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SanatanWeb.com > Blog > गीतकाव्य > आरती > शाकम्भरी देवी की आरती
आरती

शाकम्भरी देवी की आरती

Sanatani
Last updated: जनवरी 21, 2026 6:49 अपराह्न
Sanatani
Published: जनवरी 21, 2026
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शाकम्भरी देवी की आरती

शाकम्भरी देवी को हिंदू धर्म में माँ दुर्गा का एक रूप माना जाता है। यह देवी विशेष रूप से वनस्पति और हरियाली की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। शाकम्भरी देवी की पूजा और आराधना विशेष रूप से उत्तर भारत के कई स्थानों में की जाती है, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, और हरियाणा में। देवी शाकम्भरी को समर्पित कई मंदिर भी हैं, जिनमें शाकम्भरी माता मंदिर प्रमुख हैं।

Contents
  • शाकम्भरी देवी की आरती
  • श्री शाकम्भरी आरती
    • शाकम्भरी देवी का स्वरूप और कथा
    • शाकम्भरी देवी की पूजा के पर्व

शाकम्भरी देवी की आरती का गान उनके भक्तों द्वारा किया जाता है, जिससे मन, तन और आत्मा को शुद्ध किया जाता है। आरती के माध्यम से भक्त देवी से कृपा और संरक्षण की प्रार्थना करते हैं। आइए, शाकम्भरी देवी की आरती की पूरी जानकारी के साथ इसे समझें।

श्री शाकम्भरी आरती

जय देवि जय देवि जय जगदाधारे ।
शाकम्भरि विश्वेश्वरि जय तिलकागारे ॥ ध्रु०॥

वर्षाभावान्मातः शतवर्षम्भुवनम् ।
अन्नाभावाज्जातं कामदभिपन्नम् ।
चक्षुःशतकाद्वर्षं वर्षन्त्या भुवनम् ।
शताक्षिरक्षितमेतद्दत्वा पूर्णान्नम् ॥ १॥

निजतनुसम्भवशाकैरक्षितमितिभुवनम् ।
शाकम्भरीतिनाम प्राप्तं त्वघशमनम् ।
लोकत्रयपीडाकर दुर्गासुर हननात् ।
दुर्गेत्याख्या जाता शिवसुन्दरि मान्या ॥ २॥

त्वमेव माया प्रकृतिर्जननी त्वं शान्ता ।
त्वमेव बाला बगला दुर्गा त्वं ललिता ।
त्वमेव भीमा त्वमेव हिमवद्गिरिजाता ।
त्वमेव वाणी लक्ष्मीस्त्वं रघुसुतमाता ॥ ३॥

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आरती एक ऐसा अनुष्ठान है जो किसी भी धार्मिक पूजा के अंत में की जाती है। शाकम्भरी देवी की आरती उनके भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। आरती करते समय दीपक या लौ से देवी की मूर्ति या तस्वीर के सामने पांच बार आरती की जाती है। यह प्रथा देवी के समर्पण और उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रतीक मानी जाती है।

आरती में देवी के नाम की स्तुति की जाती है और उनकी महिमा का वर्णन किया जाता है। इस आरती के माध्यम से भक्त देवी से विनती करते हैं कि वे उनकी रक्षा करें, संकटों को दूर करें, और जीवन में सुख-समृद्धि लाएँ।

शाकम्भरी देवी का स्वरूप और कथा

शाकम्भरी देवी को वनस्पति की देवी माना जाता है, और उनका नाम “शाक” (सब्जी) और “अम्भरी” (जलधारा) से बना है। माना जाता है कि देवी ने उस समय अवतार लिया जब पृथ्वी पर अकाल पड़ा था। उन्होंने अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए हजारों प्रकार की वनस्पतियों और जल का सृजन किया। इस कारण उन्हें शाकम्भरी कहा गया, जो जीवनदायिनी के रूप में पूजी जाती हैं।

शाकम्भरी देवी की पूजा के समय उनका प्रसाद विशेष रूप से हरी सब्जियों और फल-फूलों का होता है। भक्त देवी को शाकाहारी भोजन अर्पित करते हैं, जिसमें ताजे फल, सब्जियाँ, और दालें शामिल होती हैं। यह प्रसाद देवी की कृपा प्राप्ति के रूप में ग्रहण किया जाता है।

शाकम्भरी देवी की आरती के बाद ध्यान और प्रार्थना का विशेष महत्त्व होता है। भक्त आरती के बाद देवी के चरणों में ध्यान लगाकर अपने मन के विकारों को दूर करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं। ध्यान से मन को शांति मिलती है और आत्मा को संतुष्टि मिलती है।

शाकम्भरी देवी की पूजा के पर्व

शाकम्भरी देवी की पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के समय की जाती है। इसके अलावा शाकम्भरी जयंती के दिन भी देवी की पूजा की जाती है। इस दिन देवी की विशेष आराधना, हवन, और प्रसाद वितरण किया जाता है।

 


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