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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > आरती > आरती श्री कृष्ण जी की
आरती

आरती श्री कृष्ण जी की

Sanatani
Last updated: जनवरी 20, 2026 8:14 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 20, 2026
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श्री कृष्ण जी की आरती(Krishna Aarti) हिंदू धर्म में भगवान श्री कृष्ण की पूजा और भक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्री कृष्ण को विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है, और उनकी पूजा विशेष रूप से भाद्रपद महीने में जन्माष्टमी के अवसर पर की जाती है। आरती का अर्थ होता है “आराधना” या “भक्ति के माध्यम से ईश्वर की स्तुति करना।” श्री कृष्ण जी की आरती उनके भक्तों द्वारा उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है।

Contents
  • श्री कृष्ण जी की आरती का महत्व Importance of Shri Krishna Aarti
  • श्री कृष्ण जी की प्रसिद्ध आरति
  • आरती करने का सही तरीका
  • श्री कृष्ण जी की आरती के लाभ Benefits of Shri Krishna Aarti

श्री कृष्ण जी की आरती का महत्व Importance of Shri Krishna Aarti

आरती करने का उद्देश्य भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करना है। इसे करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है। श्री कृष्ण जी की आरती में उनके अद्वितीय लीलाओं और रूपों की प्रशंसा की जाती है। भक्त आरती के माध्यम से भगवान से जीवन में मार्गदर्शन और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।

श्री कृष्ण जी की प्रसिद्ध आरति

श्री कृष्ण की कई आरतियाँ हैं, लेकिन कुछ विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। इन आरतियों को मंदिरों में, घरों में, और त्योहारों पर गाया जाता है। इनमें से एक लोकप्रिय आरती है:

ॐ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे।

भक्तन के दुख सारे पल में दूर करे।

परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी, जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी ।

कर कंकन कटि सोहत कानन में बाला, मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला ।

दीन सुदामा तारे दरिद्रों के दुख टारे, गज के फन्द छुड़ाए भव सागर तारे।

हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रूप धरे, पाहन से प्रभु प्रगटे जम के बीच परे ।

केशी कंस विदारे नल कूबर तारे, दामोदर छवि सुन्दर भगतन के प्यारे।

काली नाग नथैया नटवर छवि सोहे, फन-फन नाचा करते नागन मन मोहे।

राज्य उग्रसेन पाये माता शोक हरे, द्रुपद सुता पत राखी करुणा लाज भरे।

ॐ जय श्री कृष्ण हरे।

आरती करने का सही तरीका

  1. स्नान और शुद्धि: आरती से पहले शारीरिक और मानसिक शुद्धता आवश्यक होती है। पूजा करने से पहले स्नान कर लें और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  2. दीपक जलाएं: घी या तेल का दीपक जलाकर भगवान श्री कृष्ण के सामने रखें। दीपक से भगवान का पूजन करें।
  3. घंटा बजाना: आरती के दौरान घंटा या घंटी बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पूजा में सकारात्मकता का संचार होता है।
  4. भक्ति भाव: आरती को पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव से करें। भजन गाते समय भगवान के प्रति ध्यान केंद्रित करें और उनके गुणों का स्मरण करें।
  5. प्रसाद वितरण: आरती के बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद का वितरण करें। इससे सभी भक्तों को आशीर्वाद मिलता है।

श्री कृष्ण जी की आरती के लाभ Benefits of Shri Krishna Aarti

  • आध्यात्मिक शांति: आरती करने से मन को शांति और संतुलन मिलता है। यह मानसिक तनाव को कम करता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: आरती के माध्यम से भगवान के प्रति समर्पण और विश्वास में वृद्धि होती है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा: आरती से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • दुःखों का नाश: श्री कृष्ण जी की आरती करने से जीवन में आने वाले कष्टों और दुःखों का नाश होता है।
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