्चारित न हों, तो किसी ज्ञानी व्यक्ति या गुरु की सहायता लेनी चाहिए।

कल्याण वृष्टि स्तोत्रम्
श्री कूर्म स्तोत्रम्
सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम्
विघ्नविनाशक स्तोत्रम्
नरसिम्हा स्तुति
TAGGED:Surya Graha Stotram
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
1.8kLike
PinterestPin
1.3kFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
WhatsAppFollow

Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Popular News
नवग्रह स्तोत्रसूर्य स्तोत्रस्तोत्र

सूर्य प्रातः स्मरण स्तोत्रम्

Sanatani
Sanatani
जनवरी 26, 2026
गौरिकृतं हेरम्ब स्तोत्रम्
नव दुर्गा स्तोत्रम्
नवग्रह स्तुति
भारत में पिंडदान का महत्व और लोकप्रिय स्थान (Pind Daan)
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

About US

SanatanWeb सनातन धर्म, वेदांत और भारतीय संस्कृति का विश्वसनीय मंच है। यहाँ शास्त्रों का सार, पूजा विधि, मंत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और परंपराओं से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
सनातानवेब
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
क़ानूनी
  • अस्वीकरण
  • नियम और शर्तें
  • Privacy Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

© 2026 Sanatanweb.com - Proudly made with ♥︎ in india.
sanatanweb-logo Sanatanweb logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?