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सरस्वती स्तोत्रस्तोत्र

शारदा महिम्ना स्तोत्रम्

Sanatani
Last updated: फ़रवरी 11, 2026 7:00 अपराह्न
Sanatani
Published: फ़रवरी 11, 2026
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शारदा महिम्ना स्तोत्रम्

शारदा महिम्ना स्तोत्रम् देवी शारदा (या सरस्वती) की महिमा का स्तोत्र है, जिसे ज्ञान, संगीत, कला और शिक्षा की देवी के रूप में पूज्य देवी सरस्वती के लिए रचा गया है। यह स्तोत्र न केवल भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का स्रोत माना जाता है, बल्कि विद्यार्थियों, कलाकारों और शोधकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा का माध्यम है।

Contents
  • शारदा महिम्ना स्तोत्रम्
  • शारदा महिम्ना स्तोत्रम् का महत्व
  • स्तोत्र का इतिहास एवं संरचना
  • पाठ विधि एवं उपयुक्त समय
  • शारदा महिम्ना स्तोत्रम् – Sharada Mahimna Stotram

शारदा महिम्ना स्तोत्रम् का महत्व

  • ज्ञान का स्रोत:
    देवी शारदा को सभी प्रकार के ज्ञान, विद्या और सृजनात्मकता का आदान-प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में माना जाता है। इस स्तोत्र में उनके दिव्य गुणों और तेजस्विता का वर्णन किया गया है, जो ज्ञान और बुद्धिमत्ता के प्रसार में सहायक है।
  • विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए वरदान:
    नियमित पाठ से मन की शांति, एकाग्रता और रचनात्मक शक्ति में वृद्धि होती है। विद्यार्थी अपने अध्ययन में सफलता पाते हैं और कलाकारों को नई ऊर्जा एवं प्रेरणा मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति:
    यह स्तोत्र भक्तों के आंतरिक शुद्धिकरण, मानसिक संतुलन एवं आत्म-साक्षात्कार की दिशा में मार्गदर्शक सिद्ध होता है।

स्तोत्र का इतिहास एवं संरचना

  • प्राचीन परंपरा:
    शारदा महिम्ना स्तोत्रम् का रचनात्मक आधार पौराणिक और तांत्रिक साहित्य में निहित है। इसके सटीक रचयिता का उल्लेख अनेक ग्रन्थों में मिलता है, हालांकि समय के साथ इसकी परंपरा को कई संतों और विद्वानों ने अपनाया और संवर्धित किया है।
  • वर्णनात्मक छंद:
    स्तोत्र में देवी शारदा के विभिन्न रूपों, गुणों और दिव्य आभा का विस्तार से वर्णन किया गया है। प्रत्येक छंद में उनकी सुंदरता, कृपा, ज्ञान की चमक और दयालुता का गुणगान होता है, जिससे भक्तों में श्रद्धा एवं भक्ति की अनुभूति होती है।

पाठ विधि एवं उपयुक्त समय

  • स्थान एवं समय:
    स्तोत्र का पाठ preferably शांति और स्वच्छता वाले स्थान पर, जैसे कि मंदिर या पूजा गृह में किया जाना चाहिए। सुबह के समय या सरस्वती पूजा एवं वसंत पंचमी के अवसर पर इसका पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
  • पूर्व तयारी:
    पाठ से पूर्व स्नान करके शुद्ध मन और शरीर के साथ, देवताओं की मूर्ति या चित्र के सामने दीप, पुष्प एवं नैवेद्य अर्पित कर स्तोत्र का पाठ करना उत्तम होता है।
  • श्रद्धा एवं मनन:
    पाठ के दौरान श्रद्धा के साथ, देवी शारदा के विभिन्न गुणों पर मनन करते हुए, उनके आशीर्वाद की कामना करनी चाहिए। इससे स्तोत्र का प्रभाव और भी गहरा हो जाता है।

शारदा महिम्ना स्तोत्रम् – Sharada Mahimna Stotram

शङ्गाद्रिवासाय विधिप्रियाय कारुण्यवाराम्बुधये नताय।
विज्ञानदायाखिलभोगदाय श्रीशारदाख्याय नमो महिम्ने।
तुङ्गातटावासकृतादराय भृङ्गालिविद्वेषिकचोज्ज्वलाय।
अङ्गाधरीभूतमनोज्ञहेम्ने श‍ृङ्गारसीम्नेऽस्तु नमो महिम्ने।
वीणालसत्पाणिसरोरुहाय शोणाधरायाखिलभाग्यदाय।
काणादशास्त्रप्रमुखेषु चण्डप्रज्ञाप्रदायास्तु नमो महिम्ने।
चन्द्रप्रभायेशसहोदराय चन्द्रार्भकालङ्कृतमस्तकाय।
इन्द्रादिदेवोत्तमपूजिताय कारुण्यसान्द्राय नमो महिम्ने।

उमा महेश्वर स्तोत्रम्
देवी आनंद लहरी स्तोत्रम्
तिरुप्पावै
लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्रम्
अंगारक कवचम् (कुज कवचम्)
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