सोम स्तोत्रम्
सोम स्तोत्रम्(Soma Stotram) एक पवित्र वैदिक स्तोत्र है, जो चंद्रदेव (सोम) की स्तुति और प्रार्थना के लिए रचा गया है। चंद्रमा को हिंदू धर्म में देवताओं के राजा, शीतलता, मनोबल, सौम्यता, और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है। सोम स्तोत्रम् का पाठ विशेष रूप से मानसिक शांति, मनोविकारों से मुक्ति, और चंद्र ग्रह के अशुभ प्रभाव को समाप्त करने के लिए किया जाता है।
सोम (चंद्रदेव) का परिचय
चंद्रमा, जिन्हें सोम, रजनीश, निशाकर, या शशांक के नामों से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में नवग्रहों में से एक हैं। वे भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित हैं और जल व औषधियों के स्वामी माने जाते हैं। उनका वर्णन सौंदर्य, शीतलता, और जीवन के पोषणकर्ता के रूप में किया गया है।
ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रमा का संबंध मन, भावना, और मानसिक स्थिरता से है। कुंडली में यदि चंद्रमा कमजोर या अशुभ स्थिति में हो तो यह मानसिक तनाव, चिंता, और अस्थिरता का कारण बन सकता है।
सोम स्तोत्रम् का पाठ चंद्रमा की कृपा प्राप्त करने और उनके दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र भक्त को मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, और स्वास्थ्य प्रदान करता है। इसके नियमित पाठ से व्यक्ति को सुख-शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
सोम स्तोत्रम् का पाठ कब और कैसे करें?
पाठ का समय
- सोम स्तोत्रम् का पाठ सोमवार के दिन करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
- इसे चंद्र ग्रहण के समय भी किया जा सकता है।
- पूर्णिमा या शुक्ल पक्ष के समय इस पाठ का महत्व अधिक होता है।
पाठ की तैयारी
- सुबह स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करें।
- एक शांत और पवित्र स्थान पर बैठकर भगवान चंद्रमा का ध्यान करें।
- चंद्रदेव की मूर्ति या प्रतीक के सामने सफेद पुष्प, कच्चे दूध, और चावल अर्पित करें।
- दीपक जलाकर श्रद्धा और मनोबल के साथ पाठ शुरू करें।
सोम स्तोत्रम् का पाठ करने के लाभ
- चंद्र दोष का निवारण:
यह स्तोत्र कुंडली में कमजोर चंद्रमा या चंद्र ग्रहण के दोषों को समाप्त करता है। - मानसिक शांति और संतुलन:
पाठ से मानसिक तनाव और चिंता दूर होती है। - भावनात्मक स्थिरता:
चंद्रमा को मन और भावनाओं का स्वामी माना जाता है। इस स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति संतुलित रहती है। - स्वास्थ्य लाभ:
चंद्रदेव औषधियों और स्वास्थ्य के कारक हैं। सोम स्तोत्रम् का पाठ रक्त और मनोविकारों में लाभकारी माना गया है। - सौभाग्य और समृद्धि:
यह स्तोत्र जीवन में शीतलता, शांति, और समृद्धि लाता है।
सोम स्तोत्रम् का ज्योतिषीय महत्व
सोम स्तोत्रम् का पाठ उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जिनकी कुंडली में चंद्रमा अशुभ या कमजोर है। यह स्तोत्र चंद्र ग्रह से जुड़े निम्नलिखित दोषों का निवारण करता है:
- चंद्र ग्रहण: चंद्र ग्रहण के प्रभाव को शांत करता है।
- चंद्रमा की कमजोरी: मानसिक अस्थिरता और भावनात्मक समस्याओं का समाधान करता है।
- चंद्रमा का राहु-केतु के साथ संयोग: राहु और केतु के अशुभ प्रभावों को कम करता है।
चंद्रदेव की प्रसन्नता के उपाय:
- सफेद रंग की वस्तुएं जैसे दूध, चावल, या सफेद कपड़े का दान करें।
- सोमवार को व्रत रखें।
- शिवजी की पूजा करें क्योंकि वे चंद्रमा के स्वामी हैं।
सोम स्तोत्रम्
श्वेताम्बरोज्ज्वलतनुं सितमाल्यगन्धं
श्वेताश्वयुक्तरथगं सुरसेविताङ्घ्रिम्।
दोर्भ्यां धृताभयगदं वरदं सुधांशुं
श्रीवत्समौक्तिकधरं प्रणमामि चन्द्रम्।
आग्नेयभागे सरथो दशाश्वश्चात्रेयजो यामुनदेशजश्च।
प्रत्यङ्मुखस्थश्चतुरश्रपीठे गदाधरो नोऽवतु रोहिणीशः।
चन्द्रं नमामि वरदं शङ्करस्य विभूषणम्।
कलानिधिं कान्तरूपं केयूरमकुटोज्ज्वलम्।
वरदं वन्द्यचरणं वासुदेवस्य लोचनम्।
वसुधाह्लादनकरं विधुं तं प्रणमाम्यहम्।
श्वेतमाल्याम्बरधरं श्वेतगन्धानुलेपनम्।
श्वेतछत्रोल्लसन्मौलिं शशिनं प्रणमाम्यहम्।
सर्वं जगज्जीवयसि सुधारसमयैः करैः।
सोम देहि ममारोग्यं सुधापूरितमण्डलम्।
राजा त्वं ब्राह्मणानां च रमाया अपि सोदरः।
राजा नाथश्चौषधीनां रक्ष मां रजनीकर।
शङ्करस्य शिरोरत्नं शार्ङ्गिणश्च विलोचनम्।
तारकाणामधीशस्त्वं तारयाऽस्मान्महापदः।
कल्याणमूर्ते वरद करुणारसवारिधे।
कलशोदधिसञ्जात कलानाथ कृपां कुरु।
क्षीरार्णवसमुद्भूत चिन्तामणिसहोद्भव।
कामितार्थान् प्रदेहि त्वं कल्पद्रुमसहोदर।
श्वेताम्बरः श्वेतविभूषणाढ्यो गदाधरः श्वेतरुचिर्द्विबाहुः।
चन्द्रः सुधात्मा वरदः किरीटी श्रेयांसि मह्यं प्रददातु देवः।
सोम स्तोत्रम् पर पूछे जाने वाले प्रश्न
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सोम स्तोत्रम् क्या है?
सोम स्तोत्रम् एक वैदिक मंत्रों का संग्रह है जो चंद्र देवता सोम की स्तुति और प्रार्थना के लिए उपयोग किया जाता है। इसे वेदों में वर्णित सोम रस और चंद्रमा के प्रतीकात्मक महत्व से जोड़ा जाता है। सोम स्तोत्रम् में चंद्रमा की महिमा, उसकी शीतलता, और जीवनदायिनी शक्तियों की प्रशंसा की गई है।
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सोम स्तोत्रम् का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
सोम स्तोत्रम् का नियमित पाठ मानसिक शांति, चित्त की शुद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। इसे पढ़ने से मन और मस्तिष्क शांत होते हैं, विशेष रूप से तनाव और चिंता कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही, यह भक्त को चंद्रमा से जुड़ी सकारात्मक ऊर्जा और शीतलता प्रदान करता है।
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सोम स्तोत्रम् का पाठ कैसे करना चाहिए?
सोम स्तोत्रम् का पाठ करने के लिए सुबह या शाम का समय सबसे शुभ माना जाता है। पाठ करते समय एक शांत और पवित्र स्थान चुनें, और चंद्रमा की ओर ध्यान केंद्रित करें। पाठ के दौरान मन को एकाग्र रखें और शुद्ध उच्चारण का ध्यान दें। पूर्णिमा की रात को इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
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क्या सोम स्तोत्रम् का पाठ किसी विशेष दिन करना चाहिए?
सोमवार और पूर्णिमा के दिन सोम स्तोत्रम् का पाठ विशेष रूप से प्रभावशाली और फलदायी माना जाता है। चंद्र ग्रहण के समय या जब चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो (जैसे अमावस्या), तब भी इसका पाठ करने से लाभ होता है।
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क्या सोम स्तोत्रम् से स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव पड़ता है?
हां, सोम स्तोत्रम् का पाठ मन और शरीर दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसकी ऊर्जा शरीर की शीतलता बनाए रखने में सहायक होती है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। इसे पढ़ने से अनिद्रा, तनाव, और मानसिक थकान से राहत मिलती है। कई भक्त इसे चंद्रमा की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए भी उपयोग करते हैं।



